जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’
‘बाबा टैं का करटे ?’
‘कुछ नाई, अस्टे बैठल बाटुँ, टीका भाइसे बट्वाइटु’ मै छावाहे जवाफ डेनु ।
‘जोहारीक बारेम कुछ पटा पैले
बाटे ?’
‘नाइ टो’ मै कनु ।
‘बरा गरु बाटैं कना बाट आइटा । पंकज फोन कर्ले रहे, अस्पतालमे
बाटैं हुँ ।’
पंकज मोर भान्जा, वकिल जोहारीक भटिजुवा (बरापुक बर्का छावक् छावा) गाउँसे फोन कर्ले रहैं । मै साँझके धनगढी–५, जाईंके बिश्राम राईस मिलके संचालक टीकाराम चौधरी भाइसे मिलमे रहुँ । सँगे कैलारी–५, पवेरा स्कूलके मास्टर सुरेश चौधरी ओ कैलारी गापाके कृषि अधिकृत मैया चौधरी रहि । हमरे घर ब्यबहार, सुख्ना डुख्नाक बाट करटिही । इन्सेक संस्था छोरल पाछे, धनगढी अइलेसे मोर उठबस ढेरजैसिन टीका भाइ, थरुहटवादी नेता खडक चौधरी, शेरबहादुर चौधरीसे हुइठ । छावा पुछ्टी कि मोर चौंकस मन भोहर हो गिल । ‘ठिक बा, मै आइटुँ कनु ।’
छावक फोनसे पहिले सुरेश सर कह सेक्ले रहैं, माइती नेपालके जिल्ला संयोजक शिवचरण चौधरीसे भेट
हुइल रहे । ‘जोहारीक का हुइठ ? कहुँ लहाइ जैना खबर ना आए’ कना चिन्ता ब्यक्त करटहैं । शिवचरण मोर गवँलिया, डाडुक साला ओ जोहारी वकिलके सार्हु । शिवचरणके चिन्ता व्यक्त, भैनेक फोन कराईसे लागल कुछ गरबर बा । मै हाल्हल नास्ता ओर्वैनु । ‘अपनेहुक्रे बैठी, मै एकचो अस्पताल पुगम कनु ओ बिदा लेनु ।’
अस्पतालके चक्कर
बेरी जुन हो गिल रहे, भान्जा बिनय (जोहारीक छावा) हे फोन कर्नु, ‘कहाँ बाटी भान्जा ?’
‘नवजीवन अस्पतालमे बाटुँ मामा’ जवाफ आइल ।
छावै लैके नवजीवन अस्पताल पुग्नु । डुनु भान्जा (जोहारी
लालके छावाहुक्रे) बाहर रहैं । मिहिन डेख्टि कि डुनु जे सेवा लग्नै । उ
सेवा फे असहज लागल । भोहर मन, उदास बाटाबरनमे लेहल डेहल सेवा कैसिन रही ।
‘वकिल साप कहाँ बाटैं ? अवस्था का बा ?’ पुछ्नु ।
‘अस्टे बा मामा, भेन्टिलेटरमे बाटैं । विश्वास कम बा, मने रातके घरे कहाँ लैजिना हो, यिहैं रहब ।’
एकसिर्टे अन्ढार लागल, आँस गिरे लागल । भान्जक सँघरियै भान्जाहे संझाइटहैं । ‘ओइसिन कुछ परी, सहयोग चाही टो कहिस, बटाइस, खबर करिस, हमरे बाटी ।’ मने मै किहु नाइ डेख्नु, मोर लाजभास हेरागिल । बहुट रोक्नु, आत्मा नाइ मानल, मुह फोरडर्नु । अपनहे सम्हर्नु ओ कनु, मै भेट करे चाहटुँ, भेट करे नाइ मिली ?
