प्रदेश सरकारसे नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १८ जेठ । सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे आर्थिक बर्ष २०८३/०८४ सालके लाग नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करले बा ।
सोम्मारके रोज प्रदेश सभा बैठकमे प्रदेश प्रमुख नजिर मियाँ सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारके आर्थिक बर्ष २०८३/०८४ सालके लाग नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करल रहिट ।
संघ ओ प्रदेशके चालु आवधिक योजना एवं आगामी दुसरा पञ्चर्वीय योजनासे निदृष्ट करल लक्ष्य, उद्देश्य, प्राथमिकताके साथे पहिल पञ्चर्वीय योजना कार्यान्वयनसे सिखल पाठ ओ हासिकल करल उपलब्धीके आधारमे क्षेत्रागत आयोजनामे विनियोजित सन्तुलन कायम हुइना करके अइना बर्षके बजेट तथा कार्यक्रम तर्जुमा कैना कहल बा । आयोजना छनौट तथा प्राथमिकीकरण प्रक्रियाहे परिणाममुखी बनैना आयोजना छनौट सम्बन्धी मापदण्ड ओ आयोजना बैंकहे आधार लेके कार्यक्रम विकास ओ कार्यान्वयन कैना कहल बा ।
प्रदेश गौरवके आयोजना आगामी आर्थिक वर्ष भिटर सम्पन्न कैना करके बजेट विनियोजन, सहजीकरण, समन्वय ओ नियमन कैना प्रबन्ध मिलैना बा । खानेपानी ओरसे अधुरा आयोजना सम्पन्न कैना बाहेक प्रदेश सरकारसे रू. २५ लाखसे कम लागतके विकास आयोजनामे बजेट विनियोजन नैकैना ओ रू. २५ लाख से कम लागतके आयोजना कार्यान्वयन करेपर्ना अवस्था हुइलेसे वित्तीय हस्तान्तरण मार्फत स्थानीय तहसे कार्यान्वय कैना नीति लेना बा ।
प्रदेशके राजस्व प्रशासनहे व्यवस्थित कैना सूचना प्रविधिके प्रयोग, संस्थागत क्षमता अभिवृद्धि, करके दायरा विस्तार ओ कर सहभागिता एवं राजश्व अभिवृद्धि कैना कैना पाँच बर्षे कार्ययोजना सहित प्रदेश राजस्व सुधार रणनीति तर्जुमा करके कार्यान्वयनमे ल्यन्ना बा ।
सार्वजनिक खर्चहे मितव्ययी, पारदर्शी ओ प्रभावकारी बनैटी अनुत्पादक खर्चमे कटौती कैना, सार्वजनिक खर्चमे वित्तीय अनुशासन कायम, बेरुजु फछ्यौट तथा सम्परीक्षण कार्यहे उच्च प्राथमिकता डेना बा ।
राष्ट्रिय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोगसे सिफारिस करल आधारहे अवलम्बन करटी सशर्त अनुदानओरके वित्तीय हस्तान्तरणहे न्यायोचित, पारदर्शी ओ कार्यसम्पादनमे आधारित बनैना बा ।
“प्रदेश प्रमुख स्टार्टअप कार्यक्रम” मार्फत सीप विकास कार्यक्रम सञ्चालन करके नवयुवामे उद्यमशीलता प्रवद्र्धन करटी स्वरोजगार अभिवृद्धि कैना प्रदेश स्वरोजगार विकास कोषके क्षमता अभिवृद्धि कैना बा । वैदेशिक रोजगारसे लौटल, द्वन्द्व प्रभावित, अपाङ्ग, घाहिल, शहीद परिवार, एकल महिला, मुक्त कमैया, कमलरी, हलिया, दलित, बादी, राजी, राउटे, गरिबीके रेखाटरे रहल वर्ग ओ समुदायके स्वरोजगार बने चाहल युवायुवतीके लाग कोषसे तालिम प्रदायक निकायसंगके सहकार्यमे सीपमूलक तालिम सञ्चालन तथा सहुलियत व्याजदरमे कर्जा प्रदान कैना बा ।
