थारु राष्ट्रिय दैनिक
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थारु समुदायके आज अट्वारी पर्व

पहुरा | २७ भाद्र २०७८, आईतवार
थारु समुदायके आज अट्वारी पर्व

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २७ भदौ ।
थारु समुदायसे आज (अँट्पारके रोज) बड्का अट्वारी पर्व मनैटी बटै । आगी ओ बर्किमारके प्रमुख पात्र भिवाहे पूजा करटी थारु समुदायहुक्रे आज अट्वारी पर्व मनाई लागल हुइट ।

कृष्ण जन्माष्टमी पाछेक दुसरा अट्वारके मनैना यी पर्व थारुहुकनके संस्कृति ओ परम्परा अनुसार अट्वारीके पहिल दिन आगीके पूजा करके रोटी ओ फलाहार करजाइठ । कलेसे दुसरा दिन भात, टिना ओ थारु पकवान डिडीबहिनीयाहुकन अग्रासन डेजाइठ । अट्वारीहे थारू समुदायमे डाडुभैया, डिडीबहिनीया ओ छरछिमेकीबीच माया, ममता, सद्भाव ओ भ्रातृत्व कायम कैना पर्वके रूपमे मनाइठ ।

थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रीय सदस्य प्रभातकुमार चौधरी यी पर्वमे डाडुभैया तथा डिडीबहिनीया बीच स्नेह ओ ममता प्रगाढ हुइना करल बा । लैहरसे भोजविह हुके ससरार चेलिबेटीन कबु–कबु अपन घरक मनैनसे भेटघाट हुइलक बरस भर हुइल रहठ, उहाँ कहलै, अटवारीके अग्रासनसंगे भेटघाट, घरेक बाटचित अदानप्रदानफे हुइनाके साथे डाडुभैया, डिडीबहिनीयाविच माया, ममताफे बह्रठ ।

फाइल फाेटु

थारु महिला सभाके जिल्ला अध्यक्ष दुर्गा कुश्मी कहठी, भोजविह हुइल चेली अष्टिमकीके अग्रासन छुटलेसेफे अट्वारी अग्रासनके भर महाअसरा रठिन, अग्रासनमे अपन गछयाअनुसार डिडीबहिनीयाहुकन १००/५० ठो अन्डीक रोटी, थारु पकवान, खुर्मा, फुलौरी, फलफूल डेना चलन रहल उहाँ बटैली । थारु अगुवाहुकनके अनुसार अट्वारी पर्व मनैना मुख्यकारण ऐतिहासिक घटनासंग जोरल बा ।

महाभारतके पाँच पाण्डवहुक्रे ओ दाङके थारु राजा दंगिशरणबीच नम्मा समयसृे मजा सम्वन्ध रहे । पाँच पाण्डव ओ द्रोपदी सक्कु जाने सुर्खेतके काँक्रेविहारमे घुम्नबेला दाङके थारु राजा दंगिशरणके राज्यमे शत्रुहुकनसे आक्रमण करे लागल खवर पत्ता पाइलपाछे तावामे पकैटी रहल रोटी छोरके पाँच पाण्डवमन्से भीम भुखे पेटमे पानी समेत नइखाके राजा दंगिशरणके पक्षमे लरल रहिट । भीमसे राजा दंगिशरणो पक्षमे लरके शत्रुहुकनहे हरैना सफल हुइल रहिट । उहे विजयी उत्सवके अवसरमे थारु समुदायसे अट्वारी मनैटी आइल बटै  ।

भिम रोटी पकैटी पकैटी लडाईमे जाई परल ओरसे रोटी एकाओरसे केल पाकल टबमारे अट्वारीमेफे पहिल रोटी नइविलटाके एकाओरसे केल पकाई उ भाग भिमके लाग रख्ना चलन बा ।

मनैना विधि ओ अग्रासनके

समान्यतयाः अट्वारी अष्टिम्की मनाइल २ हप्तापाछे अइना अट्वारके परठ । अट्वारसे आघेक् शनिच्चरके रात दर खाजाइठ । अट्वारके रोज आधा दिन ब्रत बैठ जाइठ । पहिल विधिवत पूजापाठपाछे फलफूल किल फलअहार करजाइठ । मने दिन डुबलपाछे खानपान नैकरेक परठ । ओकरपाछे, सोम्मारके रोज विहन्नी पूजापाठ अर्थात ‘फरहार’ करजाइठ ।

बनाइल टमान मेरिक परिकारहे दुई भागमे छुट्टाछुट्टे धारजाइठ । असिके छुट्याइल मन्से एक भाग चेलीबेटीहुकनहे अग्रासन (कोसेली) स्वरुप डेहक लाग राखजाइठ कलेसे एक भाग ब्रतालुहुक्रे अप्नही खाइक परठ । जिहिहे फरहार कहिजाइठ । विधिपूर्वक सोम्मारके रोज विहन्नी पूजापाठ करलपाछे फरहार करजाइठ । पहिल दिन फरहारके लाग अन्डिक रोटी, खुर्मा, बरिया, हलुवा, फलफूलके व्यवस्था करजाइठ ।

सोम्मारके रोज खरिया, पुुलौरी, आचार, सिद्रा, पोई, टोरैया, लौकक टिनालगायत परिकार बनैना प्रचलन रहल बा । उ परिकार फेन अग्रासनके रुपमे डेहे जैना करजाइठ । ओहोर भोजविह हुइल चेलीबेटी लैहरसे अइना अग्रासनके पर्खाइमे बैठल रहठै ।

कहिजाइठ, विवाहित चेलीहुक्रे लैहरसे डाडा भैयहुकनसे डेहे आइल अग्रासनसे आपन भोक मेटैठै । अग्रासन डेहे जैना डाडा भैयान्हे डिडी बहिनियाहुक्रे मानमर्जाटसम खानपान डेना प्रचलन थारु समुदायमे रहल बा । जौन कारण अट्वारीहे नारी सम्मान ओ भाईचाराके प्रतीकके रुपमे लेजाइठ ।

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