‘अब्बे टो नाइ मिली मामा, भेन्टिलेटरमे बाटैं’ भान्जा कनै ।
टब आउर रोइनास लागल, मने रोक लेनु । ‘ठिक बा भान्जा, अब्बे भेट करे नाइ मिली टो काल्ह अइम’ कनु । बिदा लैके नेंगटिही कि आवाज आइल, ‘जोहारी लाल चौधरीके के बा ?’
भान्जा कहनै, ‘हमरे बाटी ।’
शायद अस्पतालके कारिन्दा कागजमे सिग्नेचर कराई आइल रहैं । ओइनसे कनु ‘मै भेट करे चाहटुँ ।’ ओइने मिहिन भेट कर्ना अनुमति डेनै । भिट्टर जाके हेर्नु । ढकढिउरा भर चलटेहे, शायद भेन्टिलेटरके जरियासे फे हुई । चिक्कन रहल बेला सडा डिन बिहाने नेग्ना सँघरियक आजसे आवाज बन्द हो गिल रहे । फेन आँस गिरे लागल । मै अवस्था पुछ्नु । स्वास्थ्यकर्मी बाबु कली, ‘अब सम्भावना बिर्कुल कम बा ।’
का बा हजुर हालखबर ?
गाउँसे धनगढी आइल डिने (पुस ३ गते) वकिल साप महि फोन कर्ले रहैं, “का बा हजुर हालखबर ? कहाँ बाटी ? कब भेटघाट हुई ?”
‘मै घरहीं बाटुँ, आजी अइनु । समय मिलाके अइम, भेटघाट करम’ कनु । सोच्ले रहुँ, सुख शनिच्चरके भेट करम ।
‘ठिक बा, अफिसमे अइबी टो मोर अफिस सरगिल बा । ठिक अपोजिट, सडकके पुरुब बा’ कले रहैं उहाँ । मने सोंचल हस हुइबे नि करल । ५ गते अस्पतालमे भेट करे बलाही डर्नै । उहाँ बोलचाल हुइना टे बाटे नै रहे ।
अस्टहीं समय बरा दुःख लागठ । कुछ न कुछ खट्कठ । हुँकार कहल समय भेट करे पुगजिटुँ टो का हुइट ? लग्गेक सँघरिया फोन कर्नै, ‘मै फे समय मिलाइट रहगिनु ।’ समय कैसिन चिज हो ? जिहिन बुझे नाइ सेक्जाइठ । समयमे नाइ जाके आज भारी गल्ती महसुस हुइटा । आत्मा झक्झोरटा, कहटा ‘सडा डिन भेट कर्ना मनै, समयमे का करे नि गैले ?’ शायद हुँकार आत्मा जनाइट रहल हुई कि आब कम्टिमे फोन करडारुँ कहिके !
कुछ समय भेट हुइल, नेंगल, घुमल, बोलल, बटवाइल मनैन्हे जब अइसिन लागटा टो पीडित परिवारहे कैसिन
लागट हुई ? दिदी ओ भान्जनपर का बिटट् हुई ? मनमे मेरमेराइक बाट खेला करल । उ डिन महा रातटक निंद नाइ परल । खुर्चिल खुर्चिल करा कर्नु, कैचो टो करवटे बडल्नु । प्रकृतिके नियम फे अचम्मके बा ! जिन्गिक कोनो ठेकाने नाइ हो । काल्ह बा, आज नाइ हो । सक्कारे बा, साँझके नाइ हो ।
बहुट पुरान चिनजान