प्रादेशिक अर्थतन्त्रके सबलीकरणके लाग पूर्वाधार निर्माण उत्पादनमूलक क्षेत्रमे निजी क्षेत्रके लगानी आकर्षित कैना लगानीमैत्री वातावरण सृजना करके सार्वजनिक–निजी साझेदारी प्रवद्र्धन कैना नीति अवलम्बन कैना बा । प्रदेशमे लगानीकर्ताहे आकर्षित कैना सरोकारवालासँगके सहकार्य ओ समन्वयमे प्रदेश लगानी तथा विकास सम्मेलन आयोजना कैना आवश्यक व्यवस्था मिलैना बा ।
सूचना ओ तथ्यमे आधारित नीति तर्जुमा ओ निर्णय प्रणाली विकास कैना एकीकृत तथ्याङ्क व्यवस्थापन प्रणाली विकास करके कार्यान्वयनमे ल्यन्ना बा । प्रदेशस्तरीय तथ्याङ्क सङ्कलन ओ व्यवस्थापनहे संस्थागत एवं सदृढीकरण कैना बा ।
प्रदेश सरकारके नीति तथा कार्यक्रम कार्यान्वयनहे प्रभावकारी तुल्यइना अनुगमन प्रणाली सुदृढ कैना बा । आयोजनाके अनुगमन तथा मूल्यांकनहे नतिजामुखी बनैना आवश्यक कानूनी व्यवस्था करके सूचना प्रविधिमे आधारित एकीकृत अनुगमन प्रणाली ओ एकीकृत विद्युतीय अभिलेखिकरण प्रणाली स्थापना कैना बा ।
प्रादेशिक सडक यातायात गुरुयोजनाके प्राथमिकताके आधारमे प्रदेश लोकमार्ग, प्रदेश सहायक मार्ग लगायत प्रदेशके अन्य महत्वपूर्ण सडकके विकास, बिस्तार ओ स्तरोन्नति कैना बा । सडक सञ्जालसंग नैजोरल स्थानीय तह साईपाल गाउँपालिका, अपिहिमाल गाउँपालिका ओ स्वामीकार्तिक खापर गाउँपालिका लगायतके केन्द्रहे प्रादेशिक तथा स्थानीय सडक सञ्जालसँग जोरना कार्यहे निरन्तरता डेना बा ।
सडक पूर्वाधारहे उत्पादनसँग जोरना कृषि उत्पादन क्षेत्रसे प्रदेश लोकमार्ग, राजमार्ग वा बजारसम जोरना सडकहे “कृषि आर्थिक पहुँच मार्ग“ के रुपमे बहुउपयोगी हुइना करके प्राथमिकताके साथ निर्माण कैना बा ।
प्रदेश सडक सञ्जाल गुरुयोजना अन्तर्गत निर्माण सम्पन्न हुइल कालोपत्रे सडकमे बाह्रै महिना सहज आवागमनके लाग सडक मर्मत सम्भार समूह मार्फत नियमित मर्मत कैना ओ यम्ने समावेश हुइल सडकके क्षति ओ सडक अवरुद्धके सूचना प्राप्त हुइल ७२ घण्टाभिटर प्राविधिक टोलीसे सम्बोधन कैना करके आवश्यक व्यवस्था मिलैना बा ।
सुदुरपश्चिम प्रदेशके चिसापानीसे कर्णाली प्रदेशके सुर्खेत जोरना सडक खण्डके स्तरोन्नती एवं कालोपत्रे कार्यहे शीघ्र सम्पन्न करके आवागमन सहज कैना संघ सरकार ओ कर्णाली प्रदेश सरकारसंग आवश्यक समन्वय ओ सहकार्य कैना बा ।
प्रदेशके कार्यक्षेत्र अन्तर्गत कैना निर्माण सम्पन्न हुइल झोलुङ्गे पुलके तथ्याङ्क संकलन करके आवधिक मर्मत सम्भार कैना बा । साथे, सडक सुविधा नैपुगल दुर्गम स्थान, पदमार्ग ओ घोरेटो डगरमे आवश्यक स्थानमे झोलुङ्गे पुल निर्माण कार्यहे निरन्तरता डेना बा ।
