थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०१ भादौ २६५०, सोम्मार ]
[ वि.सं १ भाद्र २०८३, सोमबार ]
[ 17 Aug 2026, Monday ]

थारु समुदाय आज गुरही मनैटी

पहुरा | १ भाद्र २०८३, सोमबार
थारु समुदाय आज गुरही मनैटी
शिवानी चौधरी
धनगढी, १ भदौ । थारु समुदाय आज (सोम्मारके रोज ) गुरही टिहुवार भव्यता कार्यक्रम करके मनाई लागल बटै ।
यी टिहुवार नागपञ्चमीके रोज मनागिलेसेफे नागपञ्चमीसे वेग्लै तरिकासे आपन, परम्परा, संस्कृति, भेषभुषा ओ फकर टौरतरिकासे मनाजाइठ । यिहीहे नागपञ्चमी कहे नैसेक्जाइठ । नागपञ्चमीमे साँपनके पुजा कैजाइठ कलेसे यम्ने गुरही नेपालीमे गाइने किरा कहठै, गाइने किरा (गुरही)प्रति सम्मान प्रकट करठ ।
कृषि प्रणालीमे गाइने किरासे हानिकारक किरा नियन्त्रण करके वातावरणीय तथा जैविक सन्तुलन कायम कैना सहयोग कैना ओरसे थारू समुदायसे यिहीहे किसानके संघरीयाके रूपमे सम्मान करटी आइल बा । यिहीसे गुरही पर्वहे वातावरण संरक्षण, जैविक विविधता तथा दिगो कृषि प्रणालीसँग जोरल सांस्कृतिक अभ्यासके रूपमे स्थापित करले बा ।
पहिलेक पुर्खाहुक्रे आ–आपन गाउँमे आपन मौलिकता अनुसार मनैना करलेसेफे अब्बे गुरही मनैना तरिका आधुनिकता गैलेसेफे स्थापित हुइटी गैल हो ।
थारु समुदायसे मनाजैना गुरही टिहुवारके पहिले पहिले खासे चर्चा नैहुइलेसेफे अब्बेभर गाउँ गाउँमे भव्यता कार्यक्रमके विच मनाजैटी बा । जिहीसे गुरही टिहुवार स्थापित हुके राष्ट्रिय अन्तराष्ट्रिय रुपमे स्थापित हुई लागल बा । जौन मजा पक्ष हो ।
पहिले भोज नैकरल लउण्डीन आपन पहिरनमे गुरही अस्रैना लुगरक गुरही बनाके, टमान मेरिक भुजा ढकलीमे लेके ओइनसंगे लउण्डाहुँक्रे सोटा लेके गाउँक दख्खिन जाईट । गुरही अस्रैना ठाउँमे पुगलपाछे लउण्डा मनै चुरकीमे विना सास लेहल गाँठी पारलपाछे लउण्डीहुक्रे आपन लैगिल गुरही ओ भुजा अस्राइट, लउण्डा मनै सोटाले ठठाइट ।
अब्बे भर गुरही टिहुवार औपचारिक कार्यक्रम करके मनैना सुरुवाट हुइल बा । एक ओर हमार संस्कृति स्थापित विश्वव्यापी करल हुइटी गैल बा कलेसे दुसर ओरसे परम्परा अनुसार मनैना चलन हेराई लागल बा ।
कैसिक मनाजाइठ् गुरही ?
थारु समाजमे यी टिहुवार ओ पूजाहे कुछ फरक मेरिक लेजाइठ् । खेतीपाती उसारके सबजे घरम् फुर्सटसे बैठल बेला अइना यी टिहुवार साउन शुक्ल पञ्चमीमे पर्ना टिहुवार हुइलक ओरसे यी नागपञ्चमीके दिन परठ । थारु समाजमे गुरही, गुर्या कहिके मनैना गैरथारुहुक्रे नागपञ्चमीके पूजा कैठै ।
वरष दिनके खैना जुटाइक् लाग खेतीपातीमे पेलल थारु समाज जब हिलाकिंचासे निकरके अइठैं टब्बहीं गुरही टिहुवार आइठ । साँझके समयमे जब गोरु बछरु गयरवन आपन–आपन घारीमे करयइठैं टब गाउँक् अघरिया (चौकीदरवा, चिरकिया) के पहलमे गाउँक डादुभैया ओ डिडीवहिनियाहुक्रे लावा–लावा लुगरा लगाके टठियामे मेरमेराइक भुजा, डुब्बा घाँस, रंगी बिरंगी लुग्रक गुरही लेले गुरही–गुरहा ठटैना ठाउँमे गैल रठैं । प्रायः कैके गाउँक् चौराहामे ठटैना गुरहीमे सक्कु गाउँभरिक लउण्डा लउण्डी ओ बुह्राइल मनैफेन गुरहीक भुजा मागक लाग चौराहाओर जम्मा रठैं ।
जब गाउँक् अघरिया एक संस्सु डुब्बा घाँसम् गाँठ पारट अथवा एकठो गुरही बनाइल चिरकुटमे गाँठ पारके गुरहीगुरहा ठटैैना आदेश डेहठ् टब उपस्थित हुइल सक्कु लौंरा लर्का आपन–आपन रंगीचंगी सोंटा ओ लम्मा–लम्मा भांगक, बेरसरमक् ओ और चिजसे बनल सोंटासे “घुघरी डेउ” “घुघरी डेउ” कटि ठटैना काम कर्ठैं ।
ऐसिक गुरही ठटैलसे पुरान गाउँमे रहल रोगव्याधी सब नास हुइठैं ओ गाउँहे रोगव्याधि ओ दुःखसे छुटकारा मिलठ् कना बाटके हमार थारुसमाजमे गहिंर जनविश्वास रहल बा । मने रहस्यमय बाट का बा कलसे एक्ठो लुग्रक जन्नी–थारु मनैयक संकेत करके बनाइल गुरहीहे काकर ठटाजाईठ् टे ?
गुरही ठटाके सेकके सक्कुजाने जम्मा हुइल चौराहामे डिडीवहिनिया हुक्रे गुरही ठटैना ठाउँमे भुजा छिटकर्ना ओ सक्कु जम्मा हुइल लर्कापर्का ओ बुरहाइल मनैनफे आपन टठिया मनिक् बोकके नानल मेरमेराइक भुजा जस्टे– मकैक भुजा, चना, केराउ, भरठर आदिके भुजा सक्कुहुन एक–एकचुटि प्रसादके रुपमे बँट्ना काम कर्ठैं । जवसम टठियक भुजा नै ओरैैठिन टबसम लरकाहुक्रे  “भुजा डेउ, भुजा डेउ” कर्टि पाछे–पाछे लागल रठैं । ऐसिक ठटाइल गुरही ओ रंगी विरंगी चिरकुट ठटाइल ठाउँसे उठाके आपन घरक डुवारीम् बन्धबो कलसे ओ गुरही ठटाके बचल डुब्बा ओ भुजागुडा आपन घरक छपरम लबडैलसे घरम रहल दुःख चिन्ता दूर हुइना ओ घरक भित्तर रहल साँप गोजर फेन घरसे बाहर निकरके भग्ठै ओ घरम शान्ति सुख हुइठ् कना हमार थारु समाजमे पुरान जनविश्वास कायम बा ।

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