वकिल (अधिवक्ता) जोहारीसे मोर चिनजान अब्बेक नाइ हो, बहुट पुरान हो । हुइना टो उ जानकी गाउँपालिका वडा न.ं १ दुर्गौलीक होइँ । मै लम्कीचुहा नगरपालिका वडा न.ं ७ हरदहनीक हुँ । मने हमार बचपना कुछ समय सँगे बिटल । पहिलेक समय, पहिले भोज, टब अगहन करैंह । दिदीक अगहनेसँगे मोर फे बिदाई हुइल रहे पर्हेक लग । स्कूल कम रहे । दर्जीवक सिअल झोला, झोलामे करिया सिलोट ओ गौखर, कन्धामे बोरा । परहाइक सुरुवात टो सरस्वती प्रा.वि. खैरहनीसे करल रहुँ । मने घरे पर्हना बाटाबरन नाइ रहे । दुर्गौलीमे गावेंमे स्कूल रहे । मै उहैं कक्षा १ से परहाईहे निरन्तरता डेले रहुँ । मै एकमे रहुँ, वकिल साप शिशुमे रहैं । भाटु प्रेम, बिहारी मिहिसे एक कलास आगे रहैं । मै भूषणकुमार उपाध्याय, हेमनाथ उपाध्याय, दुर्गा बम, जिन बहादुर, बीर बहादुर, चुल्ही बहिदार चौधरी लगायतके सँघरियन सँगे पर्हुं । जोहारी, तेजरामहुक्रे सँगे पर्हैं ।
चिरियाचटङ्गन ढुप्पन घाममे मै, जोहारी, तेजराम सँगे घुमी । कुरहरिया (लडिया) मे लहाई । सँगे चिरैं मारे जैना, कोटाल खोज्ना काम खूब कर्ली । मने परहाईमे फे टगरा रही । हमरे कलासमे मजा रही, फस्ट हुई । पहिले ३ सम प्रा.वि. रहे । पाछे नि. मा. वि. ओ मा. वि. ओर जाइक परे । ४ कलाससे एबिसिडी सिखे परे । मै प्रा.वि. सम फस्ट हुइनु । जनता मा.वि. ४ कक्षामे पुग्नु टो लर्कनके भिरमे हेरा गिनु । एकसिर्टे सातौं स्थानमे टरे चलगिनु । उहाँ बहुट प्रा. वि. से आइल लर्का पर्हैं । पाछे १० सम पुगट पुगट थर्ड, फोर्थ फे अइनु । कलास टपरमे पहिले निर्मला बम, पाछे निर्मलक स्थान अधिबक्ता नाथुराम महतो लै लेनै । जोहारी भर टो निरन्तर कक्षा टप रहनै, कबो कबो स्कूल टप फे रहनै । ओट्रै किल नाई महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पसमे फे कलास टप रहनै ।
वकालतके डगर
मै फे कानुनके विद्यार्थी रहुँ । मने इन्टर कट्टी कि मै राजनीति (बि.स.ं २०४९ मे एमालेसे गापा उपाध्यक्ष) ओर छिरगिनु । मोर परहाई ओरा गिल । जोहारी सर निरन्तर पर्हनै ओ वकालत करे लग्नै । ५ वर्षे राजनीतिक अनुभव पाछे मै इन्सेक क्षेत्रीय कार्यालय धनगढी (२०५६ सालसे) अइनु । धनगढी आइल समयसे हमार फेनसे दोस्ती जम्गिल । २०६२÷०६३ के जनआन्दोलन, उहिनसे पाछे हुइल थरुहट आन्दोलनमे हमार निरन्तर संलग्नता, सहभागिता रहल । मोर्निङ्ग वाक फे निरन्तर हुइल ।
आस्थाके हिसाबसे वकिल साप काँग्रेस रहैं, मै एमाले रहुँ । उहाँ पाछे स्वतन्त्र काँग्रेस हु गिल रहैं, मतलब दासतासे उप्पर हु गिल रहैं । जौन सही डेखैंह्, उहे कहैं । मै टो २०५८, ०५९ से स्वतन्त्र बामपन्थी, २०६० सालसे स्वतन्त्र नागरिक हु गिल रहुँ । मोर बोलीमे लगाम नाइ रहे । स्वतन्त्र विचार परोसुँ । अब्बे जेन जीहुक्रन गरिआइ हस टमाम नेताहुक्रे मिहिन गरिआइँह् । कतिपय नेताहुक्रे मोर हाकिमसे
