कमैया प्रथा इतिहास, पुनस्र्थापनाके प्रयास ओ वर्तमान अवस्था
नेपालके लुम्बिनी प्रदेशके दाङ्ग, बाँके ओ बर्दिया जिल्ला सुदूरपश्चिम प्रदेशके कैलाली ओ कञ्चनपुरमे कमैया प्रथा प्रचलनमे रहे । अब्बेफे प्रथाके अवशेष जीवित बा ।
कमैया कना शब्द जमिन तथा खेतीपातीसंग सम्बन्धित बा । उ बेला कमैया कहलेसे जमिनमे कडा परिश्रम कैना व्यक्तिके रुपमे बुझजाइठ । जमिनदारके जग्गाके एक कोनुवामे बनाइल झुपडी (बुक्रा)मे बैठटी जमिनदारके खेतमे काम करटी आइल गरिब, निमुखा, सोझा ओ इमानदार थारु जातिके मनै नम्मा समयसे कमैया कहटी अइलै । सोझा, इमानदार ओ चेतनाके कमीसे चरम शोषणके कारण थारु जातिके मनै टाठावाठाहुकनके अतिक्रमणमे परके जग्गाविहिन अवस्थामे अपन परिवारके लालनपालन तथा गुजाराक्े लाग उहे टाठावाठाहुकनके ढेर जग्गा रहल जमिनदारके जग्गा कमाडेना सपरिवार कमैयाके रुपमे काम करे लग्लै ।
जमिनदारके घरमे काम करलवापत कमैयाहुकनहे वर्षभरके लागि न्युनतम ज्याला तोकल रहे । उहे ज्यालाके रुपमे धान, गोहु मसुरी डेना प्रचलन रहे । ओसिक डेहल न्युनतम ज्यालासे कमैयाहकनके आधारभुत आवश्यकता पुर्ती कैना मुस्किल हुए । जेकर कारण आृेइने जमिनदारसे घर खर्च, कपडा, चाडवाड, पाहुनाके स्वागत सत्कार आदीके लाग थप रकम सम्पति लेना बाध्य हुइट । थप सम्पति डेहल वापत जमिनदारसे ऋणके ब्याज, स्याज करके वर्ष भरके ऋणके दोब्बर तेब्बर बनैना करिट । कमैया सपरिवार वर्षभर काम करलेसेफ ऋण घट्नाके सट्टा बह्रटी जाए । प्रत्येक वर्ष माघ २ गतेसे माघ मसान्तसम कमैयाहुकनके खोज्नीबोज्नी अर्थात वर्षभरके लेनदेन हिसाब तथा मालिक छोरेबेर कैना प्रकृया करजाए ।
कमैयासे साहुहे तिरे पर्ना रकम वा ऋण रकमहे सौकी कहिजाए । कमैयाहुक्रे मालिकके घरसे नयाँ मालिकके घरमे कमैया बैठे जाके नयाँ मालिकसे पुरान मालिकहे टिरे पर्र्ना सौकी तिरके लैजाइट ओ पुनः सौकीमे व्याजस्याज जोरटी दोब्बर तेब्बर बनाजाए । कमैयाहुक्रे जमिनदारके घरमे जटरा परिश्रम करलेसेफे ओइनके लेहल ऋण घट्नाके सट्टा वर्षैपिच्छे दोब्बर तेब्बर बनाजाए । यैसिक कमैयाहुक्रे आपन जिवनभर सौकी तिरे नैसेकिट । जेकर कारण कमैयाके गोसिनीया, छावा छाईहे उमेर अनुसार काम ओ पद निर्धारण करजाए । घरमुलीहे कमैया, गोसिनीयाहे बुक्रही, छाईहे कम्लहरी, छावाहे भैसवार, गैवार छेग्रहुवाके रुपमे वर्ष भरर बिना ज्याला काम करे परे । यैसिक सपरिवार जमिनदारकहाँ कमैया बैठना अमानविय कुप्रथा बैठै गैल । जमिनदारहसक्रे अपन ऋण चुक्ता कैना कमैया तथा घर÷परिवारके कौनोफे सदस्यहे दुसर जमिनदारकहाँ बेचविखन कैना कार्य समेत थालनी हुइल । सौकीवाला कमैयासे आजिवन तथा पुस्तौपुस्ता बधुँवा मजदुरके रुपमे काम करेपर्ना बाध्यात्मक स्थिति सिर्जना हुइल ।
