बालविवाह ढेर बा, मने मुद्दा दर्ता न्यून बा
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २८ जेठ । बालविवाह अन्त्य तथा लैङिक समानता प्रवद्र्धनके लाग प्रदेश स्तरीय नीतिगत सवांद कार्यक्रम विफेक रोज धनगढीमे सम्पन्न हुइल बा ।
गर्ल फर्म फाउण्डके सहयोगमे दलित महिला अधिकार मञ्च कैलालीसे किशोरी सशक्तीकरण परियोजना अन्तर्गत बालविवाह अन्त्य तथा लैङिक समानता प्रवद्र्धनके लाग प्रदेश स्तरीय नीतिगत सवांद कार्यक्रम कैगिल हो ।
मञ्चके अध्यक्ष सावित्रा घिमिरेके अध्यक्षतामे हुइल कार्यक्रममे सुदूरपश्चिम प्रदेशके सामाजिक विकास समितिके सभापति धर्मराज पाठकके प्रमुख आतिथ्यतामे हुइल हो ।
कार्यक्रममे सम्बोधन करटी उहाँ पहिलेक पुर्खाहुक्रे बालविवाह कैना चलन रहल मने आब बालबालिकाहुक्रे अपनही बालविवाह करल डेखल बा । उहाँ कहलै, सामाजिक संजालके प्रयोग बह्रलसंग बाटचित हुइटी जैना, एक दुसरसे लग्गे हुइटी जैना पाछे बाट मिललपाछे भागके जैना करल डेखजाइठ ।
बार एशोसियशन कैलालीके अध्यक्ष नाथुराम महतोंफे बालविवाह अन्त्य हुई पर्ना ठाउँमे झन बह्रल बटैलै । बालविवाह करलपाछे हानी हुइठ कहिके हरेक बालबालिकाके मस्तिकमे छाप बैठाई नैसेकटसम बालविवाहके अन्त्य नैहइना उहाँ बटैैलै । उहाँ बालविवाहहे जबरजस्ती करणी मुद्दामे परिणत हुइल मुद्दा ढेर आइलफे बटैलै ।
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीके प्रदेश महिला विभाग प्रमुख जसु भट्ट राजनीतिक दलके घोषणापत्र कार्यान्यवन हुई पर्ना बटैली । उहाँ कहली, हरेक राजनीतिक दलके घोषणापत्रमे बालबालिकाके हक अधिकार सुनिश्चितके बाट समेटल रहठ । उ कार्यान्वयन हुइलेसे बालबालिका न्यूनिकरण करेसेक्जाई । सुदूरपश्चिम प्रदेशमे रहल रुढीबादी परम्परासेफे बालविवाह बह्राइल उहाँ बटैलै ।
कार्यक्रममे दलित महिला अधिकार मञ्चके किशोरी सशक्तीकरण परियोजनाके परियोजना संयोजक विमला खडायत परियोजनासे बालविवाह न्यूनिकरणकरणके लाग कैटी आइल कार्यक्रमबारे जानकारी डेहल रहिट । उहाँ कहली, मञ्चसे बालविवाह अन्त्यके लाग धार्मिक अगुवा, नागरिक समाज, भल्मन्सा, सरोकारवाला निकाय, विद्यालय, किशोरी संजालमे छलफल तथा अन्तरक्रिया कैजैटी बा । ओटरा कैलेसेफे बालविवाहके अवस्था बह्रल बा, मुद्दा दर्ताफे न्यून डेखल बा ।

जिल्ला प्रहरी कार्यालय कैलालीके महिला तथा बालबालिका शाखाके दिपा चौधरीफे बालविवाह बह्रल मने मुद्दा न्यून हुइल बटैली । उहाँ कहली, बालविवाह घरघरमे बा, मने मुद्दा दर्ता नैहुइठ । यिहीहे न्यूनिकरण करेक लाग सामाजिक अगुवाहुक्रे चासो लेहेपर्ना उहाँ बटैली । ओस्टेक करके प्रदेश स्वास्थ्य निर्देशनालयके सुर्य विष्टफे बालविवाह बह्रल डेखल बटैलै ।
प्रदेश किशोरी संजालके अध्यक्ष रोशनी कोली अपनेहुक्रे बालविवाह अन्त्यके लाग आवाज उठाईबेर धम्की खेपेपर्ना अवस्था रहल बटैली । कार्यक्रममे इन्सेकके मैनामोती, गैसस महासंघके गोकुल खडकालगायत अपन बाट राखल रहिट ।
राष्ट्रिय जनगणना–२०७८ से ढेर जैसिन व्यक्ति (३४.४ प्रतिशत) के पहिल भोज १८ से २० वर्षके उमेरमे हुइना करल डेखल बा कलेसे १५ से १७ वर्षके उमेरमे पहिल भोज हुइना २२.३ प्रतिशत, १०–१४ वर्ष उमेरमे पहिल भोज हुइना ७ प्रतिशत ओ १० वर्ष टरेक उमेरमे पहिल भोज हुइल ०.३ प्रतिशत रहल डेखल बा ।