चुग्ली खाइँह् ‘दिल बहादुरहे सम्झाडेहो, बरा कडा लिखठ’ कहैं । बिचार परोसना पत्रिका रहे पहुरा दैनिक (थारु भासा) ओ धनगढी पोष्ट दैनिक (नेपाली भासा) । वकिल साप आपन लेखन ना रोक्बि कहैं ।
आब नाइ बजि डिजे
चिक्कन रहटसम वकिल सापसे निरन्टर सँगे मोर्निङ्ग वाक कर्ली । हमार जोरी बनगिल रहे । हमरे डिजे (दिल बहादुर, जोहारी लाल) ग्रुपके नाउँसे ढेरजहन चिन्हा डर्ले रही । सक्कारे खोज्लेसे मनै सँगे भेटाइँह । मोर्निङ्ग वाकमे समसामयिक बिसयमे छलफल चले । कबो थारु चालचलन, टरट्यौहार, कबो बालबिबाह, कबो लिभिङ्ग टुगेडर, कबो प्रेममे डरार पर्लेसे उत्पन्न बलात्कार, मालपोत कार्यालयके मिलोमतोसे हुइना पास बन्धकी (राजीनामा), मिटरब्याजी कारोबार ओ ओइनके सन्जाल आदिके बारेम मजा छलफल चले । इ समस्यासे समाजहे कैसिक बचाई ? कैसिक रोकी ? थारु कल्याणकारिणी सभाहे कैसिक सक्रिय बनाई ? खूब चिन्तन मनन, छलफल करी ।
अदालतमे कौन मेरके मुद्दा ढेर आइठ ? कैसिक ईमान्दार मनै फँस्ठै, वकिल साप अनुभव शेयर करैंह् । साला भाटुक नाट, कबो कबो टो मजासे बाझी हमरे । भाटु टो कमे कहनु, कबो कबो भिनाजु कनु । सकहुनठे नाट पकर्ना फे सोहाइहस नाइ लागे । ओम्ने फे आधुनिक मनै, थारु शब्द भाटुसे भिनाजु कना ठिक लग्ना काहुँ । मिहिन चित्त नाइ बुझ्टी कि बाझ जाउँ । कहुँ, ‘अपने वकिलहुक्रे फे टो करे सेक्ठी, मजा भूमिका निर्वाह करे सेक्ठी । मालपोत ओ अदालतहे बिग्रुइया टो अप्नेहुक्रे
(लेखनदास ओ वकिल) हुई ।’
‘अरे दिल बहादुर जी, सब काममे नाइ सेक्जाइठ, कानुनके बाट रहठ । निर्दोष मनैन् फँसट डेख्बो, मने हेर्टी रहजिबो, अइसिन अवस्था रहठ । मने मै ढेरहस मनै न्याय पाइँह् कनामे ध्यान डेठुँ । झगडा मिलैना, मुद्दा ओरवैनामे ढेर जोरडेठुँ । डुनु पक्ष जीत जीतके अवस्थामे रहैं कहना मोर जोर रहठ,’ कहैं ।
हमरे आपसमे बझ्लेसे फे बहुट मन मिल्ना सँघरिया रही । छलफलमे टैटै मैमै करी, बिदा हुइबेर काल्ह फे निक्रेक परी ना कहके बिदा हुई । मोर्निङ्ग वाक नाइ अइना रलेसे पहिले जानकारी कराई । भिन्सहरे उठ्टी कि फोन सम्पर्क हु जाई, ‘केहरसे नेगटी ? केहर भेट हुई ?’ पुछ्डारी । फेन सँगे चल्डी । नियमित फोन सम्पर्क कर्नक कारन रहे, उ धनगढी सदभावना टोल (देवहरियाक लग्गे घर रना, मै जाई गाउँक रना । बिना फोन कर्ले, मोर्निङ्ग वाक कर्ले हमरे रहे नाइ सेकी । हमार सँगे कबो कबो अधिबक्ता सर्जुप्रसाद चौधरी फे लाग जाईंह् ।
