थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १२ सावन २६५०, मंगर ]
[ वि.सं १२ श्रावण २०८३, मंगलवार ]
[ 28 Jul 2026, Tuesday ]

धनगढीमे भव्यताके साथ ‘गुरही’ मनाजैना

पहुरा | १२ श्रावण २०८३, मंगलवार
धनगढीमे भव्यताके साथ ‘गुरही’ मनाजैना

पहुरा समाचारदात
धनगढी, १२ सावन ।
थारु समुदाय पहिल टिह्वारके रुपमे मनाजैना ‘गुरही’ इ बरस फेन धनगढीमे भव्यताके साथ मनैना हुइल बा ।

सखी सञ्जाल कैलालीके आयोजनामे मंगरके धनगढीमे हुइल थारु अगुवाहुक्रनके बैठकसे इ बरस फेन धनगढीमे गुरही मनैना हुइल हो । सञ्जालके अध्यक्ष सुनिता चौधरी सानु इ बरस फेन टमान कार्यक्रमके आयोजना कैके धनगढीके गुरही चौकमे गुरही मनैना तयारी करल बटैली । इ बरस गुरही टिहुवार भदौ १ गते सोम्मारके रोज परल ।

उहे बैठकसे गुरही टिहवारके तयारी तथा भव्यताके साथ सम्पन्न करक लाग टमान समिति तथा उपसमिति गठन करल अध्यक्ष चौधरी जानकारी डेली । उहाँ अपने संयोजकत्वमे गुरही असरैना मूल आयोजक समिति गठन करल बटैली ।

मूल आयोजक समितिके सहसंयोजकमे थारु लेखक संघ नेपालके अध्यक्ष कविता चौधरी, सदस्य सचिवमे सखी सञ्जालके सचिव तारा चौधरी रहल बटी ।

ओस्टके समितिमे थाकस धनगढी नगर समिति, राष्ट्रिय थारु कलाकार मञ्च, नेपाल आदिवासी जनजाति पत्रकार महासंघ, थारु पत्रकार संघ, बातचित घर, थारु महिला सञ्जाल, थारु विद्यार्थी समाज, सखी मञ्च, हमार फाउण्डेशन, पहुरा थारु दैनिक, गोहिनके फाउण्डेशन, हमार चैनार समूह, सुदूरपश्चिम समाज, हिरगर साहित्यिक बगाल रहल बा ।

उहे बैठकसे जिम्मेवारी बाँडफाँट फेन करल बा । सखी सञ्जालके कोषध्यक्ष बसन्ती चौधरीके संयोजकत्वमे आर्थिक उपसमिति, पहुरा थारु दैनिकके सम्पादक प्रेम चौधरीके संयोजकत्वमे प्रचारप्रसार समिति, मंगल चौधरीके संयोजकत्वमे मञ्च व्यवस्थापन समिति, रोहित चौधरीके संयोजकत्वमे अतिथि सत्कार उपसमिति, राजु चौधरीके संयोजकत्वमे सांस्कृतिक उपसमिति, सागर कुश्मीके संयोजकत्वमे स्वयम सेवक परिचालन उपसमिति, कल्पना चौधरीके संयोजकत्वमे पुजा समाग्री तथा भुजा गुडा उपसमिति, सुर्य चौधरीके संयोजकत्वमे मास परिचालन उपसमिति गठन करल बा । ओस्टके सल्लाहकार समितिमे प्रभात कुमार चौधरी, फोनीराम चौधरी, माधव चौधरी, निर्मला बखरिया, दुर्गा कुश्मी, राम कुमारी चौधरी, पुरन चौधरी ओ इन्द्रा चौधरी रहल बटै ।

थारु समुदायके टिहुवारके शुरुवातके रुपमे गुरहीहे लेजैना करजाइठ् । नागपञ्चमीके दिन इ टिहुवार मनैना हुइल ओरसे इ टिहुवारहे देशभरके थारु समुदाय धुमधामके साथ मनैना करठै ।

थारु समुदायमे ‘गुरही’ मनैनाके अर्थ, नाग बाबाहे पूजा करेबर विषालु साप घरमे नैअइना, घरमे बाज नै मर्र्ना, आगलागी नैहुइना, दुःखके बज्रपात नैपर्ना, रोगव्याधी ओ महामारी घरमे प्रवेश नैकैना विश्वास करजाइठ् । नागबाबाहे घरके डुवारमे टाँसके पूजा कैनाके आशय दुःख, कष्ट ओ रोगव्याधीहे नागबाबा घरमे प्रवेशसे रोकिट कना हो । इहीहे नागपञ्चमीके रुपमे फेन मनैना करजाइठ् ।

थारु समाजमे ‘गुरही/गुर्या’ कहिके मनाजैना इ टिहुवारहे नेपाली समाज नागपञ्चमी कहिके मनैठै । नागपञ्चमीमे विशेष कैके नेपालीहुक्रे नागबाबाके पूजाआजा करठै कलेसे थारु समाजमे ‘गुरही’ पूजा हुइठ् । थारु समाजमे फेन ठाउँअनुसार ‘गुरही’ टिहुवार फरक फरक ढंगसे मनैना करठै । इ टिहुवारमे गाउँके युवती गाउँसे डुरके चोकमे जाके कपडासे बनाइल छोट छोट गुरही (गाइने कीराके प्रतीक) असरैना चलन रहल बा । इ टिहुवारहे बालबालिकासे सम्बन्धित टिहुवारके रूपमे फेन लेना करल बा ।

गुरही असरैलेसे छोट छोट बालबालिकाहुक्रनके आँखी पक्ना, जुरी अइना, खटरा हुइना, उल्टी हुइना जैसिन रोग चोखैना जनविश्वास रहल बा । यकर साथे सामाजिक सद्भाव, आपसी मित्रता बह्रैनाके साथे गाउँमे हुइल दुःख, संकटलगायत अन्य विपत्ति भग्ना करल जनविश्वास रहल बा ।

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