सिकलसेल एनिमिया रोकथामबारे टेलिभिजन बहस
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ७ असार । सिकलसेल एनिमिया रोकथाम, उपचार तथा डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता सम्बन्धी जनचेतना अभिवृद्धि कैना उद्देश्यसे धनगढीमे टेलिभिजन बहस कार्यक्रम हुइल बा ।
प्रादेशिक स्वास्थ्य प्रवद्र्धन केन्द्र, धनगढी कैलालीके सहकार्य तथा न्युज नेपाल टेलिभिजन धनगढीके आयोजनामे सम्पन्न कार्यक्रममे सञ्चारकर्मी मनमोहन स्वाँर सहजीकरण करल रहिट ।
बहसमे सेती प्रादेशिक अस्पतालके वरिष्ठ फिजिसियन डा. शेरबहादुर कमर, टिकापुर नगरपालिकाके जनस्वास्थ्य निरीक्षक केवलसिंह भुल, सामाजिक विकास मन्त्रालयके जनस्वास्थ्य प्रशासक रमेश मलासी तथा सिकलसेल एसोसिएसन अफ नेपालके अध्यक्ष पिताम्बर चौधरी प्यानलिस्टके रूपमे सहभागी रहिट ।
कार्यक्रममे बोल्टी विशेषज्ञसे सिकलसेल एनिमिया वंशाणुगत (जेनेटिक) रोग हुइल ओरसे यी एक व्यक्तिसे दुसर व्यक्तिमे सर्ना रोग नैरहल स्पष्ट परलै । डाईबाबा दुनु सिकलसेलके जीन रहल सन्तानमे यी रोग डेख्ना सम्भावना ढेर रना बटाइल बा ।
चिकित्सकके अनुसार सिकलसेल रोगमे लाल रक्तकोष (रेड ब्लड सेल) सामान्य गोलाकार हुइनाके सट्टा हंसिया आकारके बन्न करठ । यैसिन रक्तकोषसे रक्तनलीमे सहज रूपमे प्रवाह करे नैसेक्के शरीरके टमान अंगमे अक्सिजनके कमी हुके अत्यधिक दुखाइ, रक्तअल्पता, थकान, जुरी, संक्रमण तथा अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्या विल्गैना करठ ।
कार्यक्रममे कैलाली ओ कञ्चनपुरके थारु समुदायमे केल्ह नैहुके पछिल्का वर्षमे अन्य समुदायमेफे सिकलसेल रोग तथा यकर वाहक (ट्रेट) अवस्था डेखाई लागल जानकारी डेगिल । विशेष करके थारु समुदायमे यकर जोखिम ढेर हुइलेसेफे टमान जातजाति ओ समुदायमे समेत परीक्षणके क्रममे रोग भेटना क्रम बह्रटी रहल स्वास्थ्यकर्मीहुक्रे बटैलै ।
बहसके क्रममे सरकारसे सिकलसेल रोगीके उपचारके लाग वार्षिक एक लाख रुप्यासमके सहुलियत उपलब्ध करैना व्यवस्था करल जानकारी डेगिल बा ।
हाल कैलालीके सेती प्रादेशिक अस्पताल, टिकापुर अस्पताल तथा कञ्चनपुरके महाकाली प्रादेशिक अस्पताल मार्फत उ सेवा उपलब्ध करैटी आइल जनाइल बा । मने कुछ बिरामीसे सेवा प्राप्तीमे कठिनाइ हुइना करल गुनासो करल रहे ।
विशेषज्ञहुक्रे सिकलसेल रोग पूर्ण रूपमे निक पर्ना उपचार हाल सीमित रहल बटैलै । बोन म्यारो ट्रान्सप्लान्टमार्फत कुछ अवस्थामे रोग नियन्त्रण वा निर्मूल करे सेक्ना हुइलेसेफे यी उपचार महँगा ओ सक्कुहुनके लाग सहज पहुँचमे नैरहल उल्लेख कैगिल । टबमारे समयमे परीक्षण, नियमित उपचार, परामर्श तथा जनचेतना रोग नियन्त्रणके मुख्य उपाय हुइल ओइनके कहाई रहे ।
कार्यक्रममे भोज आघे सिकलसेल परीक्षण करैना अभ्यासहे प्रोत्साहन करेपर्नामे जोड डेगिल बा । सिकलसेलके जीन रहल व्यक्तिबीच विवाह हुके सन्तानमे रोग डेख्ना सम्भावना ढेर हुइना ओरसे विवाहपूर्व परीक्षणसे जोखिम न्यूनीकरणमे सहयोग पुग्न विज्ञहुक्रे बटैलै । बहसके सहभागी समुदायके सदस्यसे उपचार, औषधि, आर्थिक सहायता तथा स्वास्थ्य सेवाके पहुँच सम्बन्धी अपन जिज्ञासा ओ समस्या सरोकारवाला निकायसमक्ष राखल रहिट । सहभागीहुक्रे प्रदेशमे प्रभावकारी उपचार सेवा विस्तार कैना ओ बिरामीमैत्री कार्यक्रम सञ्चालन कैना सरकारसँग माग समेत करले बटै ।
स्वास्थ्यकर्मीहुक्रे सिकलसेल रोगबारे जनचेतना फैलैना, नियमित स्क्रिनिङ कार्यक्रम सञ्चालन कैना, डिजिटल माध्यमसे स्वास्थ्य शिक्षा प्रवाह कैना तथा प्रभावित समुदायहे सहज उपचार सेवा उपलब्ध करैना सरकारके टमान निकायसे काम करटी रहल जानकारी डेले बटै । ओइने रोगके पहिचान, रोकथाम ओ व्यवस्थापनके लाग समुदाय, स्वास्थ्य संस्था ओ सरकारबीचके सहकार्य अझ प्रभावकारी हुईपर्नामे जोड डेले बटै ।