अज्कलिक भोज बिना डिजे सोहावन नाइ रहठ । डिजे नाइ बजैलेसे लौला लौलिनके लर्का गोंगहा हुइठ हुँ । इ लिख्नौटि लिखेबेर मोर अंग्री काँपटा, इ सोंच्के कि आब हमार मोर्निङ्ग वाकके कबु नाइ बजि डिजे ।
वकिल साप सूचनाके श्रोत
सही कहुँ कलेसे मोर लग टो वकिल साप सूचनाके श्रोत रहैं । सक्कारे हुँकहिनसे हुइल टमाम छलफल मोर कलम चलैना आधार बनजाए । डिनके मेरमेराइक मुद्दा अइना, सक्कारे छलफल हुइना । लावा कानुन का आइल ? न्यायालय का निर्णय करल ? लावा नजिर का बा ? इ सब बाट मिहिन उहाँसे पटा हो जाए ।
वकिल सापके दोस्तीसे बहुट कुछ जानकारी मिले महिन ।
वकिल सापसे टमाम थारुन
हमरे सँगे मानव अधिकार सम्बन्धि तालिम फे डेली । उहाँके टो बाटे छोरी, वहाँ हजारौं मनैन् तालिम डेनै ।
कैलाली टो हुइगिल, कञ्चनपुरसम् ढवाही मारैंह् । बहुट सरकारी कर्मचारी फे हुँकहिनसे कलास लेले हुइहीं । उ अपन कानुन ब्यबसाय किल नाइ चलैनै, समाजहे फे ढेर सहयोग कर्नैं । हरेक छलफल, अन्तक्र्रियामे हुँकार सहभागिता रहे । खबर पाइल ढेर जैसिन् कार्यक्रम उ नाइ छोरैंह् । आउर वकिलहे कहलेसे फुर्सत नाइ हो कहना जवाफ मिले कलेसे जोहारी सरसे ढेर जैसिन ‘ठिक बा, आइक परी’ कहैं । धनगढीमे टोकल समयमे पुग्ना कलेक उहे रहैं । कुछ समय समाजके लग फे निकर्ना चाही कना मान्यता राखैंह् उ ।
लिखाईमे टप
डेख्नामे सिढा, छिहर फुहर कबो नाई बोल्ना, कामेक बाट किल कर्ना, तालिम चलाइबेर धाराबाहिक घन्टौ बोले सेक्ना हुँकार गुन रहिन । सोझ मनै कैसिक वकालत पेशा चलैहीं कना लागे मिहिन्, सायद बहुट मनैन् फे यिहे लागे । मने पेरपेर पेरपेर बोल्टी कि ब्यबसाय नाइ चलठ । ठिक भर बोल्लेसे फे मजासे ब्यबसाय चलठ कना उहाँ प्रत्यक्ष उदाहरन रहैं । डेखगिल बाट हो ।
न्यायालयमे कैसिक बहस कर्नै, हेर्ना मौका टो नाइ मिलल् । मने हुँकार लिखल मुद्दा पह्रना मौका मिलल । हाँठ डारल मुद्दाके फैसला सुने मिलल । ढेर जैसिन् मुद्दामे हुँकार पक्षमे फैसला हुइल सुने मिलल्, डेखे मिलल् । हुँकार मुद्दा पह्राई, लिखाई गहन रहिन । जस्टे कलासमे टप होइँ, ओस्टे मुद्दा बुझाई, लिखाईमे फे टप रहैं ।
