थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १० सावन २६४५, अत्वार ]
[ वि.सं १० श्रावण २०७८, आईतवार ]
[ 25 Jul 2021, Sunday ]
‘ लघु खिस्सा ’

कुहिरा

पहुरा | ५ असार २०७८, शनिबार
कुहिरा

आझ आन्गुट्टी भिन्सह्रै रामुक निन खुलगिलीस । भर्खर पहिला चो मुर्गी बोलल बटैं । रानपरोस सारा शान्ट सुटल बाटै कहु चहल पहल नाई हो । यहोर ओहर करोट लेहट निन नाई परठ । मनमे टमाम बाट खेलैटी ऊ बुसेल्हम सानी खन्डरे लागठ । बलटल फट्कार हुईठ रामु अभिन सानी खन्डरटी रहठ टबै परोसी लौण्डा सिताराम हड्बडाईल आइठ ।

सिताराम– काकु काकु चलि हाली हमार बुडी हे बोक्सिन्या कैहके मोर बडाई ओ दिदी खुब पिटाटै बाबा घरे नाई हो बरापु जुन अउर पिटो कहटा ।

रामु हटपट उठठ् हट्टेरी ! यी कैसिन समाज हो हमार ? डुनियाँ कहाँसे कहाँ पुगगील यहाँ जुन डाईन बोक्सिन भुटप्रेटमे रोज झगरा झाँटी डेख्बो । पटा नि कब हमार थारू समाजसे यी कुहिरा फाटठ् ।

हेर भैया ऐसिक बैठके नाई बनी टुहरे लर्का सब जागे परि पर्ह लिखके हमार समाजमे रहल कुरिटी कुसंस्कार हटाई परी।यहाँ शोसन करूया अउर कोई नाई अपने मनै होईह । आझ टोर बुडीकमे ऐसिन बिटाट काल्ह टोर मोर डाईनमे बिटी । चल आझीसे ऐसिन कुरिटीक बहिस्कार करब गाउँक भल्मन्सा जुटाब छलफल करब नाई हुईटो पुलिस चौकीम मुड्डा डारब । टोर बडाई टो डोसरके बिटिया हुई टोर बरापु टो अपन जलम डेहल डाई हे ऐसिन करैना टो पुशसे गैल गुजरल मनै हो ।

जोशीपुर–५, सिमराना, कैलाली

साभारः फेसबुकसे

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