कमैया मुक्तिके आन्दोलनके प्रयास ओ मुक्तीके घोषणा
राणा शासनकालमे कमैया मुक्तीके लाग टमान प्रयास ओ आन्दोलन हुइल पाजाइठ । सर्वप्रथम वि.सं. १०९९ ओर बर्दिया जिल्लामे राधाकुष्ण थारुसे भुमिहिन थारुहुकनके गोप्य भेला करके जमिन जोटुइयाके लाग कहिके आन्दोलनके सुरु कैना प्रयास करल रहे कहिके टमान प्रकाशनमे छापल पाजाइठ । यी कमैया प्रथा विरुद्ध सुरु हुइल पहिल आन्दोलन रहे । वि.सं. २००४ सालमे राधाकृष्ण थारुसे काठमाडौं पुगके प्रधानमन्त्री मोहनशमशेर राणा लगायतके टमान व्यक्तिहुकनहे भेटके सहयोग मग्लेसेफे बासुदेव प्याकुरेलके अध्यक्षतामे आयोग बनल रहे । उ आयोगसे बर्दिया जिल्लाके भुमिहिन किसानके लाग २५ हजार बिघा जमिन पञ्जिकरण हुइल रहे ।
वि.सं. २००७ सालमे कृषकहुक्रे उब्जनीके ३ भागके १ भाग पाई परठ कना माग राखदपाछे ओइने जमिनदारसे निर्मम तरिकासे पिटुवा पाइल रहिट । हलिया ओ कमैया प्रथा अन्त्यके लाग लरटी आइल भीमदत्त पन्तहे विंस.ं २०११ सालमे झुण्ड्याके हत्या करल रहे । यी मेरिक टमान आन्दोलनसे नेपालमे प्रजातन्त्र प्राप्ती पश्चात राष्ट्रिय राजनितिमे समेत भारी प्रभाव पारल । आन्दोलन उठाइल विषयहे लेके वि.सं. २०१५ सालमे हुइल प्रथम आमनिर्वाचनमे घर पोटुइयाके जग्गा जोटुइया कना नारा डेके नेपाली कंग्रेस विजयी हुइल रहे ।
वि.सं. २०२१ सालमे भुमिसुधार ऐन जारी करल हुइलेसेफे यी ऐनसे कमैया तथा भुमिहिनके पक्षसेफे जमिनदारके हितमे रहे । भुमिसुधार ऐन अपनहुकनके पक्षमे नैआइल कहटी भुमिहिन तथा थारु कमैयासे आन्दोलन करलै । ओइनके माग सम्बोधन हुइनाके सट्टा जमिनदारहुकनके दवावमे सरकारसे थारु तथा कमैया उप्पर दमन करल । मने टमान समयमे कमैया मुक्तिके आन्दोलन चल्टी गैल । वि.सं २०४५ सालमे सिल्टा थारुके नेतृत्वमे कमैया मुक्तिके आन्दोलन चरकलेसेफेृ तत्कालिन निरङ्कुश पञ्चायती प्रशासन ओ जमिनदारसे यी आन्दोलन डबैलै ।
वि.सं. २०५० सालमे बाँधा श्रम प्रणाली उन्मुलन ऐन २०५०, बनाके सांसदहुकनसंग छलफल समेत हुइल ओ विद्यमान बाँधा श्रम प्रणाली उन्मुलन कैना प्रयोजनके लाग नगरपालिकाहे कानुन बनैना निर्देशन सहितके परमादेश जारी करके पाउँ कहिके सर्वोच्च अदालनमे रिट दायर हुइल रहे । वि.सं.२०५२ सालमे कमैया सक्ति मञ्च गठन करल रहे कलेसे २०५३ सालमे कमैया सरोकार समुह गठन करके कमैयाके क्षेत्रमे टमान अभियान सञ्चालन करल रहे ।