२०७५ सालओरसे हमार निरन्तर भेटघाटमे ब्रेक हुइल । इन्सेकके जागिरके सिलसिलामे मै सुर्खेत लागल पाछे हमार भेटघाट पाटिर हो गिल । सुर्खेते रहल समय कोरोना आ गिल । मनैन्से मनै डरैना अवस्था आ गिल । लगट्टे मै इन्सेक छोर्नु । इन्सेक छोरल पाछे मै गाउँओर बैठे लग्नु । उ सुगरसे पीडित हु गिनै । मने कठैं छुटल घोर बुसेहला ठार्ह । धनगढी अइटी कि हमार चाल उहे रहे । बानी कहाँ छुटी । मन मिल्ना सँघरिया हुइलेक ओरसे हुई । चले सेक्नासम् हमार फोन सम्पर्क, भेटघाट हुइल करे । उ अपन खैना अपने बोकैंह् । सक्कारे चाह पिना गिलासके सादा दूध ओ अपन बोकल फलफूल खाईंह् । मै दूधके चाह ओ खास्टा खाउँ । चाहल समयमे समसामयिक बिसयमे छलफल हुइल करे । हमार दिनचर्या इहे रहे ।
५५ बरस ढेर उमेर नाइ हो । नेपालीनके औसत आयु नाइ पुग्टी, सरकारी बृद्धभत्ता नाइ पैटी वहाँ बिदा हु गिनै । मै बहुट सल्लाह पटना, मन मिल्ना सँघरिया गवाँ डर्नु, ज्ञान ओ सूचनाके श्रोत गवाँ डर्नु । समाज एक हिरगर अधिकारकर्मी गवैंले बा । कानुनके ज्ञाता, परिस्थितिके बिस्लेसक गवैंले बा । प्रशिक्षक, गुरु गवैंले बा । बार अपन सक्रिय, ईमान्दार सदस्य गवैंले बा । थारु लेखक संघ अपन संस्थापक सदस्य गवैंले बा । पहुरा दैनिक लगायट बहुट संघसंस्था कानुनी सल्लाहकार गवैंले बा । वकिल सापहे बहुट मनै बहुट रुपमे फे बुझट् हुइहीं ।
वकिल साप आरक्षणसे ढेउर, खुल्ला प्रतिस्पर्धामे जोर डेइँह् । उत्पीडित जातिहुक्रे आरक्षण टो मग्ना चाही, मने ढेर जोर मेहनतमे डेना चाही कना हुँकार बुझाई रहिन् । इ राज्य हो, राज्य संरचनाहे तुरन्त भट्काई सेकजिना अवस्था नाइ रहठ् । अधिकार मग्टि कि पैना अवस्था नाइ रहठ । मागो ओ सँगे मेहनत फे करो । समाजहे सचेत बनाउ, थारु कल्याणकारिणी सभाहे निस्पक्ष ओ सक्रिय बनाउ । समाजमे सचेतना फैलाउ । मिटर ब्याजी, पास बन्धकीवालनसे बचाउ, कानुनी ठगहुक्रनसे बचाउ कहैं उ ।
घरपरिवारसे खुस
वकिल साप अपन घरपरिवारसे बहुट खुस रहैं । बर्का छावा (मनोज चौधरी) हे कृषि पर्हाके संस्थामे
लगाडर्ले रहैं कलेसे छोटकी छावाहे अपनेहस वकिल बनैना सोच्ले रहैं । इहे ओर्से छोटकी छावा (बिनय चौधरी) हे बिबिएम कर्वाके कानुनी अभ्यास कराइटहैं ओ एलएलबी जोइन करैले रहैं । बर्का छावक भोज कर सेक्ले रहैं कलेसे छोटकी छावक भोज कर्ना बाँकी रह गिलिन् । छोटकी छावक फे भोज हाल्हल कर्ना चाहना रहिन् । मोर्निङ्ग वाकमे मै फे कहुँ ‘वकिल साप, छोट्की छावक फे भोज कर डारे परल ।’
