थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २३ अगहन २६४६, शुक्कर ]
[ वि.सं २३ मंसिर २०७९, शुक्रबार ]
[ 09 Dec 2022, Friday ]

कामके खोजीमे धमाधम शहर आइ लग्नै युवा

पहुरा | १ श्रावण २०७७, बिहीबार
कामके खोजीमे धमाधम शहर आइ लग्नै युवा

अविनाश चौधरी
धनगढी, १ सावन ।
कैलारी गाउँपालिका–७ के प्रदीपकुमार चौधरी विगतके बरस भारत जाके मजदुरी करिट । खेटुवा सेक्टी किल हरेक बरस मजदुरी करके पस्ना चुहाइल अनुभव उहाँक् संग बा ।

यी बरस भर उहाँ भारत नैजाके धनगढीमे मजदुरी करटी रहल बाटै । ‘कोरोना भाइरस व्यापक हुइटी रहल बेला भारतसे लौट्नु,’ प्रदीप कहलै । ‘गाउँमे धान लगाके ओराइल । धनगढी पुगके आब घर बनैना काम करटी रहल बाटुु ।’

ओहे गाउँपालिकाके मोहनपुर गाउँक् खोजराम चौधरी फेन धनगढीमे ज्यालादारीके काम करे भिरल बाटै । कोरोना महामारीके कारण कामके लागि भारत जैना सम्भव नैहुइलओरसे मजदुरी करे धनगढी आइल उहाँ बटैठै ।

‘चार पाँच बरस भारतमे जाके मजदुरी कर्नु,’ खोजराम कहलै– ‘अब तत्काल भारत जाइ सेक्ना सम्भव नाइ हो । ओहेकमारे घर खर्च जुटाइक लाग धनगढी अइनु ।’

प्रदीप ओ खोजराम किल नाई, कामके खोजीमे ढिउर युवाहुक्रे अब्बा धनगढी आई लागल बाटै । गाउँघरमे धान लगाके ओराइलपाछे फुर्सद्के समयमे रुप्या कमाइक लाग उहाँहुक्रे शहर केन्द्रीत हुई लागल बाटै ।

धान लगाके ओराइलपाछे कमाइक लाग विगतमे युवाशक्ति प्रायः भारतओहोर जैना करिट । यी बेला भारत जैना नेपालीहुकनके गौरीफन्टा नाकामे लम्मी लागे । मने, यी बरस नाका बन्द करगिल बा । याहोरसे, भारतओहोर जाइ नैडेगिल हो, बरु भारतमे रहल नेपालीहुक्रे स्वदेश फर्कन क्रम जारी बा ।

प्रदीप कहलै, ‘फरक अत्रही हो, गैल बरससम भारत जाके काम करगिल, यी बरस अप्ने देशमे काम करटु ।’

कोरोना प्रभावके कारण बेरोजगारी दर बह्रना सम्भावना बह्रल बेला स्वदेश फर्कल युवा कामके खोजीमे सहर पैठे लागल बाटै । रोपाइँ ओराइलपाछे उहाँहुक्रे समूह बनाके काम खोजे धनगढीओहोर आई लागल बाटै । जसिक, भारतओहोर जाइट । ‘गुजारा चलाइक लाग मजदुरी नैकरके सुख नैहो,’ प्रदीप कहलै, ‘फरक अत्रही हो, गैल बरससम भारत जाके काम करगिल, आब अप्ने देशमे काम करटुु ।’

धनगढीमे ज्यालादारी मजदुरीके कामबाहेक डोसर काम मिल्न बरा मुस्किल रहल युवाहुकनके कहाइ बा । कोरोना भाइरससे अर्थतन्त्र तहसनहस परल बेला ज्यालादारीके काम पैना फेन सहज नैरहल उहाँहुक्रे बटैठै । नियमित काम नैपाइलपाछे कौनो–कौनो दिन कोठैमे बैठेक् पर्र्ना बाध्यता आइल सुनैठै ।

कोभिड–१९ के प्रभावसे ढिउर मनै रोजगारी गुमैले बाटै । सुदूरपश्चिम प्रदेशमे किल एक लाखसे ढिउर मनै भारतसे स्वदेश फर्कल बाटै । उहाँहुक्रे सक्कु जे घरमे बैठल बाटै । ‘परदेशसे फर्कल मोर सक्कु भैयान्के घरमे बाटै,’ रामबहादुर चौधरी कहलै । ‘बरु, मजदुरी काहे नैरहे । मने, काम करेक लाग उहाँहुकन धनगढी आइक लाग कहले बाटुु ।’

खेतीपातीके काम सेकलपाछे मजदुरी करे अइना मनैनके संख्या बह्रलपाछे निर्माण कार्यके लाग मजदुर खोज्न खासे समस्या नैरहल घर निर्माणके ठेक्कापट्टाके काम करटी आइल धनगढीके सियाराम चौधरी बटैलै ।

‘बरु, पानी परलओरसे अब्बा नियमित काम हुई नैसेकल हो,’ उहाँ कहलै– ‘लकडाउनके क्रममे काम कर्र्ना कामदार पैना भर कर्रा नाइ हो ।’

जनाअवजको टिप्पणीहरू