यिहे क्रममे एन्टी स्लेभरी इन्टरनेशनल इन्सेकके संयुक्त पहलमे नेपालमे कार्यरत कृषि श्रमिकके अवस्थाबारे दुसर एक अध्ययन करके फोर्स टु प्वलो नामक पुस्तक सन् १९१७ मे प्रकाशन करल रहे । यैसिक स्वयम् कमैया, गैरसरकारी संघसंस्था इन्सेक, जिफन्ट, ब्याकवार्ड सोसाइटी बेस, पत्रकार ओ नागरिक समाजहुकनके प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुपमे समाजमे जर गारके बैठल कमैया प्रथाके अन्त्य कैना कमैया आन्दोलनमे सहयोग करल रहे ।
कमैया आन्दोलन सशक्त हुइल अवस्थामे राजनितिक दलफे कमैया आन्दोलनहे सहयोग कैना बाध्य हुइलै । वि.संस २०५७ जेठ १ गते कैलालीके साविक गेटा गाविसके कार्यालयमे पुर्वमन्त्री शिवराज पन्तके बन्धकीसे छुटकारा पैना १९ जाने बँधुवा मजदुरसे निवेदन दर्ता करलै । यी कदम कमैया प्रथा अन्त्यके निम्ति एक मेरिक सशक्त प्रयास रहे ।
विस्तारे यी अमानविय प्रथा विरुद्ध निवेदन डेना, धर्ना तथा विरोध प्रदर्शन कैना, सरकारहे दवाव डेना कमैयाहुकनके संघर्ष समिति गठन करलै । स्थानीयसे केन्द्र सरकारसम नम्मा समयके संघर्ष पश्चात सन् २००० मे कमैया आन्दोलनकारीहुक्रे संसदभिटर प्रवेश कैना प्रयास समेत हुइल रहे उ उहे समयमे संसद भिटर विपक्षी दलके राजनितिक दलहुक्रे कमैया मुक्तिके घोषणा नैकरटसम संसद अवरुद्ध कैना चेतावनी डेहल रहिट । यैसिक आन्दोलनसे उग्ररुप लेटी गैलपाछे सरकार आजित हुके अन्ततः २०५७ सावन २ गते कमैयाहुकनहे जमिन्दार ओ जमिन्दारके ऋणसे मुक्त हुइल घोषणा कैना बाध्य हुइल । फलस्वरुप कमैया प्रथा उन्मुलनके अन्त्य हुइल ।
पुनस्र्थापनाके प्रयास
वि.सं. २०५७ सालम कमैया मुक्त घोषणा करल पश्चात २०५७ फागुन ८ गते मन्त्रीपरिषदके बैठकसे दासप्रथाके अवषेश कमैया प्रथा सदाके लाग अन्त्य हुइल रहे । उहे अनुरुप कमैया पुनस्र्थापनामे सहजताके लाग कमैया श्रम (निषेध कैना सम्बन्धी) ऐन २०५८ जारी हुइल । २०६३ कुवाँर २ गते मन्त्री परिषदके बैठकसे उहे ऐनमे टेक्के केन्द्र ओ जिल्लामे हाली समिति बनाके काम कैना निर्णय करल । केन्द्रीयस्तरमे मुक्त कमैया पुनस्र्थापना अनुगमन समिति ओ जिल्ला स्तरमे मुक्तकमैया पुनस्र्थापना अनुगमन समिति गठन करके पुनस्र्थापनाके कार्यक्रम आघे बह्राइल रहे । मने राजनितिक दल ओ कर्मचारीहुकनके टमान स्वार्थके कारण यी आयोग ओ समितिसे प्रभावकारी भुमिका निर्वाह करे नैसेकल कारण कमैया पुनस्र्थापनाके कार्य अलपत्र अवस्थामे छोरल ओरसे अब्बेसम्म पुर्ण रुपमे न्यायिक पुनस्र्थापना हुई सेकल नैहो ।