‘अरे कहठुँ कि । कहट कहट हैरान बाटुँ । सम्ढिनिया नाइ मन्ठैं । पोर सालेसे कहटुँ । अब असौं नाइ रे, अइना साल हुई कना सल्लाह हुइल बा,’ उ कहैं ।
पाछेक घुमाई बाटचित अनुसार छोटकी छावाके भोज कर्ना ओ हुँकहिन करियाकोट लगाके अदालतमे जाइट डेख्ना हुँकार भारी चाहना रहिन, जौन अढकचरा रहगिलिन जैसिन मिहिन लागठ् । भान्जा हुँकार सपनाहे सहजे पुरा करहीं कना मिहिन विश्वास बा । मने जिन्दा रहल बेला उ डेखे नाइ पैनै, अटरै हो । करिया कोट लगाके अदालतमे पुगल दिन सायद पितृदेवके रुपमे उ स्वर्गसे हेर्हीं कनाअस लागठ ।
ओरौनीमे
जोहारी संघारीसे बिटाइल मोर उ सुनहरा डिनके बाट कबु नाइ ओराइ । आबक लग इ लेखके ओरौनीमे अटरै कहुँ, मनैक जिन्गी हो । आज बाटी, काल्ह नाइ हुई । समयहे रोके सेकेवाला कोई नाइ हो । हमार डगरा फे उहे हो । एक डिन सब्जे जैहिक परी । सँगे सुटट्, उठट्, नेंगट्, घुमट्, बोलट्, बटवाइट् मैया मोह अइसिक बाझ जाइठ कि लागठ हुँकार बिना कैसिक जिअम । मने जिहिक परठ । जिउ चाहठ मै ना मरु, मने मरे परठ । इहे सत्य हो । सत्य इ फे हो कि बुर्हाइल मनै जैठैं टो ठोरिक कम दुख लागठ । लर्का, ठँरिया बठिनिया जवान मनै जैठैं टो ढेर दुख लागठ ।
मनैन्के कुछ न कुछ ईच्छा, चाहना अढ्कचरा रहजाइठ । महा बिद्वान रावणके फे कुछ सपना अढ्कचरा रहगिल रहिस । कहठैं रावण समुन्दरके पानीहे मिठ बनैना, सोनमे मगमगैना बास भर्ना, बाबा मुनासे पहिले छावाहे नाइ मरे पैना नियम बनैना, स्वर्गटक जैना खोढ्ढा बनैना सपना रहिस्, जौन अढ्कचरा रहगिलिस । सपना सक्कु पुरा हुइठ कना नाइ हो । कौनो पुरा हुइठ, कौनो नाई । मने सेक्नासम हरेक लर्का अपन डाईबाबक सपना पुरा कर्ना कोसिस कर्ना चाही, अटरै हो । भान्जा हुँक्रे जरुर उ सपना पुरा करहिं कना लागठ ।
अन्तिममे बि.स.ं २०२७ साल कार्तिक २९ गते जन्मल बारके पूर्व केन्द्रीय उपाध्यक्ष, थारु लेखक संघके संस्थापक सदस्य, समाजके हिरगर खम्बा, अधिकारकर्मी वकिल साप हमहन ठे अपन मिठ छाप, मिठ सम्झना छोरके २०८२ पुस ६ गते स्वर्गके डगरा पकर सेक्नै । जबटक जिन्दा रहैं, चिन्तासे घेरल रहैं, चलगिनै चिन्तासे मुक्त हु गिनै । हमरे कौन डिन चिन्तासे छुट्टी पैठी, पटा नाइ हो । अब चिन्तासे लर्टी, सोंचहे शक्तिमे बडल्टी हुँकार मृतात्माहे स्वर्गमे बास मिले कहना कामना कर्ना सिवाय हमारठन् बिकल्प नाइ हो । अलबिदा ! वकिल साप अलबिदा !! अपनेहे लाख लाख सेवा, लाख लाख नमन !!!


