थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत २७ बैशाख २६४५, सोम्मार ]
[ वि.सं २७ बैशाख २०७८, सोमबार ]
[ 10 May 2021, Monday ]
.

कविता

पहुरा | ११ बैशाख २०७८, शनिबार
  • 21
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    21
    Shares
कविता


कविता मोरिक संगीत नै हो गीत हो
पेशा मोरिक रहर नै हो बाध्यता हो ।

फूला जैसिन जोवन तुहाँर चढल बा जवानी
चाहे मै जैसिन रहुँ तुहु हुइतो मोर मनके रानी
छोडके नेंगठो भुट्लाटे भौरा गुनगुनैठै–२
भरल तोहार जवानी देख्के साराजे तडपठैं ।
गोहर गुलाबी गाल तोहार काहे मुक्सुरैठो ?
धसाक धसाक जिउ धरकाक काहे दुर दुर भग्ठो ?

तुह मोर गीत हुइतो तुह मोर संगीत,
यदि तु हाँ कबो ते हमार हुइजाई हित
हमार हुइजाई हित ।

धनगढी, कैलाली

  • 21
    Shares

जनाअवजको टिप्पणीहरू