सुदूरपश्चिम प्रदेशके कैलालीमे ९ हजार ७ सय ६२ जाने, कञ्चनपुरमे ४ हजार ५ सय छ जाने ओ लुम्बिनी प्रदेशके दाङमे १ हजार ४ सय २६ जाने, बाँकेमे २ हजार ३ सय १६ जाने ओ बर्दियामे १४ हजार ४ सय ९९ जाने कमैयाहुकनहे ०५७ सावन २ गते मुक्त घोषणा करल रहे । कैलाली जिल्लामे लाल परिचय पत्र ३ हजार ७ सय ५८, निला परिचय पत्र ५ हजार २ सय १७, हरदयार परिचय पत्र १ सय ८९ ओ उज्जर परिचय पत्र ५ सय ९८ जाने पैले रहिट ।
भुमिसुधार कार्यालय, कैलालीके तथ्याङ्क अनुसार ९ हजार ७ सय ६२ जाने मुक्त कमैयाहे पुनस्र्थापना करेपर्ना हो मने ९ हजार ३ सय ८२ जाने मुक्त कमैयाहुकनहे टमान स्थानके विवादित जग्गा, बैठना योग्य नैहुइल जग्गा, लडिया किनार, लडिया कटान, डुवान क्षेत्र, ऐलानी प्रति जग्गा, जंगल एरिया जैसिन ठाउँमे ५ धुरसे ५ कठ्ठाके दरसे जग्गा वितरण करल रहे । मने ऐलानीप्रति जग्गा समेत डेहे नैसेक्के २ लाख रुप्याके जग्गा खरिद करके वितरण करल पाइल बा ।
ओइनके आधारभुत आवश्यकता पानी, विजुली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, यातायात लगायतके सेवा सुविधामे ध्यान नैडेके पुनस्र्थापना करल पाजाइठ । पुनस्र्थापना कैना आघे सरकारसे जटरा प्रयास करेपर्ना हो उ हुइल नैडेखजाइठ । सरकारसे कमैया पुनस्र्थापनामे कमीकमजोरी करल डेखाजाइठ जेकर कारण कमैया मुक्ति हुइल नम्मा समयसमफे ३ सय ८० जाने कमैयाहुकनहे पुनस्र्थापना करे सेकल नैहो ।
मुक्त कमैयाहे पुनस्र्थापना करेबेर प्रतिपरिवार ५ कठ्ठा जग्गा, घर निर्माण कैना ३५ क्युफिट काठ ओ १० हजार रुप्या डेना घोषणा करल रहे मने हालसम सक्कु मुक्त कमैया सरकारसे घोषित यी सुविधा पाई नैसेकल हुइट । जेकर कारण कमैयाहुक्रे सामान्य प्रकृतिके घर समेत निर्माण करे सेकल नैहुइट । सरकारसे घोषणा करल पुनस्र्थापनाके कार्यक्रमसे अपन समस्या समाधान नैहुइलपाछे उचित पुनस्र्थापनाके माग करटी आन्दोलन करलै ओ २०७२ भदौ २ गते बैठल मन्त्रीपरिषदके निर्णयसे १० हजारके सट्टा ५५ हजार रुप्या ओ ३५ क्युपिट काठके सट्टा १ लाख रुप्या डेना ओ पुनस्र्थापना हुइना बाँकी रहल कमैयाहे २ लाख रुप्याके दरले जटरा जग्गा खरिद करे सेक्जाइठ उ उपलब्ध करैना निर्णय करल रहे । मने उ निर्णय नम्मा समयसे कार्यान्वयन हुई सेकल ओ कमैयाहुकनके समस्या अभिन ज्युँका त्युँ बटै ।
वर्तमान अवस्था
कैलाली जिल्लामे ३ सय ८० जाने मुक्त कमैयासे जग्गा पाई सेकल नैहुइट । ४ सय ३४ मुक्त कमैयाहे विवादित जग्गाके पुर्जा वितरण करल कारण ओइने उ जग्गा भोगचलन करे सेकल नैहुइट । रारकारके तथ्याङ्कमे पुनस्र्थापना करल कहल उ जग्गाके सट्टाभर्ना समेत पाइल नैहइट ।
