थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०५ असार २६४८, मंगर ]
[ वि.सं ५ असार २०८१, मंगलवार ]
[ 18 Jun 2024, Tuesday ]
‘ सम्पादकीय ’

आदिवासी जनजातिके अधिकार कहाँ ?

पहुरा | २२ श्रावण २०८०, सोमबार
आदिवासी जनजातिके अधिकार कहाँ ?

२९औं विश्व आदिवासी दिवस, आदिवासी जनजातिके वर्तमान अवस्था ओ प्रत्येक वर्ष अगस्त ९ अर्थात सावन २४ के दिनहे विश्व आदिवासी दिवसके रूपमे मनैना करजाइठ । यी वर्ष ९ अगस्त सन २०२३ अर्थात वि.स. २०८० साल सावन २४ गतेके दिन विश्व भरके आदिवासी जनजातिहुक्रे मनाई लागल यी २९औ विश्व आदिवासी दिवस हो । यी दिवस संयुक्त राष्ट्र संघके आह्वानमे विश्वभरके आदिवासी जनजातिहुक्रे सन् १९९५ से विश्व अधिकार दिवस या पर्वके रुपमे मनैटी आइल बटै । नेपालमे यहाँके आदिवासी जनजातिहुक्रे सन १९९३ से यी दिवस मनैना सुख्यात करल हुइट । यी दिवस मनैनाके मुख्य उद्देश्य विश्व भूमण्डलीकरण, आधुनिकीकरण, निजीकरण, खुला बजारमुखी अर्थ प्रणाली, वातावरणीय ह्रास ओ विस्थापनसे विश्वभरके आदिवासी जनजातिहुकनके सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक ओ भौतिक जीवनमे परटी रहल प्रतिकूल असरसे ओइनहे बचैना विकास कैना थप अधिकार प्राप्त कैना, पहिचान तथा भाषा संस्कृतिके संरक्षण ÷ संवर्द्धन कैना हो । अर्थात यी प्राप्त उपलब्धी ओ अधिकारके सहि उपयोग, थप अधिकारके पहिचान ओ प्राप्तीके लाग जागरण स्वरुप मनैना संघर्ष दिवस हो ।

संयुक्त राष्ट्र संघके पछिल्का तथ्यांङक अनुसार विश्वभरि आदिवासी जनजातिके जनसख्या ५० करोड पुगल बा । यी कहल विश्व जनसख्याके ६.२ प्रतिशत हो एसियामे कुल जनसंख्याके ७५ प्रतिशत आदिवासी जनजातिके घनत्व बा । विश्वके २० देशमे बसोवास कैना ५००० से ढेर समुदायके यी आदिवासी जनजाति भाषा, संस्कृति, परम्परागत ज्ञान तथा प्राकृतिक स्रोतके धनी समुदाय मानजैठै । मने राज्य शक्तिके स्रोत साधन ओ पहुँचके हिसाबसे अइने संसारके सबसे उत्पीडित ओ विपन्न वर्ग समुदायमे परठै । अइने शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आधारभूत सेवा सुविधासे समेत बञ्चित बटै । विश्व राजनितीमे आइल पछिल्का फेरबदल ओ परिवर्तनसे आदिवासी जनजातिमेफे एक खालके जागरण पैदा हुइल ओ टमान देशमे आदिवासी जनजाति आन्दोलन उठे लागल ओ उठल । मुलत विश्व राजनीतिमे उदाइल समाजवादी लहर ओ उ साभियत संघ हालके रुस लगाएतके देशममे प्राप्त जातीय आत्मनिर्णयके अधिकार ओ स्वशासनके मुद्दासे विश्वमे नयाँ तरंग ओ जागरण नानल । यिहीसे विश्वके कैयौं देशमे स्वशासनके आन्दोलन उठ्ल ओ मौजाद सत्ताके विरुद्ध धावा बोल्न अवस्था आइल । अन्तर्राष्ट्रिय श्रम संगठन (आइएलओ) से फे संसारमे सबसे ढेर जोखिम पूर्ण श्रममे आदिवासी जनजाति बटै कना निष्कर्ष निकर्ना विवस हुइल ओ आइएलओ १६९ अभिसन्धी पारित कैना बाध्य हुइल ।

नेपालमे आदिवासी जनजातिके आन्दोलनके मुख्य माग कहल पहिचान ओ स्वशासनसहितके संघीयता हो । नेपालमे वास्तवमे कना हो कलेसे पहिचान सहितके संघियताके मुद्दा ओ माग आदिवासी जनजाति ओ मधेसीसे उठाइल हुइट । मने विडम्बना पहिचान ओ स्वशासन टे ढेर दुरके बाट हुसेकल आन्दोलनसे प्राप्त करल सिमित कानूनी ओ संवैधानिक अधिकारफे कागजी दस्तावेज ओ सम्झौता पत्रमे केल सिमित बा । पहिल संविधान सभापाछे आदिवासी जनजाति आन्दोलन कमजोर हुइटी ओ नीति निर्माण तहमे पहुँच सेक्टी गैलपाछे २०६३ के अन्तिम संबिधानसे २०७२ के संविधान पचगामी ओ आदिवासी जनजाति विराधी बनल । जिहीसे अब्बे आदिवासी जनजातिप्रति राज्यसे कैना जातीय, भाषिक, धार्मिक, सांस्कृतिक विभेदके पुराने पुनरावृति हुइल बा । आदिवासी जनजातिसे मागल जातीय पहिचानसहितके संघीयता ओ प्राप्त नइहुइल संविधान समेत समावशी हुई नइसेकल हो ।

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