प्रदेशके सक्कु घरपरिवारहे आधारभूत खानेपानी सेवा पुगैना “आधारभूत खानेपानी“ कार्यक्रम ओ खानेपानी सक्कुहुनके पहुँचमे पुगैन “एक घर, एक धारा“ कार्यक्रम कार्यान्वयनमे ल्यन्ना बा ।
तटबन्ध, बायोइन्जिनियरिङ्ग तथा अन्य उपयुक्त प्रविधिके माध्यमसे जलउत्पन्न प्रकोप नियन्त्रण ओ योजनावद्ध नदी व्यवस्थापन करके जमिन उकास कैना कार्यहे निरन्तरता डेना बा ।
भूमिगत ओ सतह सिँचाइके अतिरिक्त टार तथा उच्च भू–भागमे लिफ्ट प्रविधिमे आधारित सिँचाइ आयोजनाके निर्माण कार्यहे निरन्तरता डेना बा । कृषि पकेट, ब्लक, जोन ओ सुपर जोन क्षेत्रहे प्राथमिकतामे धारके सिँचाइ आयोजनाके निर्माण कैना करके एकीकृत कृषि–सिँचाइ आयोजना कार्यान्वयन कैना बा ।
अशक्त, असहाय, विपन्न, लोपोन्मुख, सीमान्तकृत, दलित समुदाय, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक, अपांगता हुइल नागरिकहे सुरक्षित आवासके व्यवस्था कैना जनता आवास कार्यक्रमहे निरन्तरता डेना बा । सरकारी कार्यालयके भवनके निर्माण, मर्मत, सुधार तथा संरक्षण कैना कार्यहे निरन्तरता डेना बा । बसाँइ सराइके चापहे मध्यनजर करटी बसाँइ सराइो उच्चदर हुइल स्थानमे एकिकृत बस्ती विकासके अवधारणा कार्यान्वयनमे ल्यन्ना बा ।
सवारी साधन ओ चालक अनुमतिपत्र सम्बन्धी अभिलेखे डिजिटाइजेसन ओ अर्काइभिङ कैना बा । यातायात व्यवस्थाहे सूचना प्रविधिमैत्री बनाके चालक अनुमतिपत्र, सवारी साधन दर्ता, नविकरण, राजश्व भुक्तानी लगायतके सेवा अनलाइन प्रणालीसँग आवद्ध कैना आवश्यक व्यवस्था मिलैना बा ।
“मुख्यमन्त्री लघु उद्यम कार्यक्रम“ मार्फत प्रदेशमे रोजगारी एवं स्वरोजगारी सिर्जना करके बह्रटी जनशक्ति पलायन रोकेक लाग आवश्यक पहल कैना बा । गरिबी न्यूनीकरण कैना कार्यक्रमहे शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण कार्यक्रमसँग आवद्ध करके विशेष करके उच्च गरिबीके दर रहल स्थानीय तह अछामके ढकारी गाउँपालिका ओ कमलबजार नगरपालिका, डोटीके शिखर नगरपालिका, बाजुराके त्रिवेणी नगरपालिका ओ बैतडीके सिगास गाउँपालिका ओ शिवनाथ गाउँपालिकामे सघन रूपमे सञ्चालन करके लक्षित वर्गके जीवनस्तरमे सुधार ल्यन्ना बा ।
प्रदेशमे उपलब्ध कच्चा पदार्थके अधिकतम उपयोग कैना खालके उद्योग स्थापना ओ सञ्चालनमे जोड डेना बा । लघु, घरेलु तथा साना उद्योगके स्तरोन्नती तथा आधुनिकीकरणके लाग आवश्यक कार्यक्रम सञ्चालन कैना बा । लघु, घरेलु तथा साना उद्योगके उत्पादनहे मेला, महोत्सव, प्रदर्शनी मार्फत बजारीकरणमे टेवा पुगैना बा । संघ, प्रदेश ओ स्थानीय तहके सहकार्यमे प्रदेशस्तरीय औद्योगिक क्षेत्र स्थापना ओ निर्माणके लाग पहल कैना बा । नेपाल सरकार, स्थानीय तहसँग ओ निजी क्षेत्र समेतके समन्वय हो सहकार्यमे “एक स्थानीय तह, एक लघु औद्योगिक ग्राम“ कार्यक्रमहे विस्तार कैना बा ।