सरकारसे कमैया मुक्तिके घोषणा करल दुई दशकसे ढेर हुसेकल बा ओ ओइनके अवस्था दयनिय बन्टी गैल बा । पुनस्र्थापना करल कहल मुक्त कमैयाफे टमान सेवा सुविधासे वञ्चित हुइटी आइल बटै । सरकारसे पुनस्र्थापना करल मुक्त कमैया बस्तीमे स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात, खानेपानी जैसिन पुर्वाधारक सेवासुविधा डेहे सेकल नैहो । जेकर कारण मुक्त कमैयाहुक्रे राज्यके हरेक सेवासुविधासे वञ्चित हुई परल अवस्थ बा । जिल्लामे अभिनफे हजारौ छुट कमैया अलपत्र रहल अवस्थामे राज्यके संरचना परिवर्तन हुईबेर कमैयाहुकनके सवाल तथा मुद्दा पुर्णरुपमे ओझेलमे परल बा । अभिनफे कमैयाहुक्रे वन अतिक्रमणकारीके आरोप खेप्टी अइटी रहल बटै ।
राज्यके सक्कु सेवा सुविधासे बञ्चित मुक्त कमैया अशिक्षा, बेरोजगारीसे चरम आर्थिक अभावमे जीवन विटैना बाध्य हुइल बटै । भौतिक सेवा सुविधा नैहुके दैनिक ज्यालादारीके कामफे पैना समस्या बा । बजारसे दुरके कमैयाहुकनहे सरकारसे डेहल ५ कठ्ठा जग्गामे खाई नैपुगठ ज्यालादारी कैना ठाउँ नैहई जेकर कारण कमैयाहुक्रे फे उहे जमिनदारके जग्गा कम ज्याला अर्थात अधियाँमे जमिन जोत्न बाध्य हुइल बटै ।
नेपाल संघीय संरचनामे गैलेसेफे संघ सरकारसे कमैया पुनस्र्थापनाके जिम्मा प्रदेश ओ स्थानीय सरकारहे डेहल रहे । मने प्रदेश ओ स्थानीय सरकार गठन हुइल दुई कार्याकालसम प्रदेश ओ स्थानीय सरकार कमैया पुनस्र्थापनाके लाग कौनो कार्यविधि वा कानुन बनाइल नैडेखजाइठ । प्रदेश ओ स्थानीय सरकार गठन हुइलेसेफे कमैया पुनस्र्थापनाके कार्य पुर्णरुपमे रोकल अवस्था बा ।
शिक्षाके अवस्था
कमैया श्रम निषेध ऐन २०५८ मे कमैयाके बालबालिकाहे निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करैना कहल बा । मने उ व्यवस्था सरकारसे अभिन लागु करे सेकल हो । कमैयाके बालबालिकाहुक्रे ढेर जैसिन पह्रे नैजैठै जउइयाफे शुल्क तिरके पह्रना बाध्य बटै । चरम आर्थिक अभावमे जीवन विटैटी रहल कमैयाके बालबालिका शुल्क तिरे नैसेक्के विचमे पढाई छोरके मजदुरी कैना बाध्य बटै । ओइने मजदुरीके लाग नेपालके शहरबजार ओ भारतके टमान ठाँउमे जोखिमपुर्ण काम करटी रहल भेटजइठै ।
सरकारसे आधारभुत तहसम अनिवार्य निशुल्क घोषणा करलेसेफे व्यवहारमे लागु नैहुइलपाछे कमैयाके बालबालिका शिक्षासे बञ्चित हुई परल बा । स्थानीय सरकारफे कमैयाके बालबालिकाक लाग कौनो स्पष्ट कानुन वा कार्यविधि नैबनाइल कमैयाके बालबालिका शिक्षासे बञ्चित हुई परल बा । नेपालके संविधानके भाग ३ मे मौलिक हकके धारा ३१ के उपधारा— २ मे उच्च शिक्षासम निशुल्क कहल बा । स्थानीय सरकासे अपन लोकप्रियताके लाग हरेक आर्थिक वर्षके नीति तथा कार्यक्रममे कमैयाके बालबालिकाहे निशुल्क शिक्षा ओ छात्रवृत्ति कहिके वजेट समेत विनियोजन करटी आइल बा ।