पछिल्का १० वर्षमे बालविवाह नैकैना दरमे न्यून प्रगति डेखलेफे भर्खरके जनगणनासे यम्ने सुधारके पर्याप्त काम करेपर्ना आइल बा ।
नेपाल बहुक्षेत्रीय क्लस्टर सर्वेक्षण, २०७९ अनुसार २० से २४ वर्ष उमेर समूहके ३४.९ प्रतिशत महिला ओ ७ प्रतिशत पुरुषके विवाह १८ वर्षमे हुइल डेखल बा । १५ से १९ वर्ष उमेर समूहके किशोरीमध्ये अविवाहित ७८.४ प्रतिशत केल्ह उल्लेख हुइलठेनसे २१.६ प्रतिशतके भोज हुइल ओ यी मध्ये २.८ प्रतिशतके १५ वर्षके उमेरमे भोज हुइल डेखल बा ।
नेपाल जनसांख्यिक तथा स्वास्थ्य सर्वेक्षण, २०२२ से नेपालमे २० से २४ वर्ष उमेर समूहके ३९.५ प्रतिशत महिलाके भोज १८ वर्ष पुग्न आघे हुइल उल्लेख करल बा ।
दुसर ओर उहे उमेर समूहके १०.३ प्रतिशत केल्ह पुरुषके भोज १८ वर्षसे कम उमेरमे हुइना करल बा । ओस्टेक करके स्वास्थ्य सेवा विभागतके वार्षिक प्रतिवेद २०७९।८० अनुसार १५ से १९ वर्षके कुल किशोरीमध्ये १७ प्रतिशत डाई बनसेकल वा गर्भवती हुइल पाइल बा कलेसे आ.व. २०७८÷७९ मे ६ हजार ६ सय ४५ जाने किशोरीसे सुरक्षित गर्भपत करल तथा ८४ हजार ७ सय ७३ जाने किशोरीसे सुरक्षित मातृत्व सेवा लेहल डेख्नासेफे वालविवाहके व्यापकता रहल पुष्टि करठ ।
नेपालमे बालविवाहके दर प्रदेश, बसोवास क्षेत्र, आर्थिक–सामाजिक अवस्था, जातजाति, धर्म, समुदाय तथा शैक्षिक अवस्थाके विविधता ओ अन्य भिन्नताके आधारमे फरकफरक रहल बा ।
शहरी क्षेत्रके तुलनामे ग्रामीण क्षेत्रके महिलाके सामान्यतया कम उमेरमे भोज हुइना करल पाइल बा । राष्ट्रसंघीय जनसंख्या कोषके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रमे बसोबास कैना मध्ये ४३ प्रतिशत ओ शहरमे बैठनामध्ये २७ प्रतिशत महिलाके १८ वर्ष नैपुग्टी भोजहुइना करठ । कम आयस्रोत हुइल परिवारके बालिका बालविवाहके ढेर जोखिममे रहल पाइल बा ।
ओस्टे, आर्थिक अवस्था सबल हुइलठेनसे कमजोर हुइल महिलाके सालाखाला दुई वर्ष कम उमेरमे भोज हुइल डेखल बा । देशके कुछ क्षेत्रमे बालविवाहके दर उच्च रहल पाइल बा । मधेशी समुदायके साथे सीमान्तकृत समूह जस्टे दलित, जनजाति ओ मुस्लिम समुदायमे अन्य समुदायके तुलनामे यी दर उच्च रहल बुझल बा ।
सुदूरपश्चिम प्रदेशसे बालविवाहहे न्यूनीकरण कैना “सानै छु म, बढ्न देऊ, बालविवाह हैन, पढ्न देऊ,” स्वस्थ बालबालिका, शसक्त महिला र सम्मानित जेष्ठ नागरिक’ अभियान सञ्चालन करटी रहल बा ।
सुदूरपश्चिम प्रदेशसे जारी करल लैंगिक समानता तथा समावेशीकरण नीतिके रणनीति ११ निरोधात्मक, उपचारात्मक तथा नियमनकारी उपायसे सामाजिक मूल्य मान्यतामे परिवर्तन करटी लिङ, उमेर, वर्ग तथा जातीय आधारमे हुइना सक्कु खाले हिंसा, भेदभाव, परम्परागत हानीकारक सामाजिक अभ्यास ओ बहिष्करणके अन्त्यसे सम्बन्धित बा ।
उ रणनीतिके नीति तथा कार्यनीतिके बुँदा नं. १७ से बाल सरक्षण ओ बालविवाह न्यूनीकरणके लाग प्रदेश, जिल्ला तथा स्थानीय तहमे सञ्जाल निर्माण कैना व्यवस्था उल्लेख करले बा बा । ओस्टेक करके प्रदेश बालवालिका सम्बन्धी ऐन २०७७ के दफा ४१ से बालबालिकाके विवाह तय कैना वा बालबालिकाके विवाह कैना वा करैना कार्यहे बालबालिका विरुद्ध हुइना हिंसाके रुपमे परिभाषित करल बा ।

दफा २० से बालबालिका विरुद्धके हिंसा वा ओसिन जोखिममे रहल बालबालिका विशेष संरक्षणके आवश्यकता हुइल बालबालिकाके वर्गमे राखल बा । यी मेरिक बालबालिकाके आवश्यकता अनुसार उद्धार, अस्थायी संरक्षण, स्वास्थ्य उपचार, मनोसामाजिक सहयोग, पारिवारिक पुनरमिलन, पुनस्थापना, वैकल्पिक हेरचाह, परिवार सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, सामाजिकिकरण लगायत अन्य सेवा तथा सहयोग तोकल बमोजिम हुइनाफे उहे ऐन अनुसारमे व्यवस्था करल बा ।
कानुनसे बालविवाहहे दण्डनीय अपराध मन्लेसेफे राष्ट्रिय जनगणना २०७८ अनुसार सक्कु प्रदेशमे यकर अभ्यास अभिन कायम रहल डेखजाइठ ।
सुदूरपश्चिम प्रदेशमेफे बालविवाहके दर राष्ट्रिय औसतसँग मिल्नाजुल्ना, करिब १.५ प्रतिशत रहल बा । यीमध्ये करिब ०.७ प्रतिशत बालक ओ २.४ प्रतिशत बालिकासे कानुनी उमेर नैपुगके भोज करल पाइल बा ।