महिला, आदिवासी जनजाति, राउटे, राजी, दलित, अपाङ्ग, द्वन्द्व पीडित, सशस्त्र संघर्ष, जनआन्दोलनके घाइते, सहिद परिवार, एकल महिला लगायत आर्थिक एवम् सामाजिक रूपस पिछरल समुदायके उत्थानके लाग “दशरथ चन्द सीपमूलक एवं क्षमता अभिवृद्धि कार्यक्रम“ हे निरन्तरता डेना बा । दलित समुदायसे सञ्चालित उद्योगके प्रवद्र्धन कैना कार्यक्रमहे निरन्तरता डेना बा । महिलाके आर्थिक सशक्तीकरण, स्वरोजगार तथा उद्यम विकासहे प्रोत्साहन कैना “द्वारिका देवी ठकुरानी महिला उद्यमशीलता कार्यक्रम“ सञ्चालन कैना बा ।
“पर्यटन पूर्वाधारः समृद्ध प्रदेशे आधार“ कना नाराके साथ प्रदेशभरके धार्मिक, साँस्कृतिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक ओ सीमसार तथा ताल तलैया क्षेत्रके संरक्षण, विकास ओ प्रवद्र्धनके लाग “बाकावीर पर्यटन प्रवद्र्धन कार्यक्रम“ सञ्चालन कैना बा ।
प्रदेशके प्रमुख प्राकृतिक पर्यटकीय स्थलहे आरोग्य पर्यटन हबके रुपमे विकास कैना बा । बडिमालिका क्षेत्रके एकिकृत विकास योजना बनाके लागु कैना बा ।
अपि–सुर्मा–सैपाल–खप्तड–रानीसैन–बडिमालिका–रामारोशन क्षेत्रमे उच्च पहाडी तथा हिमाली पर्यटन प्रवद्र्धन तथा पदमार्ग निर्माण करके प्रदेशहे आकर्षक तथा सुरक्षित पर्यटन गन्तव्यके रूपमे विकास कैना बा ।
“सामुदायिक वन, प्रदेशे धन” कना नाराके साथ वन पैदावारहे आर्थिक विकास एवम् स्थानीय रोजगारीके साधनके रूपमे उपयोग कैना नीति लेना बा ।
वनक्षेत्रके व्यवस्थापन करके उत्पादन ओ उत्पादकत्व अभिवृद्धि कैना बा । स्थानीय, रैथाने, लोपोन्मुख प्रजाति ओ उच्चमूल्यके जडिबुटीको खोज तथा अनुसन्धान, उत्पादन, प्रशोधन ओ बजारिकरणके माध्यमसे मूल्य श्रङ्खला निर्माण कैना जडिबुटी पकेट क्षेत्र प्रवद्र्धन करके जडिबुटी प्रशोधन ओ प्रमाणिकरणके कार्य अगाडि बह्रैना बा ।
नदी तटीय क्षेत्रमे बाँस, बेत, सिसम, खयर, सिमल लगायतके प्रजातिके वृक्षारोपण करके स्थानीय उद्योगके लाग कच्चा पदार्थ उत्पादन कैना बा ।
गरीब, विपन्न तथा सीमान्तकृत वर्गहे प्रत्यक्ष लाभ पुग्न करके कबुलियती वन, कृषि वन ओ जीविकोपार्जन कार्यक्रम सञ्चालन कैना बा ।
मानव–प्रकृति सहअस्तित्व कायम कैना मानव–वन्यजन्तु द्वन्द्व न्यूनीकरण, डढेलो नियन्त्रण ओ वन्यजन्तु उद्धारके लाग निरोधात्मक, प्रवर्धनात्मक ओ उपचारात्मक उपाय अवलम्बन कैना बा ।
जैविक मार्गमे रहल वन अतिक्रमण क्षेत्र खाली कराके वन क्षेत्र कायम कैना बा । वनक्षेत्रमे हुइना अतिक्रमण नियन्त्रण करके विगतमे हुइल अतिक्रमण हटैना कार्यहे निरन्तरता डेना बा ।
