थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १८ पुष २६४९, शुक्कर ]
[ वि.सं १८ पुष २०८२, शुक्रबार ]
[ 02 Jan 2026, Friday ]
‘ संस्मरण ’

वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

पहुरा | १८ पुष २०८२, शुक्रबार
वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

वकिल साप जोहारीलाल चौधरीसे मोर पहिल भेंट कहिया हुइल, कहाँ हुइल । इ बात महि याद नैहो । औपचारिक परिचय नैहुइलक ओर्से हुइ सायद पहिल भेंटके सम्झ्ना याद नैरहल ।

जब २०५९ साल चैत २९ से प्रकाशक दिलबहादुर चौधरी, सम्पादक राजकुमार चौधरी, कार्यकारी सम्पादक लक्की चौधरी ओ व्यवस्थापक नेपालु चौधरी, इ चार जहनके खास नेतृत्वमे पहुरा साप्ताहिक पत्रिका प्रकाशन हुइल रहे । ओहे पहुरा पत्रिकाके प्रिन्ट लाइनमे नाउँ लिखल रहे, कानुनी सल्लाहकार जोहारीलाल चौधरी । थारु समुदायके जट्रा फें संघसंस्था, पत्रपत्रिका जन्मल हरेक ठाउँमे लिखल बिल्गाए कानुनी सल्लाहकार अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरी । महि लागठ इहे लिखित नाउँसे क्लिक करल कि थारु वकिल फेंन बटैं कहिके ।

२०६३ सालसे लक्की चौधरीके प्रकाशन ओ सम्पादनमे जब हमार पहुरा अर्ध–साप्ताहिक पत्रिका निक्रल टे ओहो पत्रिकामे फेन कानुनी सल्लाहकारके रुपमे नाउँ लिखित बिल्गाइल ।

अस्टेक करके २०५९ साल चैत २९ से सुरुवाट हुइल पहुरा अर्ध–साप्ताहिक पत्रिका फेनसे २०६६ साल चैत २९ गतेसे दैनिक रुपमे प्रकाशन हुइ लागल टे वहाँ फेन कानुनी सल्लाहकारके नाउँ बिल्गाइल अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरी । पहुरा दैकिनमे आझसम निरन्तर प्रकाशन हुइटी बा । इ पत्रिकाके कानुनी सल्लाहकारसे छुट नैमिल्लिन वकिल साप जोहारीलाल चौधरीहे । इहिसे प्रमाणित हुइठ कि उहाँके थारु भासा, पत्रपत्रिका, संघसंस्थाप्रति कट्रा लगाब रहे कना ।

२०५८ सालमे पढाइके सिलसिलामे गाउँसे धनगढी सहर सिर्कनु । ओहे सालमे दाङ देउखरसे छविलाल कोपिलाके सम्पादनमे ‘केरनी’ वार्षिक पत्रिका मोर हाँठम परल रहे । उ पत्रिकामार्फत् साहित्य लेखनमे मोर हिरगरके छाप बैठगैल रहे । हुइना टे मै कविता, चुट्किला २०५४ साल ओर्से लिखे भिंरगैल रहुँ । मोर साहित्यके प्रेरणाके स्रोट, गुरु, मोर डाडु संगम कुश्मी जो हुइँट । उहाँ जब रेडियो नेपाल सुर्खेतसे प्रसारण हुइना हमार पहुरा कार्यक्रममे अपन कविता रचना पठाइँट । ओहेबेरसे मोर रुचि साहित्यमे खिँचल हो । २०५८ सालसम नियमित रुपमे बिन्तिराम महतो ओ श्रीप्रसाद चौधरी मोर गजल, कविता ओ चुट्किला खोब प्रसारण कैलैं ।

२०६८ सालमे जब मोर नेतृत्वमे कैलालीके पहिल साहित्यिक संस्था छिटलल थारु साहित्यिक समाज, हसुलिया जन्मल । ओस्टेके २०७० सालमे जिउगर साहित्यिक फँटुवा जन्मल । २०७१ सालमे हिरगर साहित्यिक बगाल, इजि नेपाल, बातचित घर २०७९, लगायत टमान संघरियनके अगुवाइमे जट्रा फेंन संघसंस्था जन्मल वकिल साप जोहारीलाल चौधरीके बहुट ढेर योगदान बा ।

ढेर जैसिन मनै जे जौन काममे लागल रहठ, उ ओहे काममे किल सिमित रहठ । जे जहाँ काम करि, जा काम करि ओम्हे किल लागके हेराइल रठैं । मने जोहारीलाल इ बाटसे डुर रहिंट । उहाँ पेशासे अधिवक्ता रहिंट । मने अपन काममे किल सिमित रहिके कब्बु फेन बैठल नैडेख्नु मै । अपन कामबाहेक सामाजिक संघसंस्थाके जट्रा फे गोष्ठी, अन्तरक्रिया, भेटघाट कार्यक्रम होए, उहाँ हरेक कार्यक्रममे उपस्थित हुइल बिल्गाइँठ ।

