बैतडीके विक्रम कोरियामे पहिल नेपाली पाइलट बन्लै
पहुरा समाचारदाता
बैतडी,९ भदौ । बैतडीके दशरथचन्द नगरपालिका–१ मुडापके २३ बर्षीय विक्रमसिंह भाट दक्षिण कोरियामे पहिल नेपाली पाइलट बनल बटै ।
बुवा प्रेमसिंह भाट ओ डाई शान्ति भाटके कोखसे जन्मल विक्रम दक्षिण कोरियामे अपन सपना पूरा हुइल बटैले बटै ।
पाइलट बन्न लक्ष्य बोकल भाट संघर्षसे सफलता मिलल बटैले बटै । कम्युटर इन्जिनियरिङ पढाइके लाग सन् २०२३ मे दक्षिण कोरिया पुगल भाट पाइलट बन्न अपन लक्ष्यहे पूरा करले बटै ।
सामान्य किसान परिवारमे जन्मल विक्रम कक्षा ८ सम गाउँके राष्ट्रिय मावि पालीमे अध्ययन करलै कलेसे एसईई मणिलेक मावि गुरुखोलासे उत्तीर्ण करलै । महेन्द्रनगरके कञ्चन विद्या मन्दिरसे विज्ञान विषय लेके कक्षा १२ उत्तीर्ण करल भाट कम्प्यटुर इन्जिनियरिङके पढाईके लाग दक्षिण कोरिया पुगल हुइट ।
छोटसे पाइलट बन्न चाहना राखल भाटहे कोरिया पुगलपाछे पाइलट बन्न यात्रा सोचल जस्टे सहज भर नैरहे । नयाँ देश, नयाँ भाषा ओ नयाँ प्रणालीसंगे विदेशी नागरिकके लाग पाइलट बन्न डगरसमेत स्पष्ट ओ सहज नैहुके उहाँहे कुछ अप्ठ्यारो पक्के रहे । कोरियन भाषाके सामान्य ज्ञानसमेत नैरहल विक्रम पढाइ, काम ओ दैनिक जीवनसंगे भाषा सिख्टी अपन सपनासँग सम्बन्धित जानकारी खोजे लागल बटैलै ।
पाइलट बन्न यात्राके क्रममे अमेरिकी सैन्य पाइलट ज्यासन काटेजसँग भेट्न अवसर पाइलपाछे उहाँमे पाइलट बन्न हौसला आउर बह्रके गैल ।
उहाँ पाइलट बनेक लाग बिहान विश्वविद्यालयके कक्षा, ओकरपाछे घन्टौँके यात्रा करके प्रशिक्षण, थाकल शरीर लेके उडान ओ रात अबेर घर लौटना कार्यतालिका बनैलै ।
उडान नैहुइल दिनमेफे काम करके उहाँ अपन जीवनयापन ओ पाइलट प्रशिक्षणके खर्च जुटैलै । यी यात्रामे उहाँ अपने कमाइसे करिब २० लाख रुपैयाँ खर्च करले बटै ।
घरपरिवारके साथ सहयोग ओ अपन आत्मविश्वाससे सफलता मिलल विक्रमके कहाई बा । २० अगष्ट २०२६ मे पाइलट परीक्षा उत्तीर्ण करल विक्रम कोरियामे पहिल नेपाली पाइलट बन्न अवसर पाइल बटैले बटै ।
गाउँके सरकारी विद्यालयसे शुरु हुइल उहाँक यात्रा कोरियाके आकाशसम पुगल बा । अब्बे उहाँ स्पोर्ट एयरक्राफ्ट उडाई सुरु करले बटै । ओ अइना दिनमेफे व्यावसायिक पाइलट बन्न तालिमके तयारीमे बटै ।