“मुख्यमन्त्री स्वास्थ्य क्षेत्र सुधार कार्यक्रम“ अन्तर्गत प्रदेश सरकारके अस्पतालमे प्रयोगशाला, आकस्मिक सेवा, शल्यक्रिया तथा सघन उपचार कक्ष, फार्मेसी, रेडियोलोजी विभाग लगायतके अत्यावश्यक सेवाहे थप स्तरोन्नति कैना बा । सेती प्रादेशिक अस्पताल, महाकाली प्रादेशिक अस्पताल ओ टिकापुर अस्पतालहे १०० शैय्या क्षमतामे विस्तार कैना बा । साथे दार्चुला, बाजुरा, बझाङ्ग, बैतडी, अछाम ओ डोटी जिल्ला अस्पतालहे बिरामीके चाप अनुरुप न्यूनतम २५ से ५० शैय्या क्षमतामे विस्तार कैना बा । जिल्ला अस्पतालमे हाडजोर्नी, बालरोग, स्त्री तथा प्रसूति, दन्त, फिजियोथेरापी लगायतके विशेषज्ञ सेवाके क्रमशः विस्तार एवं विकास कैना बा ।
कैलाली ओ कञ्चनपुरमे थारु समुदाय लक्षित सिकेलसेल एनिमिया, थालासेमिया, हेमोफिलिया जैसिन रोगके पहिचान, निदान ओ उपचारके व्यवस्थाके लाग “घोरीघोरा स्वास्थ्य उपचार कार्यक्रम“ हे निरन्तरता डेना बा ।
“प्रदेशके समृद्धिके लाग स्वस्थ नागरिक“ कना नाराके साथ स्थानीय तहके आधारभूत अस्पतालसे प्रवाह हुइना सेवालहे थप व्यवस्थित बनैना संघ सरकार ओ सम्बन्धित स्थानीय तहसंग सहकार्य कैना बा । स्वास्थ्य कार्यालय, प्रदेश स्वास्थ्य आपूर्ति केन्द्र, प्रदेश जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला, स्वास्थ्य तालिम केन्द्र लगायतके निकाय मार्फत आधारभूत स्वास्थ्य सेवा सुदृढीकरणके लाग विशेष कार्यक्रम संचालन कैना बा । निःशुल्क उपलव्ध करैना औषधिके उपलब्धताहे सर्वसाधारणके लाग सहज हुइना करके व्यवस्थित बनैना बा ।
“मेरो स्वास्थ्यः मेरो जिम्मेवारी“ कना नारा सहित नैसर्ना तथा मानसिक रोग न्यूनीकरणके लाग स्वास्थ्य कार्यालय मार्फत नैसर्ना रोग सम्बन्धी योजना, कार्यान्वयन कैना बा । प्रदेशभिटर स्थानीय तह, निजी तथा गैर सरकारी क्षेत्रके सहकार्यमे सार्वजनिक स्थानमे खुला व्यायामशाला, प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान तथा योग, आरोग्य केन्द्र आदि स्थापना ओ सञ्चालन कैना बा ।
प्रादेशिक आयुर्वेद चिकित्सालयहे ५० शैय्या क्षमतामे स्तरोन्नती कैना । साथे जिल्ला स्थित आयुर्वेद स्वास्थ्य केन्द्रके सुदृढीकरण कैना बा । प्रदेश स्तरमे आयुर्वेद औषधि उत्पादन केन्द्र स्थापना कैना बा ।
बालबालिका, किशोर किशोरी, गर्भवती ओ सुत्केरी महिलाके पोषण अवस्था सुधारके लाग विद्यालय ओ समुदायमे आधारित स्वास्थ्य तथा पोषण प्रवद्र्धन सहित पोषण सुरक्षा कार्यक्रम लागू कैना बा । कडा कुपोषण हुइल बालबालिकाहे पोषण पुनस्र्थापना केन्द्रसम पहुँच सुनिश्चित कैना सम्बन्धित जिल्लाके सरकारी अस्पताल मार्फत आकस्मिक प्रेषणके व्यवस्था मिलैना बा ।
“प्रत्येक आमाको हक–सुरक्षित गर्भ, सुरक्षित जीवन“ कना नारा सहित मातृ तथा बाल मृत्युदर न्यूनीकरण करेक लाग “ग्रामीण अल्ट्रासाउण्ड कार्यक्रम“ हे निरन्तरता डेजाई । महिलाके पाठेघरो मुखके क्यान्सर, स्तन क्यान्सर ओ आङ खस्न रोग तथा मुटु, कलेजो ओ मृगौला सम्बन्धी रोगके पहिचान एवं निदान कैना सक्कु जिल्लामे विषेशज्ञ सहितके एकीकृत स्वास्थ्य शिविर सञ्चालन कैना बा ।
