प्राकृतिक स्रोत द्वन्द्व रूपान्तरण केन्द्र नेपालके १३औँ स्थापना दिवस
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २८ जेठ । प्राकृतिक स्रोत द्वन्द्व रूपान्तरण केन्द्र नेपालके १३औँ स्थापना दिवस मनैले बा ।
दिवसके अवसरमे सुदूरपश्चिम प्रदेशके भौतिक पूर्वाधार विकास पुर्व मन्त्री माननीय कैलाश चौधरी १३ वर्षसे समुदायमे शान्ति, मेलमिलाप, न्यायमे पहुँच तथा प्राकृतिक स्रोतसँग सम्बन्धित विवादके समाधानमे संस्थासे पुगाइल योगदान प्रशंसनीय रहल बटैलै ।
संस्थासे स्थानीय सरकार, सरोकारवाला निकाय तथा समुदायबीच समन्वय ओ सहकार्यहे मजबुत बनैटी सामाजिक सद्भाव कायम कैनामे महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करल उहाँ बटैलै । अइना दिनमेफे संस्थासे दिगो शान्ति, विकास ओ सामाजिक रूपान्तरणके क्षेत्रमे आउर प्रभावकारी कार्य करटी जैना उहाँ विश्वास व्यक्त करलै । अपन ओरसे सेक्ना सहयोग कैना बाचा सहित शुभकामना व्यक्त करलै ।
संस्थाके पश्चिम संयोजक बल्लु चौधरी पश्चिम क्षेत्रमे ३० ठो जल, जंगल ओ जमिनमे विवाद दिगो रुपमे समाधन करल बटैलै । उहाँ कहलै, संस्थासे दिगो रुपमे रुपान्तरण करल विवादमे १२ ठो जंगल, १२ ठो जमिन ओ ६ ठो जलके रहल बा । विवाद दिगो रुपमे रुपान्तरण हुइलपाछे विकास निर्माणके कामफे तिब्रता पाइल उहाँ बटैलै ।
संस्थासे बर्दियाके बढैयाताल गाउँपालिका–३ स्थित सटपटिया गाउँमे रहल बवै सिचाई आउोजनाके विवाद रुपान्तरण करुवाइलपाछे ४५ करोड बजेट परल आयोजनाके अध्यक्ष गोविन्द प्रसाद थारु बटाइलल उहाँ कहलै ।
ओस्टेक करके कैलालीके भजनी नगरपालिका –७ सुरकैया तालसे पुरैना कुलोसम ११ मिटर चौडा ४६१ मिटर लम्बाई डगर निर्माणके काम सम्पन्न हुइल बा । विवाद दिगो रुपमे रुपान्तरण हुके सडक निर्माण हुइलपाछे ढेर जाने लाभाँिन्वत हुइल बटै । पश्चिम क्षेत्रमे लुम्बिनी प्रदेशके बाँके ओ बर्दिया जिल्ला, सुदूरपश्चिमके कैलाली, कञ्चनपुर, डडेल्धुरा, अछाम, डोटी ओ बैतडीमे कार्यक्षेत्र बनाके काम करटी रहल संयोजक बटैलै । कैलाली जिल्लामे टमान स्थानीय तहमे जल, जंगल ओ जमिनके विवादहे दिगो रुपमे समाधान करेक लाग कार्य करटी रहल जिल्ला संयोजक गंगा दुलाल ओ जिल्ला सहजकर्ता बन्धु विवस चौधरी बटैलै ।
“दिगो शान्तिका लागि उन्नत सम्वन्ध“ कना मुल नाराके साथे प्राकृतिक श्रोत द्वन्द्व रुपान्तरण केन्द्र, नेपालके स्थापना वि.सं. २०७० साल जेठ २७ गते हुइल हो । यी वि.सं. २०७० असार १३ गते जिल्ला प्रशासन कार्यालय भक्तपुरमे दर्ता हुके (दर्ता नं. १२२१) औपचारिक कानुनी मान्यता प्राप्त करले बा । यी संस्था समाज कल्याण परिषद्मा वि.सं. २०७० असार १६ मे (आबद्धता नं ३७४३०) आबद्ध हुइल हो । दिगो शान्तिके लाग उन्नत सम्बन्ध कना मूल नाराके साथ शान्तिपूर्ण ओ सु–संस्कृत समाज निर्माणमे संस्था क्रियाशिल रहल बा । शान्ति निर्माणके क्षेत्रमे कार्यरत यी संस्थाहे मेलमिलाप परिषदसे मेलमिलाप सम्बन्धी ऐन २०६८ के दफा २७ (ग) बमोजिम मेलमिलाप सम्बन्धी तालिम सञ्चालन कैना ओ उहे ऐनके दफा २३ बमोजिम मेलमिलाप सम्बन्धी कार्य करेक लाग स्वीकृति प्राप्त हुइल बा ।
स्थापना कालसे जल, जमिन तथा जंगल सम्बन्धी बृहत्तर खालके बहुसरोकारवाला विवादमे माकुरा पद्दतिसे सहजीकरण करटी आइल यी संस्थासे २०७२ सालसे मेलमिलाप अभियानके माध्यमसे अन्तर व्यक्तिगत विवादमे समेत सहजीकरण करके शान्ति स्थापनामे थप टेवा पुगैटी आइल बा ।
संसारमे मनैनके शरीरके टुटल अङ्ग सिलाके जीवन बचैना अस्पताल टमान बनल बटै । फाटल मन सिलाके जीवन बचैना अस्पतालमे भर कोइफे ध्यान पुगाइसेकल नैहो । स्रोत साधन उप्परके पहुँच ओ नियन्त्रण तथा आपसी चाहना फरक हुके मन फाटल कारण घरपरिवारसे सिगो समाज विभाजित बा । फाटल मनके दरार बह्रटी जाके ढेरके जीवन समेत समाप्त हुइटी रहल घटना प्रशस्त बटै । एक ठो विषयहे लेके हुइना छोट विवाद बह्रटी जाके अन्ततः हिंसात्मक रुप लेनाके साथे भारी धनजनके क्षति हुइल बा । गाउँ घरमे हुइना यैसिन विवाद समाधान करेक लाग परम्परासे टमान तरिका प्रयोगमे आइल बटै । विवाद समाधानके लाग करल उ प्रयाससे बाहेरर डेखल विषयमे समाधान खोजलेसेफे भिटरी रुपमे टुटल मन ओ सम्वन्ध जोरे नैसेक्के पुनः झगडा हुइना ओ मनके घाउ झन गहिर हुइटी जैना करल पाइल बा ।
