थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ वि.सं ३१ जेष्ठ २०८३, आईतवार ]
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एनआरसिटिसि नेपाल फाटल मन सिल्ना अस्पताल

पहुरा | ३१ जेष्ठ २०८३, आईतवार
एनआरसिटिसि नेपाल फाटल मन सिल्ना अस्पताल

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ३१ जेठ ।
जब मन फट्न क्रम बह्रटी जाइठ, अनि मनैहुक्रे मुना ओ औरे जनहनहे मुवैना तहसम पुगठै । यैसिन विवाद व्यक्तिगत तहमे केल्ह नाही समुदायस्तरमेफे हुइना करल बा ।

संसारमे मनैनके शरीरके टुटल अङग सिलाके जीवन बचैना अस्पताल टमान बनल बटै । तर फाटल मन सिलाके जीवन बचैना अस्पतालमे भर कोइफे ध्यान पुगाइसेकल नैहो, प्राकृतिक स्रोत द्वन्द रुपान्तरण केन्द्र नेपालके कार्यकारी निर्देशक चुपबहादुर थापा कहठै, ‘स्रोत साधन उप्परके पहुँच ओ नियन्त्रण तथा आपसी चाहना फरक हुके मन फाटल कारण घरपरिवारसे सिगो समाज विभाजित बा । फाटल मनके दरार बह्रटी जाके ढेरके जीवन समेत समाप्त हुइटी रहल घटना प्रशस्त बटै । एक ठो विषयहे लेके हुइना छोट विवाद बह्रटी जाके अन्ततः हिंसात्मक रुप लेनाके साथे भारी धनजनके क्षति हुइल बा ।’

कार्यकारी निर्देशक थापा कठै, ‘गाउँ घरमे हुइना यैसिन विवाद समाधान करेक लाग परम्परासे टमान तरिका प्रयोगमे आइल बा । विवाद समाधानके लाग करल उ प्रयाससे बाहेर डेखल विषयमे समाधान खोजलेसेफे भिटरी रुपमे टुटल मन ओ सम्वन्ध जोरे नैसेक्के फेरसे झगडा हुइना ओ मनके घाउ झन गहिर हुइटी जैना करल पाइल बा ।’

मनैनके बिच फाटल मनहे आपसी संवादके सुईले सिल्के विश्वासके धागासे टाँका लगाईपर्ना मान्यताके साथ यी संस्था आघे बह्रल निर्देशक बटैलै ।

स्थानीय सरकारसंगके समन्वयमे गठन करल ५३८ ठो मेलमिलाप केन्द्रमे दर्ता हुइल १३ हजार ३९९ विवाद मध्ये १२ हजार ७५७ विवाद मेलमिलापके माध्यसे समाधान हुइल बा । मेलमिलाप केन्द्र फाटल मन सिलैना अस्पतालके रुपमे स्थापित हुइल बा ।

जहाँ फाटल मन सिलैना डाक्टरके रुपमे कार्यरत मेलमिलापकर्ताहुक्रे आपसी संवादके सुईले फाटल मनहे सिल्के विश्वासके धागाले टाँका लगाके मायाप्रेमके औषधी कैना करल बटै । उ विवाद रुपान्तरण हुइलपाछे लाखौ फाटल मनल मिल्के दिगो रुपमे समाधन हुइल बा । जिहीसे शान्ति ओ विकास प्रक्रियामे समेट सहयोग पुगल संस्थाके निर्देशक बटैलै ।

संस्थाके पश्चिम क्षेत्र संयोजक बल्लु चौधरी पश्चिम क्षेत्रमे ३० ठो जल, जंगल ओ जमिनमे विवाद दिगो रुपमे समाधन करल बटैठै । उहाँ कहलै, संस्थासे दिगो रुपमे रुपान्तरण करल विवादमे १२ ठो जंगल, १२ ठो जमिन ओ ६ ठो जलके रहल बा । विवाद दिगो रुपमे रुपान्तरण हुइलपाछे विकास निर्माणके कामफे तिब्रता पाइल उहाँ बटैलै ।

संस्थासे बर्दियाके बढैयाताल गाउँपालिका–३ स्थित सटपटिया गाउँमे रहल बवै सिचाई आउोजनाके विवाद रुपान्तरण करुवाइलपाछे ४५ करोड बजेट परल आयोजनाके अध्यक्ष गोविन्द प्रसाद थारु बटाइलल उहाँ कहलै ।

