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बटैं पालनमे जम्टी अकेला

पहुरा | २१ आश्विन २०७७, बुधबार
बटैं पालनमे जम्टी अकेला

सागर कुश्मी
बर्दिया, २१ कुवाँर ।
हरेक साहित्यिक कार्यक्रममे अपन गजल सुनाके थरुहटके पहिचान खोज्ना ठँरिया कुछ बरससे यहोंर टीनाटावन खेटी करटी आइल अझकल बटैंयाँ पालन करे भिरल बटैं ।

गेरुवा गाउँपालिका–६, लौरंगा बर्दियाके ३० बर्षिय ठँरिया साहित्यकार ठाकुर अकेला बटैंयाँ पालन ओर फाइदा डेखल ओरसे यहोंर लागल हुइँट । एमने मेहनत कम लग्ना, लालनपालन ओ विक्री वितरण कैना सजिल हुइलक् ओरसे फेन टिनाटावन खेती ढिलाके उहाँ बटैंयाँ पालन व्यवसाय ओर लागल हुइटैं । साहित्यकार ठाकुर अकेला कुछ बरससम खेटी किसानी संगे बचल समय टिनाटावन खेटी करटी आइल रहिंट । उहाँ गोभी, सागसब्जी, मिर्चा, टमाटर लगायतके खेटी करटी आइल रहिंट । मने गैल बरसके अगहनसे उहाँ बटैंयाँ, लोकल मुर्गी लगायत मच्छी पालन ओर लागल बटैं ।

‘बटैंयाँ पालन व्यवसाय कम लगानी ओ मेहनतसे ढेर फाइदा लेहे सेकजाइठ्’, उहाँ कहलै– ‘यिनहे बेंचक् लाग बजारके फेन खासे समस्या नैपरठ, ग्राहक अपनहे घर बैठे बटैंयाँ लेहे अइठंै ।’

गैल अगहनमे उहाँ प्रति बच्चा ६० रुप्याके दरसे १०० ठो बटैंयँक् बच्चा पालन सुरु करले रहिंट । बच्चा बार्हल ओरसे उहाँ प्रति जोरा ३५० रुपियाके दरसे बेंचटी आइल बटैं, कलेसे बटैंइक् प्रति आँरा १० रुपियामे विक्रि करल उहाँ जानकारी डेलंै ।

ओस्टेके उहाँ बटैंयाँ संगे लोकल मुर्गी फेन करिब ४० हजारके लगानीमे २ सय चिंग्नी खोरमे डारल रहिंट । मर्गी पालन फेन उहाँ अन्य व्यवसायसे सजिल रहल बटैलंै । एकर संगे बजारके फेन खासे समस्या नैरहल उहाँ बटैलंै । उहाँ बटैंयाँ ओ मुर्गी पालनसे खर्च कटाके एक बरसमे १ लाख पाँच हजारसम आम्दानी कैना सफल हुइल बटैं ।

एकरे संगे उहाँ मच्छी पालन व्यवसायहे फेन थप कैले बटंै । गैल बरस उहाँ ३० हजारके मच्छीक भुरा पोखरीमे डरले रहिंट । उहाँ मच्छी बेचके फेन कुछ आम्दानी कैना सफल हुइल रहिंट । टीनाटावन खेती ढिलाके यहोर लागल उहाँ बटैंयाँ पालन, लोकल मुर्गी ओ मच्छी पालनहे निरन्तरता डेना बटैलंै । बटैंयँक् माग ढेर बा मने ग्राहकके कहल अनुसार पुगाइ नैसेकल बटैलैं ।

अब्बे कोरोना कहरसे ढेर बेरोजगार युवा घरही बैठल बटंै । रहल रोजगार फेन उहाँहुक्रे गुमाके अब्बे घरमे खाली बैठे परल बा । कोरानो कहरसे विदेशमे रहल युवाहुक्रे फेन अपन घरही बैठे परल अवस्था बा । मने उहाँ उ युवाहुक्रनहे विदेशमे सिकल सीप स्वदेशमे उपयोग कैना सल्लाह डेटी रोजगार बने सेक्ना बटैठंै ।

ओस्टेके उहाँ केक्रोठन सीप नैहो कलेसे केक्रो सल्लाह सुझाव सहित कृषि खेती, बटैंयाँ पालन, मच्छी पालन, सुवर पालन, छेगरी पालन लगायतके कृषि ओर लग्ना सुझैठंै । उहाँ आघे कहठै– ‘विदेश नैजाके अपन गाउँठाउँमे कुछ कर्लेसे उहीसे ढेर पैसा कमाइ सेकजाइठ् । अपन घरदुवार फेन हेरे मिल्ना ओ व्यवसाय फेन करे सेक्ना,’ बटैंलैं ।

गजल बिधामे मजा पहिचान बनाके स्थापति हुइल साहित्यकार ठाकुर अकेला अझकल एक कृषकके रुपमे अपन फरक पहिचान बना सेकले बटैं । उहाँ–कहठैं,’ जिन्दगीमे कुछ कैना बा कलेसे अपन बारीमे पस्ना चुहाई, कब्बु फेन बेरोजगार बैठे नैपरि ।’ अब्बेक् खाली बैठल मनैं ठाकुरके जस्ते मेहनत करी अपने बारीम् सोन फराई सेक्जाई ।

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