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टीकापुर साहित्य महोत्सव

पहुरा | २५ चैत्र २०७९, शनिबार
टीकापुर साहित्य महोत्सव

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २५ चैत ।
कैलालीके टीकापुरमे तीनदिने टीकापुर साहित्य महोत्सव सुरु हुइल बा । शनिच्चर सकारेसे टीकापुर साहित्य समाजके आयोजनामे महोत्सव सुरु हुइल हो ।

शनिच्चरसे सुरु हुइल महोत्सव सोम्मारसम चल्ना ओ टमान विषयमे विमर्श हुइना समाजके अध्यक्षसमेत रहल साहित्यकार महेशविक्रम शााह जानकारी डेलै । महोत्सवके पहिल दिन लेखक सीके लाल ‘साहित्यमार्फत सामाजिक सद्भाव’ शीर्षकउपर विद्वत प्रवचन डेहल रहिट । डुसरा सत्रमे साहित्य काहे लिख्ना ? काहे पह्रना कना विषयमे चलल् रहे । डुसरा सत्रमे साहित्यकार केशव दाहाल, बुद्धिसागर ओ शिवानी सिंह थारु ओ सहजीकरण दीपक सापकोटा करल रहिट ।

महोत्सवमे टिसरा सत्रमे बैकिनीके आँसुमे डुबठ्, सुदूरपश्चिमके धर्ती विषयमे उमा बादी, उन्नति चौधरी ओ कल्पना भट्ट बीच छलफल हुइल रहे । ओकर सहजीकरण बरिष्ठ पत्रकार आरती चटौत करल रही ।

चौथो सत्र नयनराज पाण्डे, अमर न्यौपाने ओ उमा सुवेदीबीच यज्ञशके सहजीकरणमे पाठकके रोजइमे उपन्यास काहे ? कना विषयमे केन्द्रीत रहल रहे । पाचौँ सत्रमे आख्यानमे पहिचानके मुद्दा विषयमे हुइल रहे । जेम्ने् अर्चना थापा, फूलमान वल ओ राजेन्द्र विमलके विच छलफल हुइल रहे । पाचौँ सत्रहे गुरुङ सुशान्त सहजीकरण करल रहिट ।

कार्यक्रमके छैठौ सत्रमे गद्यकविताके शक्तिके विषयमे हुइल रहे । गद्यकविताके शक्तिबारे श्रवण मुकारुङ, सरिता तिवारी ओ निभा शाहबीच हुइल रहे । गद्यकविताबारे कार्यक्रम नविन अभिलाषी सहजीकरण करल रहिट । सातौँ सत्रमे घनश्याम खड्काके सहजीकरणमे डगरा बिस्राइल आजके शिक्षाबारे हुइल रहे । ओम्ने डाक्टर सञ्जीव उप्रेती, प्रा. डा. भारती जोशीबीच छलफल हुइल रहे ।

५ बजेपाछे कार्यक्रममे काव्य सन्ध्या आयोजना हुइल रहे । काव्य सन्ध्याके सहजीकरण साहित्यकार अशोक बोहरा असीम पीडा करल रहिट । महोत्सवमे नेपाली भाषा, साहित्यके साथे सुदूरपश्चिम प्रदेशके कला, संस्कृति, पर्यटन, इतिहास, दर्शन, पुरातत्व, सम्पदा ओ सामाजिक विकासके समग्र पक्षबारे हरेक दिन सातठो सहित २१ सत्र सञ्चालन हुइना बावै । महोत्सवके तीनु दिन गजलसन्ध्या, काव्यसन्ध्या, सङ्गीतसन्ध्या सञ्चालन करजैना फेन आयोजक जनैले बा ।

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