थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०९ जेठ २६५०, शनिच्चर ]
[ वि.सं ९ जेष्ठ २०८३, शनिबार ]
[ 23 May 2026, Saturday ]

प्यारो रुपल्लि

पहुरा | ९ जेष्ठ २०८३, शनिबार
प्यारो रुपल्लि

मोर जन्मभुमी ,प्यारो रुपल्ली
वसन्त ऋतुके कोखमे जन्मनु
कोइलीके कुहु सुन्नु
ढुकुरके मधुर बोली सुन्नु
कोपिला फक्रल डेख्नु
पुर्णिमा के चन्द्र डेख्नु
हो महीहे टबमारे वसन्त मन परठ
वसन्तके सुबास मन परठ
प्यारो रुपल्ली !
तोहार वक्षस्थलमे मै पाइला टेक्नु
मोर आगन हसिलो हुइल
हसिलो आगन
मोर खेल्न मैदान हुइल
स्वच्छ हावा, कुवाके पानी खैनु ।
प्यारो रुपल्ली !
तोहार पवित्र माटीमे
लडिबुडि करनु लुटिपुटि खेल्नु
पाइला टेक्न सिख्के, नेंग्ना सिख्नु
तोहार माटीक सुगन्ध मोर शरीरमे ओस्टे बा ।
प्यारो रुपल्ली !
तोहर आगन अब्बे खाली बा
खाली आगन असरा लग्टी बा
खाली घर बेसहारा बटै
उ बुन्ढुनिके चौतारी
थकित भरियाके खोजीमे बा
उ गोरेटो गोठालो के खोजीमे बा
प्यारो रुपल्ली !
टु ऐक्केली हुइलो
मै अक्केली हुइनु ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू