सुरक्षा आवास स्थापनाके माग
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, ३० भदौ । कैलाली जिल्ला स्तरीय सुरक्षा आवास स्थापना तथा सञ्चालनके माग करल बा ।
जिल्ला स्तरिय मानव अधिकार समुहसे हिंसा प्रभावित महिला तथा बालिकाहुकनके लाग जिल्ला स्तरीय सेफ हाउसके माग करटी सोम्मारके रोज सुदूरपश्चिम प्रदेश सामाजिक विकास मन्त्री सन्तोष शर्माहे ध्यानाकर्षणपत्र बुझाइल रहिट ।
नेपालमे १५ से ४९ वर्षके २३ प्रतिशत महिलाहुक्रे शारिरिक हिंसा भोग्न करल नेपाल प्रहरीके एक अध्ययनसे बटैठै । जेम्ने मध्ये ८ प्रतिशत महिलासे यौन हिंसा ओ ६ प्रतिशतसे गर्भावस्थामे हिंसा भोग्न करल पाइल बा ।
साथे २७ प्रतिशतसे गोसिया अथवा अन्तरङ्ग संघरियासे हिंसा भोगल डेखजाइठ । हिंसा भोगल मध्ये ५३ प्रतिशतहे गहिर घाउ, चोट लागल पाजाइठ । हिंसा भोगल मध्ये २८ प्रतिशतसे केल्ह हिंसा विरुद्ध सहयोग मागल तथ्य बा । बिशेष करके महिला तथा बालिकाहुक्रे लैङ्गिक हिंसासे ढेर प्रभावित हुइना करल तथ्यसे उजागर करल बा । कलेसे हिंसा प्रभावितके उचित संरक्षणके अभावमे हिंसाके घटनाहे सहके बैठे पर्ना साथे हिंसा प्रभावित झन जोखिममे पर्ना करल डेखल बा ।
लैंङ्गिक हिंसा प्रभावित महिला तथा बालिकाहुकनहे अल्पकालिन सुरक्षित आश्रय सेवा प्रदान करके ओइनके स्वास्थ्योपचार, मनोपरामर्श सेवा, कानुनी सहायता, सुरक्षा लगायत पारिवारिक तथा सामाजिक पुनःस्थापना कैना आवश्यक डेखजाइठ ।
महिला तथा बालिका उप्पर हुइना हुइना घरेलु हिंसा, लैङ्गिक हिंसा, यौन हिंसा तथा अन्य मेरिक हिंसासे प्रभावित व्यक्तिके जीवन, सुरक्षा, मर्यादा ओ मानव अधिकारके संरक्षण राज्यके महत्वपूर्ण दायित्व हो ।
नेपालके संविधानसे महिलाहे हिंसा तथा शोषणसे संरक्षण पैना हक सुनिश्चित करल बा । यिहे सन्दर्भमे घरेलु हिंसा (कसूर ओ सजाय) ऐन, २०६६ के दफा ११(१क) से नेपाल सरकारसँग समन्वय करके प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहसे आवश्यकता अनुसार प्रभावित ̸ पीडितहे तत्काल सुरक्षा प्रदान कैना तथा उपचारके क्रममे अलग्गे बैठना व्यवस्थाके लाग सेवा केन्द्र स्थापना करे सेक्ना स्पष्ट कानुनी व्यवस्था करल बा ।
उ ऐनके दफा ११(२क) बमोजिम प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहसे स्थापना तथा सञ्चालन करल सेवा केन्द्रके अनुगमन सम्बन्धित प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहसे कैना व्यवस्था बा । साथे, दफा १२(१क) से प्रदेश सरकारसे अपन स्रोतसे व्यवस्था कैना करके प्रदेश कानूनबमोजिम सेवा कोष स्थापना करे सेक्ना व्यवस्था करले बा ।
घरेलु हिंसा (कसूर ओ सजाय) नियमावली, २०६७ से समेत सेवा केन्द्रमार्फत पीडितके सुरक्षा, उपचार, कानुनी सहायता, मनोविमर्श तथा मनोवैज्ञानिक सेवा उपलब्ध करैना आधार प्रदान करले बा ।
नेपाल सरकारसे स्वीकृत लैङ्गिक हिंसा विरुद्धके राष्ट्रिय कार्ययोजना सन् २०१० के उदेश्यके बुदा नं. ३, घरेलु हिंसा (कसुर ओ सजाय) ऐन २०६६ तथा ओकर नियमावली २०६७ से करल ब्यवस्था ओ एकद्धार संकट व्यवस्थापन केन्द्र सञ्चालन निर्देशिका २०७७ के दफा २.२.४ ओ नेपालके संविधान २०७२ सेफे हिंसा प्रभावितके लाग सुरक्षा आवास सेवा केन्द्र स्थापना ओ संचालन कैना प्रदेश तथा स्थानीय सरकारहे अधिकार प्रदान करल बा ।
