जेन–जी आन्दोलन सम्बन्धी अनुसन्धानके पूर्ण प्रतिवेदन तत्काल सार्वजनिक कैना माग
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १० भदौ । २०८२ भदौ २३ ओ २४ गते हुइल जेन–जी आन्दोलन सम्बन्धी अनुसन्धानके पूर्ण प्रतिवेदन (६०० पृष्ठ) तत्काल सार्वजनिक कैना अनुरोध कैगिल बा ।
नागरिक समाजसे बुधक रोज राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग सुदूरपश्चिम प्रदेश कार्यालयमार्फत राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोगके माननीय अध्यक्ष तपबहादुर मगरहे ध्यानाकर्षणपत्र वुझैटी जेन–जी आन्दोलन सम्बन्धी अनुसन्धानके पूर्ण प्रतिवेदन (६०० पृष्ठ) तत्काल सार्वजनिक कैना अनुरोध कैगिल हो ।
ध्यानाकर्षणपत्रमे कहल बा, नेपालके संविधान, २०७२ के धारा २४९ बमोजिम राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग मानव अधिकारके संरक्षण, प्रवद्र्धन तथा उल्लङ्घन सम्बन्धी अनुसन्धान कैना स्वतन्त्र एवं स्वायत्त संवैधानिक निकाय हो । राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय मानव अधिकार सम्बन्धी दायित्वके अनुगमन करटी राज्यहे जवाफदेही बनैना जिम्मेवारी आयोगके हो । ग्लोवल एलाइन्स फर नेशनल हुमन राइटस इन्स्टिुसनके अनुसार राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग ’ए’ श्रेणी प्राप्त संस्थाके रूपमे रहल ओरसे यकर निष्पक्षता, स्वतन्त्रता, पारदर्शिता ओ विश्वसनीयताप्रति आम नागरिकके उच्च अपेक्षा रहठ ।
यिहे संवैधानिक दायित्व अन्तर्गत आयोगसे मिति २०८२ साल भदौ २३ ओ २४ गते हुइल जेन–जी आन्दोलन सम्बन्धी अनुसन्धान सम्पन्न करके प्रतिवेदन तयार करल समाचार माध्यम मार्फत् सार्वजनिक करल रहे । उ आन्दोलन नेपालमे मानव अधिकार, नागरिक स्वतन्त्रता, राज्यके वल प्रयोग, राजनीतिक जवाफदेहिता तथा लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था राज्यके महत्वपूर्ण भौतिक सम्पत्ति लगाएत ऐतिहासिक दस्तावेज ओ मानवीय क्षतिसंग प्रत्यक्ष सम्बन्धित अत्यन्त संवेदनशील घटना हुइल ओरसे उ सम्बन्धी आयोगके अनुसन्धान प्रतिवेदनसे राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय दुनु स्तरमे विशेष महत्व राखठ ।
आयोगसे वि.स. २०८३ साल जेठ १३ गते सार्वजनिक करल २९ पृष्ठके संक्षिप्त प्रतिवेदनसे कुछ प्रारम्भिक निष्कर्ष सार्वजनिक करलेसेफे आम नागरिक, मानव अधिकारकर्मी, नागरिक समाज, कानून व्यवसायी तथा अनुसन्धानकर्ताहुकनके दृष्टिमे उ प्रतिवेदन पूर्ण अनुसन्धान प्रतिवेदन नैहुके साराशके फे सारांश केल्ह रहल बुझैटी रहल बा । यिहीसे घटनाके सक्कु सत्य, अनुसन्धानके आधार, प्रमाणके विश्लेषण तथा आयोगके निष्कर्षबारे पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई सेकल नैडखजाइठ ।
लोकतान्त्रिक शासन प्रणालीमे स्वतन्त्र संवैधानिक निकायके प्रतिवेदन सार्वजनिक हुइना केवल सूचना प्रवाहके विषय केल्ह नैहुके यी राज्यके जवाफदेहिता, पीडितके न्यायके अधिकार, सत्यके अधिकार तथा सार्वजनिक विश्वाससंग जोरल विषय हो । टबमारे आयोगसे तयार करल पूर्ण प्रतिवेदन तत्काल सार्वजनिक कैना अत्यावश्यक बा, ध्याननाकर्षणपत्रमे कहल बा ।
पारदर्शिता लोकतन्त्रके आधारभूत मूल्य हो । आयोग जैसिन संवैधानिक संस्थासे अनुसन्धान सम्पन्न करसेकल विषयमे पूर्ण प्रतिवेदन सार्वजनिक नैकरेबेर आयोगके निष्पक्षता ओ विश्वसनीयता उप्पर अनावश्यक प्रश्न उठ्न संभावना रहठ ।
मानव अधिकार ओ लोकतान्त्रिक मूल्य–मान्यताप्रति प्रतिबद्ध नागरिक समाज, मानव अधिकार रक्षक तथा सरोकारवाला नागरिकके ओरसे मिति २०८२ साल भदौ २३ ओ २४ गतेके ’जेन–जी आन्दोलन’ सम्बन्धी तयार करल अनुसन्धान पूर्ण प्रतिवेदन हाली सार्वजनिक कैना अनुरोध कैगिल बा ।
आयोगसे अपन संवैधानिक दायित्व पेरिस सिद्धान्त ओ मानव अधिकार सम्वन्धी अन्तर्राष्ट्रिय प्रतिबद्धता अनुरूप प्रतिवेदनके सार्वजनिक कैनासे यकर पारदर्शिता, निष्पक्षता ओ जनविश्वासहे थप सुदृढ बनैनामे हम्रे विश्वस्त रहल उ पत्रमे कहल बा ।
ध्यानार्कषणपत्र गैसस महासंघके प्रदेश अध्यक्ष देवी खनाल, इन्सेक प्रदेश संयोजक खडकराज जोशीलगायतसे राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रमुख प्रकाशदत्त भट्टहे बुझाइल रहिट । ध्यानार्कषणपत्र बुझैना कार्यक्रममे बार कैलालीके अध्यक्ष नाथुराम महतों, इन्सेकके प्रदेश अधिकृत कृष्णबहादुर विश्वकर्मा, जिल्ला प्रनिनिधि मैनामोती चौधरी, सिविन नेपालके पदमा चन्द, मानव अधिकारका लागि महिला एकल महिला समुह कैलालीके अध्यक्ष मनोदरी भण्डारीलगायतके सहभागिता रहे । ध्यानाकर्षणपत्र बुझटी आयोग सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रमुख भट्ट यी पत्रहे केन्द्रीय कार्यालयमे पठैना जनैलै ।
