थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १९ अगहन २६४५, अत्वार ]
[ वि.सं १९ मंसिर २०७८, आईतवार ]
[ 05 Dec 2021, Sunday ]

दुई मुक्तक

पहुरा | ६ कार्तिक २०७८, शनिबार
दुई मुक्तक

१.
मोर मुटु, छाटिम् टोहाँर नाउँ लिखल बा ।
घरक् कोरै बाटिम् टोहाँर नाउँ लिखल बा ।

आझ टुँ चाहे जट्रा डुर जाके रमाउ ‘रच्चु’,
खटियक् सिरै पाटिम् टोहाँर नाउँ लिखल बा ।

२.
टोहाँर बिना रहे नैसेकम रच्चु ।
छातीक बट्ठा सहे नैसेकम रच्चु ।

पुर्खनके पस्नक् मोल खोजटुँ मै,
अक्केली कुछ करे नैसेकम रच्चु ।

धनगढी, कैलाली

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