थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०८ कुँवार २६४५, शुक्कर ]
[ वि.सं ८ आश्विन २०७८, शुक्रबार ]
[ 24 Sep 2021, Friday ]

सावन २९ गते गुरही टिहुवार, धनगढीमे भव्यताके साथ मनैना तयारी

पहुरा | ८ श्रावण २०७८, शुक्रबार
सावन २९ गते गुरही टिहुवार, धनगढीमे भव्यताके साथ मनैना तयारी

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ८ सावन ।
धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व बोकल गुरही टिहुवार धनगढीमे भव्यताके साथ मनैना हुइल बा ।

सखी सञ्जाल कैलालीके आयोजनामे शुकके धनगढीमे हुइल छलफलसे थारु समुदायके टिहुवारके शुरुवातके रुपमे लेना गुरहीहे इहे सावन २९ गते धनगढीके गुरही चौकमे सामूहिक रुपमे मनैना हुइल हो । विगत एक दशक यहोर थारु समुदाय आपन हकअधिकार तथा पहिचानके रुपमे मनैटी आइल गुरही इ बरस फेन टरटिहुवारके संरक्षण सम्वद्र्धन सहित हकअधिकार तथा पहिचानके रुपमे मनैना हुइल हो ।

गैल बरस धनगढीलगायत आसपासके क्षेत्रमे ‘गुरही’ हे सामाजिक दूरी कायम कैके भीडभाड नैकैके मनाइल रहिट ।

कोभिड–१९ के संक्रमणके अवस्थाहे मध्यनजर कैटी सामाजिक दूरी कायम कैके, भीडभाड नैकैके आ–आपन गाउँ घरटोल समुदायमे ‘अपने बची ओ औरे जनहनहे फेन बचाइ, सुरक्षित ओ स्वस्थ रही’ कना भावसहित सुरक्षित ढंगसे गुरही मनाइल रहिट ।

थारु अगुवाहुक्रे इ बरस फेन गुरही टिहुवारहे स्वास्थ्यके सक्कु मापदण्ड पुरा कैके मनाइ पर्ना सुझाइल रहिट । छलफलमे थाकसके केन्द्रिय सदस्य प्रभातकुमार चौधरी, थाकस केन्द्रीय पार्षद पुरन चौधरी, थाकस जिल्ला सल्लाहकार जोहारीलाल चौधरी, थारु वुद्धिजीवी बुन्दीलाल चौधरी, थाकस कैलाली उपाध्यक्ष माधव चौधरी, तारानगरके भलमन्सा गोठुराम चौधरी, राष्ट्रिय थारु कलाकार मञ्च सुदूरपश्चिम संयोजक संगत चौधरी लगायत पत्रकार कलाकारहुक्रनके उपस्थिति रहल रहे ।

फाइल फोटु

थारु समुदायके टिहुवारके शुरुवातके रुपमे गुरहीहे लेजैना करजाइठ् । नागपञ्चमीके दिन इ टिहुवार मनैना हुइल ओरसे इ टिहुवारहे देशभरके थारु समुदाय धुमधामके साथ मनैना करठै ।
थारु समुदायमे ‘गुरही’ मनैनाके अर्थ, नाग बाबाहे पूजा करेबर विषालु साप घरमे नैअइना, घरमे बाज नै मर्र्ना, आगलागी नैहुइना, दुःखके बज्रपात नैपर्ना, रोगव्याधी ओ महामारी घरमे प्रवेश नैकैना विश्वास करजाइठ् । नागबाबाहे घरके डुवारमे टाँसके पूजा कैनाके आशय दुःख, कष्ट ओ रोगव्याधीहे नागबाबा घरमे प्रवेशसे रोकिट कना हो । इहीहे नागपञ्चमीके रुपमे फेन मनैना करजाइठ् ।

थारु समाजमे ‘गुरही/गुर्या’ कहिके मनाजैना इ टिहुवारहे नेपाली समाज नागपञ्चमी कहिके मनैठै । नागपञ्चमीमे विशेष कैके नेपालीहुक्रे नागबाबाके पूजाआजा करठै कलेसे थारु समाजमे ‘गुरही’ पूजा हुइठ् । थारु समाजमे फेन ठाउँअनुसार ‘गुरही’ टिहुवार फरक फरक ढंगसे मनैना करठै ।

इ टिहुवारमे गाउँके युवती गाउँसे डुरके चोकमे जाके कपडासे बनाइल छोट छोट गुरही (गाइने कीराके प्रतीक) असरैना चलन रहल बा । इ टिहुवारहे बालबालिकासे सम्बन्धित टिहुवारके रूपमे फेन लेना करल बा ।

गुरही असरैलेसे छोट छोट बालबालिकाहुक्रनके आँखी पक्ना, जुरी अइना, खटरा हुइना, उल्टी हुइना जैसिन रोग चोखैना जनविश्वास रहल बा । यकर साथे सामाजिक सद्भाव, आपसी मित्रता बह्रैनाके साथे गाउँमे हुइल दुःख, संकटलगायत अन्य विपत्ति भग्ना करल जनविश्वास रहल बा ।

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