थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०२ कुँवार २६५०, शुक्कर ]
[ वि.सं २ आश्विन २०८३, शुक्रबार ]
[ 18 Sep 2026, Friday ]

जलवायु न्यायके लाग जन अभियान

पहुरा | २ आश्विन २०८३, शुक्रबार
जलवायु न्यायके लाग जन अभियान

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २ कुवाँर । जलवायु न्यायके लाग धनगढीमे जन अभियान सुरु हुइल बा ।
याक नेपाल, रेसिष्ट रिक्लाइम राइज अप, डब्लुवाईसिजे सुदूरपश्चिम प्रदेश, बोलन्य थली, डब्लुएचआर लगायत टमान संघ संस्थाके संयुक्त आयोजनामे जलवायु न्यायके लाग जन अभियान सुरु हुइल हो ।
उ अभियान अन्र्तगत धनगढीमे शुकके रोज हुइल कोणसभामे नेपाल कार्वन उत्सर्जन कबसे कम करल मने सबसे ढेर जालवायु परिवर्तनके असर यहाँ डेखल वक्ताहुक्रे बटैले रहिट । जेनजी समुहके गौरव खडका अपने रसुवा बाढ प्रभावित ठाउँमे गैल अनुभव सुनैटी उहाँ मानसिक भय पैदा हुइल बटैलै । बाढ प्रभावितके लाग जिन्सी राहत प्राप्त मात्रमे उठल कहटी राहात लेहुइया मने नैरहल खडका बटैलै ।
याक नेपालके अध्यक्ष ह्रिदय पुजारा नेपाल जलवायु न्याय पाइपर्ना बटैलै । उहाँ कहलै, छिमेकी राष्ट्रमे विकासके नाउँमे जलवायु प्रदुशनके कारण ओकर असर नेपालहे परल बा । जिहीसे यहाँ समय समयमे बाढी जन्य प्रकोप डेखल बा । भर्खर रसुवाहे आइल बाढसे अकल्पिनीय क्षति पुगाइल ।
गैर सरकारी संस्था महासंघके उपाध्यक्ष विनोद कडारा नेपाल शुन्य प्रतिशत कार्वन उत्सर्जन करल मने क्षति भर सबसे ढेर भोगे परल बटैलै । उहाँ ढेर कार्वन उत्सर्जन करुइयासे क्षति वेहोरेपर्ना बटैलै ।
किसान महासंघके प्रकाश थापा बाढ, पहिरो, डुबान, कटानसे सबसे ढेर मार किसान परल बटैलै । जलवायु परिवर्तनके सबसे ढेर असर कृषि क्षेत्रमे परल उहाँ बटैलै ।
कार्यक्रम पदम बहादुर साउदके अध्यक्षतामे हुइल रहे । उहाँ जलवायु न्यायके लाग अन्तर्राष्ट्रिय समुदायहे जवाफदेही बनैना युवा तथा नागरिक समाजके दवावमूलक परिचालन कैना उद्देश्यसे कोण सभाके आयोजना करल बटैलै ।
जलवायु परिवर्तन आज केवल वातावरणीय समस्या केल्ह नैहुके मानव जीवन, जीविकोपार्जन, अर्थतन्त्र खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पूर्वाधार ओ सामाजिक न्यायसँग प्रत्यक्ष जोरल विश्वव्यापी संकट बनल उहाँ बटैलै । जलवायु संकटके प्रभाव सक्कुहुनहे समान नैहो । जलवायु परिवर्तनमे न्यून योगदान करल तथा स्रोत ओ क्षमताके दृष्टिसे कमजोर समुदायसे यकर गम्भीर प्रभाव ढेर भोग्टी रहल बटैलै । संयुक्त राष्ट्रसंघके महासचिवसेफे जलवायु प्रभाव सबसे ढेर भोग्टी रहल देश तथा समुदायसे वित्तीय अवरोधसमेत सबसे ढेर सामना करटी रहल उल्लेख करले बटै ।
जलवायु न्याय, पर्याप्त तथा पहुँचयोग्य जलवायु वित्त, उत्सर्जन न्यूनीकरण तथा अन्तर्राष्ट्रिय जवाफदेहिताके माग करटी धनगढीमे युवा, बालबालिका, महिला, लैंगिक तथा यौनिक विविधता रहल व्यक्ति, अपाङ्गता हुइल व्यक्ति, नागरिक समाज तथा टमान सामाजिक क्षेत्रके प्रतिनिधिहुकनके सहभागितामे दबाबमूलक परिचालन, नाराबाजी, पोस्टर प्रदर्शन, कोणसभा तथा छलफल कार्यक्रम सम्पन्न करल बा ।
हम्रे स्पष्ट रूपमे कहे चाहठी जलवायु संकटके समाधान घोषणासे नाही, कार्यान्वयनसे हुई ।
जन अभियान कौनो एक देश वा कौना एक संस्थाविरुद्धके अभियान नैहो की जलवायु न्यायके लाग अन्तर्राष्ट्रिय जवाफदेहिता, सहयोग ओ कार्यान्वयनके माग हो ।
जन अभियानसे टमान मागसे ढरले बा । जलवायु वित्त पर्याप्त, पहुँचयोग्य, पारदर्शी ओ पूर्वानुमानयोग्य बनाईपर्ना कहल बा । वित्तीय स्रोत वास्तविक रूपमे जलवायु संकटसे प्रभावित समुदायसम हाली ओ सहज रूपमे पुग्न व्यवस्था करेपर्ना माग करल बा ।
जलवायु वित्तहे ऋणके थप बोझ बनैनासेफे आवश्यकता ओ न्यायके आधारमे ग्रायण्ड वेस सपोटहे प्राथमिकता डेहे पर्ना माग करल बा । उच्च उत्सर्जन कैना तथा ढेर स्रोत रहल देशसे उत्सर्जन न्यूनीकरणमे अपन जिम्मेवारीअनुसार महत्वाकांक्षी ओ तत्काल कदम चाले पर्ना माग करल बा । १.५ डिग्री तापक्रम सीमाहे जीवित रख्न करके विश्वव्यापी उत्सर्जन न्यूनीकरणहे तीव्र बनाई पर्ना माग करल बा ।
जलवायु निर्णय प्रक्रियामे युवा, महिला, बालबालिका, आदिवासी जनजाति, अपाङ्गता हुइल व्यक्ति, लैंगिक तथा यौनिक विविधता हुइल व्यक्ति ओ अन्य जोखिममे रहल समुदायके अर्थपूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करेपर्ना माग करल बा ।
संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा यूएनएफसीसीसी अन्तर्गतके संयन्त्रसे हुइल प्रतिवद्धताके कार्यान्वयन, वित्तीय प्रवाह ओ जवाफदेहिताहे आउर प्रभावकारी रूपमे अनुगमन करेपर्ना माग करल बा । जलवायु संकटसे प्रभावित विकासशील तथा उच्च जोखिममे रहल देशके आवाजहे अन्तर्राष्ट्रिय निर्णय प्रक्रियामे केन्द्रमे धारेपर्ना माग करल बा ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू