थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २१ माघ २६४९, मंगर ]
[ वि.सं २० माघ २०८२, मंगलवार ]
[ 03 Feb 2026, Tuesday ]

सम्पादकीय

मुक्तकमैया पुनर्स्थापनामे सरकारके उदासिनता कहे ?

मुक्तकमैया पुनर्स्थापनामे सरकारके उदासिनता कहे ?

मुक्त कमैयाहुकनके संख्यात्मक तथ्यांकसे शतप्रतिशत मुक्त कमैयाहुक्रे थारु जातिके रहल डेखाइठ । थारु जाति यी क्षेत्रके आदिवासी फेन हुइट । कमैया कना शब्द जमिन तथा खेतीपातीसंग सम्बन्धित बा । समयके एक कालखण्डमे हाल घना रुपमे बसोवास

पहुरा दैनिकके १८ बरसके यात्रा

कहठै एक ठो टेलुवा लगैना भारी बाट नाइहो उहीहे बह्रा पौह्राके जवान कैना बहुट मिहिनेत, समय ओ खर्च लागठ जत्र लगाईबेर मिहिनेत नइलागठ । ओस्टे आज एक ठो पत्रिकाके प्रकाशन सुुरु जेफे करे सेकठ मने उहीहे निरन्तरटा डेना भारी बाट हो । थारु
अनिकालमे बिया, महामारीमे ज्यान बचाई

अनिकालमे बिया, महामारीमे ज्यान बचाई

हम्रे अनलाइनमे हाजिर बाटी विश्वभर महामारीके रूपमे फैल्टी रहल कोरोना भाइरस (कोभिड–१९) के कारण पहुरा थारु दैनिकके प्रिन्ट संस्करण गैल चैत्र १२ गतेसे पाठक सामु पुगे नाइसेकल हो । कोरोना भाइरसके संक्रमणसे बाँचेक लाग प्रायः सक्कु देशमे