“स्वास्थ्यमे प्रविधि, समृद्धिमे गति“ कना नारा सहित बिशेषज्ञ चिकित्सा सेवाके पहुँच बह्रैना टेलिहेल्थ कार्यक्रम संचालन करटी प्रदेश मातहतके अस्पतालमे इलेक्ट्रोनिक मेडिकल रेकर्ड प्रणालीके थप विस्तार ओ व्यवस्थापन करजाई ।
स्थानीय तहसँगो सहकार्यमे अपांगता हुइल व्यक्तिके पुनस्र्थापनाके लाग सहायक सामग्री वितरण ओ समुदायमे आधारित पुनस्र्थापनाके क्षेत्रमे आवश्यक सहयोग करजैना बा । बौद्धिक अपाङ्गता ओ अटिजम हुइल बालबालिकाके स्क्रिनिंग सेवा जिल्ला स्तरमे सुरुवात कैना बा ।
“स्वास्थ्य बीमाके साथ, सेवामे विश्वास“ कना नाराके साथ महिला स्वास्थ्य स्वयम् सेविका विमा कार्यक्रमहे निरन्तरता डेना बा । प्रदेशभिटरके अस्पतालमे रहल सामाजिक सुरक्षा इकाईहे सुदृढ कैना बा । जोखिममे रहल सीमान्तीकृत ओ विपन्न वर्गके लाग लक्षित विशेष कार्यक्रम लागू करटी स्वास्थ्य बीमा ओ सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमहे विस्तार कैना बा ।
सेती, महाकाली ओ टिकापुर अस्पतालस प्रदान करटी आइल मृगौला डाईलाइसिस सेवाहे सुदृढ बनैना मौजुदा संख्यामे क्रमशः पाँच, चार ओ तीन शैय्या थप कैना तथा बयलपाटा प्रादेशिक अस्पतालमे २ शैय्या, जोगबुढा प्रादेशिक अस्पतालमे २ शैय्या, लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पतालमे ५ शैय्या ओ अन्य जिल्ला अस्पतालमे समेत न्यूनतम २ शैयाके डाईलासिस सेवा विस्तार कैना । सेती प्रादेशिक अस्पतालमे क्याथल्याब स्थापना कैना बा ।
प्रादेशिक अस्पतालमे रहल जेष्ठ नागरिक इकाईके स्तरोन्नति करटी सेती, महाकाली ओ टीकापुर अस्पतालसे एकल महिला, ’क’ वर्गके अपांगता हुइल व्यक्ति तथा जेष्ठ नागरिकहे निःशुल्क परीक्षण ओ औषधि व्यवस्थापनहे निरन्तरता डेना बा । जिल्ला अस्पतालसे संचालन कैना सेवाहे जेष्ठ नागरिक मैत्री बनैटी लैजैना बा ।
अपाङ्गता हुइल तथा सीमान्तकृत वर्गके बालबालिका लक्षित प्रोत्साहनमूलक कार्यक्रम मार्फत शिक्षाहे सर्वसुलभ एवम् समावेशी बनैना बा । सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालयसँग समन्वय करके केन्द्रीय क्याम्पस, महेन्द्रनगर ओ कैलाली बहुमुखी क्याम्पस, धनगढीमे बाह्य जिल्लासे उच्च शिक्षा अध्ययनके लाग अइना विपन्न ओ उत्पीडित विद्यार्थीके लाग छात्रावास निर्माण कैना बा ।
अनाथ बालवालिका, जेष्ठ नागरिक, अपांगता हुइल व्यक्ति, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक ओ विपन्न समुदायहे आत्मसम्मान सहित सहज ओ सुन्दर जीवनयापन करेक लाग सामाजिक सुरक्षा सम्बन्धी कार्यक्रमहे समन्वयात्मक रूपमे प्रदेशस्तरमे संचालन कैना बा ।
लैंगिक हिंसा पीडित महिला तथा बालबालिकाके संरक्षण एवं पुनस्र्थापनाके लाग प्रदेश सरकारसे निर्माणाधीन दिर्घकालिन पुनस्र्थापना केन्द्र ओ स्थानीय तह तथा सामाजिक विकास संस्था मार्फत संचालित अल्पकालिन पुनस्र्थापना केन्द्र संचालनमे सहयोग तथा सहकार्य कैना बा ।
स्थानीय तह पकेट क्षेत्र विकास अन्तर्गत “एक पालिका–दुई उत्पादन“ कार्यक्रमहे आवश्यकता अनुसार परिमार्जन तथा सुदृढीकरण करके यकर प्रभावकारिता अभिवृद्धि कैना बा । स्थानीय रैथाने बाली÷वस्तु उत्पादनमे आधारित खाद्य प्रणालीके विकास करके दिगो, समतामूलक ओ समानुकुलित खाद्य प्रणालीके विकास कैना । प्रदेशभिटर स्थानीय तहमे सञ्चालनमे रहल प्रांगारिक कृषि प्रवद्र्धन कार्यक्रमहे निरन्तरता डेके क्रमिक रुपमे जोनिङ, विकास तथा संरक्षण कैना ओ प्राङगारिक उत्पादन प्रमाणीकरण एवं बजारीकरण प्रक्रियाहे प्राथमिकताका साथ आघे बह्रैना बा ।
आन्तरिक उत्पादन अभिवृद्धि तथा आयात प्रतिस्थापनहे लक्षित करके रासायनिक मल तथा गैर रासायनिक मलके वितरण प्रणालीहे वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी ओ प्रभावकारी बनैना बा । साथे, प्राङ्गारिक मलके प्रयोगहे प्रोत्साहन कैना बा । सिँचाइ सुविधाके दिगो विस्तारमार्फत कृषि उत्पादनशीलता वृद्धि कैना बा । कृषि अनुदान प्रणालीहे डिजिटल प्रविधिमे आधारित बनाके पारदर्शिता, जवाफदेहीता तथा प्रतिफलमुखी बनैना बा ।
“पोखौं पसिना देशमै हाँसेर” कना मूल नाराहे मार्गदर्शनके रूपमे ग्रहण करटी युवा पलायन रोक्न स्वदेशमे रोजगारी सिर्जना कैना उद्देश्यसे कृषि अध्ययन करल, वैदेशिक रोजगारीसे लौटल ओ नवयुवाके कृषि उद्यमशीलता विकास करके युवामैत्री, दिगो ओ व्यवसायमुखी कृषि प्रणालीके प्रवद्र्धन कैना बा ।
प्रदेश तथा जिल्ला तहमे रहल कृषि क्षेत्रके प्रयोगशालाके गुणस्तर, क्षमता ओ पहुँच अभिवृद्धि कैना आवश्यक भौतिक पूर्वाधार, आधुनिक उपकरण, दक्ष जनशक्ति ओ कानुनी व्यवस्था, विकास तथा सुदृढीकरण कैना बा । “जनताके घरदैलोमे सरकार” के अवधारणाअनुरूप प्रयोगशाला सेवाके विस्तार करके कृषकके घर–खेतसम हाली, सहज ओ गुणस्तरीय परीक्षण सेवा तथा प्रतिवेदन उपलब्ध कैना बा । कृषि उपजके उचित मूल्य सुनिश्चित कैना बजारसंग कृषकके प्रत्यक्ष पहुँच अभिवृद्धि कैना कृषि बजार सूचना प्रणाली सञ्चालन कैना तथा एसएमएस÷डिजिटल माध्यमसे दैनिक बजार मूल्य तथा सूचना कृषक तथा उपभोक्तासम सहज ओ समयमे पुगैना व्यवस्था मिलैना बा ।
प्रदेशभिटर रहल मुक्त हलिया, मुक्त कमैया तथा कमलरीहुकनके क्षमता अभिवृद्धि, आयआर्जन ओ उत्थानशीलताके लाग विशेष कार्यक्रम सञ्चालन करटी व्यवस्थित बसोबास सुनिश्चित कैना स्थानीय, प्रदेश ओ संघ सरकारबीच समन्वय तथा संयुक्त प्रयासमार्फत पुनःस्थापनके व्यवस्था कैना बा ।