ओस्टेक करके कैलालीके भजनी नगरपालिका –७ सुरकैया तालसे पुरैना कुलोसम ११ मिटर चौडा ४६१ मिटर लम्बाई डगर निर्माणके काम सम्पन्न हुइल बा । विवाद दिगो रुपमे रुपान्तरण हुके सडक निर्माण हुइलपाछे ढेर जाने लाभान्वित हुइल बटै ।

पश्चिम क्षेत्रमे लुम्बिनी प्रदेशके बाँके ओ बर्दिया जिल्ला, सुदूरपश्चिमके कैलाली, कञ्चनपुर, डडेल्धुरा, अछाम, डोटी ओ बैतडीमे कार्यक्षेत्र बनाके काम करटी रहल संयोजक बटैलै । कैलाली जिल्लामे टमान स्थानीय तहमे जल, जंगल ओ जमिनके विवादहे दिगो रुपमे समाधान करेक लाग कार्य करटी रहल जिल्ला स्रोत व्यक्ति गंगा दुलाल ओ जिल्ला सहजकर्ता बन्धु विवस चौधरी बटैठै ।

“दिगो शान्तिका लागि उन्नत सम्वन्ध“ कना मुल नाराके साथे प्राकृतिक श्रोत द्वन्द्व रुपान्तरण केन्द्र, नेपालके स्थापना वि.सं. २०७० साल जेठ २७ गते हुइल हो । यी वि.सं. २०७० असार १३ गते जिल्ला प्रशासन कार्यालय भक्तपुरमे दर्ता हुके (दर्ता नं. १२२१) औपचारिक कानुनी मान्यता प्राप्त करले बा । यी संस्था समाज कल्याण परिषदमे वि.सं. २०७० असार १६ मे (आबद्धता नं ३७४३०) आबद्ध हुइल हो ।

दिगो शान्तिके लाग उन्नत सम्बन्ध कना मूल नाराके साथ शान्तिपूर्ण ओ सु–संस्कृत समाज निर्माणमे संस्था क्रियाशिल रहल बा । शान्ति निर्माणके क्षेत्रमे कार्यरत यी संस्थाहे मेलमिलाप परिषदसे मेलमिलाप सम्बन्धी ऐन २०६८ के दफा २७ (ग) बमोजिम मेलमिलाप सम्बन्धी तालिम सञ्चालन कैना ओ उहे ऐनके दफा २३ बमोजिम मेलमिलाप सम्बन्धी कार्य करेक लाग स्वीकृति प्राप्त हुइल बा ।

स्थापना कालसे जल, जमिन तथा जंगल सम्बन्धी बृहत्तर खालके बहुसरोकारवाला विवादमे माकुरा पद्दतिसे सहजीकरण करटी आइल यी संस्थासे २०७२ सालसे मेलमिलाप अभियानके माध्यमसे अन्तर व्यक्तिगत विवादमे समेत सहजीकरण करके शान्ति स्थापनामे थप टेवा पुगैटी आइल बा ।

समुदाय स्तरमे डेखल बहुसरोकारवाला द्वन्द्वहे माकुरा समूह मार्फत सहजीकरण करके द्वन्द्व समाधानके नयाँ संस्कृति स्थापित कैना यी अभियानसे खोजल बा । यी प्रक्रियामे निष्पक्ष, पारदर्शी, समावेशी ओ सहभागितामूलक ढंगसे आपसी संवादके माध्यमसे सक्कु जित जितके चित्रः बहुसरोकारवाला द्वन्द्व रुपान्तरणके अवस्था अनुभूत हुइना करके द्वन्द्वके दिगो समाधान खोजजाइठ । बहुसरोकारवाला द्वन्द्व रूपान्तरणमे सहजीकरणके लाग सात चरणके १८ महिने स्थलगत अभ्यास सहितके तालिम प्राप्त दक्ष जनशक्तिहुक्रे संस्थामे आवद्ध रहल बटै ।

यी अभियानसे वि.सं. २०८२ फागुनसम ४७४ ठो बृहत्तर खालके बहुसरोकारवाला द्वन्द्र माकुरा समुहके प्रयाससे सम्बन्ध सुधार सहित रूपान्तरण हुइल बटै । द्वन्द्वके कारण रोकल विकास निर्माणके कार्य पुनः सुचारु हुइल बटै । मनैनबीच गुमल हाँसी ओ खुसी पुनः स्थापित हुइल बा । माकुरा जाल अवधारणामे आधारित यी प्रक्रिया अनुसार काम करटी रहेबेर हालसम ४५०० से ढेर माकुरा परिचालित हुके शान्ति निर्माण अभियानमे क्रियाशील बटै ।

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