मने फे कार्यान्वयन कैना ओ अनुगमन कैना निकायके कमीकमजोरीके कारण गरिब, निमुखा, सीमान्तकृत समुदाय ओ ओम्ने कमैयाके बालबालिका शिक्षा प्राप्त करे पैना अधिकारसे वञ्चित हुई परल बा ।
स्वास्थ्यके अवस्था
नेपाल सरकारसे टमानस्तरके स्वास्थ्य संस्थामे ९० मेरिक औषधी निशुल्क वितरण कैना व्यवस्था मिलाइल बा । मन फे स्वास्थ्य संस्थामे प्रर्याप्त ओ सक्कु खाले औषधी उपलब्ध नैहुके गरिब, निमुखा, विपन्न, सीमान्कृत, कमैया समुदाय निशुल्क स्वास्थ्य उपचारसे वञ्चित हुई परल बा । सरकारके स्वास्थ्य बिमा कार्यक्रम प्रभावकारी नैहुके स्वास्थ्य बिमा कार्यक्रममे पहुँच पुगे सेकल नैहो । मुक्त कमैया ओइनके परिवारमे जेष्ठ नागरिक, दिर्घरोगी, गर्भवती ओ सुत्केरी महिला तथा बालबालिका स्वास्थ्य सेवा पैनासे वञ्चित हुइल ओरसे टमान स्वास्थ्य समस्याके सामना कैना विवश बटै ।
गम्भीर रोग लग्लेसे कमैयाहुक्रे महँगामे उपचार करैना बाध्य बटै की अकालमे मृत्यु वरण करे परल अवस्था बा । मने सरकारसे अइनहे केन्द्रीत करके विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम सञ्चालन करल नैडेखजाइड ।
रोजगारीके अवस्था
कमैया मुक्त घोषणा करल दुई दशकसे ढेर समय हुइलेसेफे सरकारसे कमैयाहुकनके योग्यता ओ क्षमताके आधारमे कही कौनो रोजगारीके व्यवस्था करल नैडेखजाइड । चरम आर्थिक समस्याके कारण उच्च शिक्षासम पह्रे नैसेकल कमैयाके परिवारहे जिविकोर्पाजनके लाग सरकारसे कौनो पहल हुइल नैडेखजाइठ ।
जिल्ला भुमिसुधार कार्यालयसे ४ हजार ४ सय ५० जाने कमैयाहे स्वारोजगारके लाग सीपमुलक तालिम डेलेसेफे पुजीँ अभाव ओ अर्धदक्षताके कारण प्रभावकारी डेखल नैडेखल । सरकारसे कमैयाहे डेहल ५ धुरसे ५ कठ्ठा जग्गाफे अस्थाई लालपुर्जाके कारण बैकिङ्क कारोवार करे सेक्ना अवस्था नैहो । जेकर कारण मजदुरीके लाग नेपालके शहरबजार ओ भारतके टमान ठाँउमे जोखिमपुर्ण काम कैना बाध्य बटै ।
कमैयाहुक्रे जटरा मेहनत ओ पसिना बगाके काम करलेसेफे उचित पारिश्रमिक पाई सेकल नैहो । न टे समयमे ज्याला पाई सेकल हुइट । जिहीसे कमैयाके परिवार अब्बेफे आर्थिक अभाव ओ टमान समस्याके सामना कैना बाध्य हुइल बटै ।
कानुनी प्रावधान
कमैया श्रम (निषेध कैना सम्बन्धी) ऐन— २०५८, मुक्त हलिया, कमैया, कम्लहरीके सम्बन्धमे व्यवस्थापना कैना बनल विधेयक —२०७८, ओ प्रत्येक स्थानीय तहसे कार्यविधि निमांण करके मुक्त हलिया, कमैया, कम्लहरीहुकनके पुनस्र्थापना करेपर्ना कानुनी डगर खुलल हुइलसेफे स्थानीय सरकारसे कौनो चासो डेहल नैहो । जेकर कारण कमैया पुनस्र्थापनाके कार्य पुर्णरुपमे ठप्प रहल अवस्था बा ।