चाहे थारु कल्याणकारी संस्थाके बैठक होए, चाहे कोनो संस्थाके कार्यक्रम होए, चाहे कोनो फेन थारुनके कार्यक्रम होए, उहाँ अपन सक्रिय सहभागी जनाके असल परिचय डेले रहिंट । गुन लगैले रहिंट । मै उहाँसे खानपिनमे कार्यक्रममे ओट्रा खासे बैठाहीमे जमे टे नैसेक्नु । मने, पहुराके सुभकामना शुल्क, हरचालीके ग्राहक शुल्क, उठैना ओ साहित्यिक संस्थाके साधारणसभाके बैठक लगायत हरडम भेंट हुइटी रहुँ । कौनो फें कानुन सम्बन्धि बाट, सल्लाह उहाँसे लेटी रहुँ ।

अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरी थारु समुदायके एक जुझारु वकिल रहिंट । उहाँ थारु समुदायके अधिकार ओ हकके लाग लर्ना मनै रहिंट । उहाँ थारु समुदायके हकहितके लाग टमान संघसंस्थामे काम कैले बटैं । उहाँ हमार थारु समुदायके लाग एक प्रेरणाके स्रोत फेन हुइँट । थारु समुदायके विकास ओ समृद्धिके लाग ढेर काम कैले बटैं । थारु समुदायमे शिक्षा ओ जागरूकताके बारेमे महत्वपुर्ण काम कैले बटैं कलेसे सामाजिक न्यायके लाग टमान कानुन सम्बन्धि काम कैल बिल्गाइठ ।

अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरी नेपालके थारु समुदायके एक प्रख्यात वकिल तथा कानून व्यवसायी रहिंट । जे लम्मा समयसे कानुनके क्षेत्रमे सक्रिय भूमिका निर्वाह कैलै । उहाँ नेपाल बार एसोसिएसनमे उपाध्यक्षके नेतृत्वदायी भूमिका समेत निभैलै । जौन संस्था नेपालके वकिल समाज ओ न्यायिक पेशामे महत्वपूर्ण प्रभाव जमैले बा ।

वकिल साप कौनो फे संघ–संस्था, सरकारी निकाय वा संस्था–संगठन, कानुनी सल्लाहकार नियुक्त कर्ना हुइबेर उ व्यक्ति संस्थाके कानुनी ढाँचा, नियम, कानुन सुचना, विवाद समाधान ओ जोखिम व्यवस्थापन सम्बन्धी पेशागत सल्लाह डेना व्यक्तित्व रहिंट । जोहारीलाल चौधरी कानुनविदबाहेकसमाजसेवी, बौद्धिक व्यक्ति फेन रहिंट ।

जे जट्रा ढेर मनैनसे घुममिल हुइ सेकठ । उ ओट्रै ढेर मनै कमैले रहठ । इ पगरीमे वकिल साब फेन गनजैठैं । हुँकार सबसे भारी क्षमता कलक सब जहनसे हाली मिलनसार हुइ सेक्ना रहिन । कम बोल्ना लेकिन मिठ बोल्ना हुँकार आडट रहिन ।

ओस्टक मुद्दामे, वकालत कर्नामे कब्बु नै पाछे परिंट । हुँकार वकालत करल, लरल मुद्दा कब्बु फें फेल नैखाइन । एकाध मुद्दा बाहेक हरेक फैसलामे हुँकार जिट हुइल सुन्जाए । तालिम गोष्ठी चलैनामे बरा चौंकससे कलास डिँट । हुँकार डेहल कलास जुर लग्ना मेरिक कब्बु नैसुन्मिले । इहे ओर्से हुइ बहुटसे संघसंस्था मुद्दा फैसला कैना होए टे हुँकिन रोजिन । आब अइना दिनके हुँकार अढुरा यात्रा हुँकार छुट्की छावा विनय चौधरी इ क्षेत्रमे लागके मजा काम करिंट कना सबसे आस बटिन ।

वकिल साब उमेरसे टे मोर बाबा अडरिक हुइँट । मने जबसे चिन्जान हुइल, टबसे हमार मैगर संघरिया जैसिन सोरही चल्टी रहल । उहाँ इ संसारमे नैरलेसे फेन हुँकार याद, गुण, उपदेश मोर लाग प्रेरणा बनल बा । मै जब जब हरचाली त्रैमासिकके लावा अंक लेके हुँकार अफिसमे छिरुँ टे पत्रिकाहे कब्बु नैपर्हम, कब्बु नैकिनम नैकहलैं । बस अट्रै कहिंट– लागल रहबि सागर भाइ, इहे हरचाली पत्रिकामार्फत अपनेक पहिचान बनी । इहे जो अपनेहे जिनगी भर अमर बनाइ । इ बाट २०७२ साल भदौ ओरिक हो । इ बाट सोंच्ठुँ टे आँखिमसे यादके आँस चुहे लागठ ।

मनैनके जिनगी अस्टे हो वकिल साप । अपनेसे ढेर राहरंगी करे नैमिलल । ढेर गजल सुनाइ नैमिलल । साहित्यिक सम्मेलन कार्यक्रममे हिरगरसे उँकुवार भेंट करे नैमिलल । आब जिनगी मजा मजा रहि टे अपनेक छावनसे गल्गलाइ परि । मोर ओरसे ओ मोर हरचालीके टरफसे सैगर सम्झना । वकिल साप अपनेक ठैलीमसे बिठ्कोरेबेर मै अट्रै निकारे पैलुँ । अपने जहाँ रलेसे फेन अपनेक याद हमार ठन गुँठल बा ।

कैलारी–८, डख्खिन टेंर्ही, कैलाली

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