महिला तथा बालिकाउप्पर हुइना लैङ्गिक हिंसा, घरेलु हिंसा, यौन हिंसा, मानव बेचबिखन तथा अन्य मेरिक हिंसासे प्रभावित तथा जोखिममे रहल महिला ओ बालिकाहुकनहे तत्काल सुरक्षित वातावरण, संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा, मनोसामाजिक परामर्श, कानुनी सहायता तथा पुनस्र्थापनाके आवश्यकता परठ । हिंसासे प्रभावित व्यक्तिहुकनहे हिंसात्मक वातावरणसे सुरक्षित स्थानमे धारके आवश्यक सेवा तथा सहयोग उपलब्ध करैना सुरक्षित आवास गृह महत्वपूर्ण संरक्षण संयन्त्रके रूपमे रहल बा ।
कैलाली जिल्ला सुदूरपश्चिम प्रदेशके महत्वपूर्ण जिल्ला हुइल ओरसे यहाँ टमान स्थानीय तहसे हिंसाके घटनाहुकनमे प्रभावित महिला तथा बालिकाहुक्रे सेवा लेना अइना करल बटै । विशेष करके घरेलु हिंसा, लैङ्गिक हिंसा, यौन हिंसा, बालविवाह, मानव बेचबिखन तथा अन्य सामाजिक विभेदके कारण प्रभावित व्यक्तिहुकनहे तत्काल सुरक्षित आवास तथा एकीकृत सेवा आवश्यक पर्ना अवस्था विल्गाइठ ।
हिंसासे प्रभावित व्यक्तिहुकनहे सुरक्षित स्थानमे रख्न, गोपनीयता कायम कैना, आवश्यक स्वास्थ्य उपचार, मनोसामाजिक परामर्श, कानुनी सहायता, प्रहरी तथा न्यायिक प्रक्रियामे सहजीकरण ओ परिवार तथा समुदायमे सुरक्षित पुनःएकीकरण करेक लाग जिल्लास्तरमे प्रभावकारी ओ दिगो सुरक्षित आवास सेवाके आवश्यकता रहल बा ।
साथे, जिल्लामे महिला, बालबालिका तथा लैङ्गिक हिंसासे प्रभावित व्यक्तिहुक्रे टमान मेरिक हिंसा, दुव्र्यवहार, यौन हिंसा, घरेलु हिंसा तथा अन्य लैङ्गिक हिंसा भोग्टी आइल अवस्था बा ।
हिंसासे प्रभावित व्यक्तिहुकनहे तत्काल उद्धार करके सुरक्षित राखेपर्ना अवस्थामे कैलाली जिल्लामे जिल्लास्तरमे व्यवस्थित, सुरक्षित, गोपनीय, पहुँचयोग्य ओ आवश्यक सेवासहितके सुरक्षा आवासके अभाव डेखल बा । यी कारण हिंसासे प्रभावित व्यक्ति तथा बालिकाहुकनहे तत्काल सुरक्षित स्थानमे रख्न, फेर हिंसाके जोखिमसे जोगाइक लाग तथा आवश्यक सेवा प्रदान कैना व्यवहारिक कठिनाइ उत्पन्न हुइटी रहल बा ।
विशेष करके दुर्गम तथा ग्रामीण क्षेत्रसे अइना प्रभावितहुक्रे, बालिका, एकल महिला, अपाङ्गता हुइल व्यक्ति तथा उच्च जोखिममे रहल प्रभावितहुकनके सुरक्षित आवासके आवश्यकता आउर ढेर रहल बा । टबमारे कैलाली जिल्लामे प्रदेश सरकारके नेतृत्व तथा सम्बन्धित स्थानीय तह ओ सरोकारवाला निकायहुकनके समन्वयमे जिल्लास्तरीय सुरक्षा आवास स्थापना करके प्रभावकारी रूपमे सञ्चालन कैना तत्काल आवश्यक पहल कैना जिल्ला स्तरके मानव अधिकार समुहसे १० बुँदे माग सहित यी ध्यानाकर्षण पत्र हस्तान्तरण करल बा ।
समुहसे करल माग
कैलाली जिल्ला सुदुरपश्चिम प्रदेशके महत्वपुर्ण जिल्ला हुइल ओरसे यहाँ टमान स्थानीय तहसे हिंसाके घट्नामे प्रभावित महिला तथा बालिकाहुक्रे सेवा लेहे अइना करल बटै । यी विषयमे प्रदेश सरकार संबेशदनशिल हुके हिंसापीडित महिला तथा बालिकाके लाग कैलाली जिल्लामे जिल्लास्तरीय सुरक्षित, गोप्य ओ मापदण्डयुक्त सुरक्षा आवास (सेवा केन्द्र) तत्काल स्थापना करेपर्ना कहल बा ।
सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारके वार्षिक नीति तथा कार्यक्रममे जिल्ला स्तरीय सुरक्षा आवास स्थापनाके लाग आवश्यक बजेट सुनिश्चित करेपर्ना । सुरक्षा आवास सञ्चालनके लाग अलगे पर्याप्त ओ नियमित बजेट विनियोजन करके दिगो व्यवस्थापनके सुनिश्चितता करे पर्ना कहल बा ।
हिंसासे प्रभावित व्यक्ति तथा बालिकाहे तत्काल उद्धार करके सुरक्षित आवासमे रख्न व्यवस्था करेपर्ना, हिंसाके कारण घरमे बैठना असुरक्षित हुइल प्रभावितहे सुरक्षित ओ गोपनीय वातावरण उपलब्ध करेपर्ना, जोखिम मूल्याङ्कनके आधारमे आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करेपर्ना कहल बा ।
बहु–निकाय समन्वय संयन्त्र निर्माण करेपर्ना, सुरक्षा आवासहे प्रभावकारी बनैना सामाजिक विकास मन्त्रालय, स्थानीय तह, जिल्ला प्रशासन कार्यालय, जिल्ला प्रहरी कार्यालय, स्वास्थ्य संस्था, ओसिएमसी, कानुनी सहायता प्रदायक संस्था, महिला मानव अधिकार रक्षक, नागरिक समाज तथा सम्बन्धित संघसंस्थाबीच प्रभावकारी समन्वय संयन्त्र निर्माण करेपर्ना कहल बा ।
सुरक्षा आवास सञ्चालनके लाग स्पष्ट कार्यविधि निर्माण करेपर्ना, सुरक्षा आवासमे प्रभावितहे प्रवेश करैना, बसाइ व्यवस्थापन कैना, सेवा प्रदान कैना, रेफर कैना तथा पुनःस्थापना कैना सम्बन्धमे स्पष्ट कार्यविधि÷मापदण्ड तयार करेपर्ना कहल बा ।
कैलाली जिल्लामे सुरक्षा आवास स्थापनाके विषयहे प्राथमिकतामे धारके समयबद्ध कार्ययोजना, बजेट तथा जिम्मेवार निकाय तोक्के तत्काल प्रक्रिया आघे बह्रेपर्ना कहल बा ।
सुरक्षा आवास स्थापनाके स्थान, संरचना, सेवा, बजेट, सञ्चालन मोडालिटी तथा व्यवस्थापन सम्बन्धमे सम्बन्धित सरकारी निकाय, स्थानीय तह, महिला मानव अधिकार रक्षक, नागरिक समाज तथा सेवा प्रदायक संस्थासँग तत्काल जिल्ला÷प्रदेशस्तरीय छलफल आयोजना करेपर्ना माग करल बा ।
सुरक्षा आवासमे अस्थायी संरक्षणपाछे प्रभावितहे दीगो रूपमे पुनःस्थापना कैना सीप विकास, शिक्षा, जीविकोपार्जन, रोजगारी तथा सामाजिक पुनःएकीकरणके कार्यक्रमसँग जोरना व्यवस्था करेपर्ना माग करल बा ।
प्रदेश सरकारसे घरेलु हिंसा (कसूर ओ सजाय) ऐन, २०६६ के दफा १२(१क) बमोजिम प्रदेश कानूनअनुसार सेवा कोष स्थापना करके सुरक्षा आवासके सञ्चालन तथा पीडितके संरक्षणके लाग आवश्यक आर्थिक स्रोत सुनिश्चित करेपर्ना माग करल बा ।
प्रदेशमे सञ्चालन हुइना सुरक्षा आवासके नियमित अनुगमन करके नेपाल सरकारके सुरक्षा आवास संचालन निर्देशिका ओ मापदण्ड अनुसार संचालनमे रहल सुरक्षा आवासहे केल्ह सेवा प्रवाह कैना अनुमति डेहे पर्ना कहल बा ।
सेवाके मूल्याङ्कन तथा सार्वजनिक जवाफदेहिता सुनिश्चित करटी पीडितहे सुरक्षित, सम्मानजनक ओ प्रभावकारी सेवा प्राप्त करल सुनिश्चित करेपर्ना माग करल बा ।
ध्यानाकर्षणपत्र सुदूरपश्चिम प्रदेश स्तरीय मानव अधिकार रक्षक संजालके संयोजक देवी खनाल, महिला मानव अधिकार रक्षक संयोजक अम्बिका भण्डारी, ओरेक कैलालीके जिल्ला संयोजक गीता चौधरी, इन्सेकके राजकुमार चौधरी, शान्ति स्थापना गृहके कैलासो रानालगायतसे ध्यानाकर्षणपत्र बुझाइल रहिट । उहे अवसरमे मन्त्री शर्मा यी माग सक्कु जानेक साझा रहल कहटी अपने गम्भीरताके साथ लेना बटैलै ।
