फोहोरसे मोहर बनैटी धनगढी
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २६ असार । धनगढीमे कुछ बरस आघेसम व्यवस्थापन कैना बरवार समस्याके रूपमे रहल नगरसे संकलन हुइना फोहोरमैला आजकल आम्दानीके स्रोत बनल बा ।
धनगढी उपमहानगरसे फोहोरसे वार्षिक ७५ लाख रुपैयाँ हाराहारी आम्दानी करटी रहल बा । नगर क्षेत्रसे संकलित फोहोर वर्गीकरण कैके पुनः प्रयोग करे मिल्ना फोहोरहे बिक्री करे लागलपाछे आम्दानीके स्रोत बनल हो । धनगढी उपमहानगर–२ , मे फोहोरमैला सूक्ष्म वर्गीकरण केन्द्र स्थापना हुइल बा ।
करिब तीन बसरआघे सञ्चालनमे लानल केन्द्रमे संकलित फोहोरहे राखके पुनः प्रयोग करे मिल्ना ओ नैमिल्ना तथा कुहना ओ नैकुहना फोहोर वर्गीकरण करजाइठ् । प्लास्टिकजन्य, कागज, गत्तालगायत पुनः प्रयोग करे मिल्ना फोहोरहे वर्गीकरण कैके बिक्री कैना करल बा । इहीसे फोहोर व्यवस्थापनमे समेत उपमहानगरहे सहज हुइल बा ।
उपमहानगरसे ठेक्कामार्फत फोहोर संकलन ओ वर्गीकरण करटी रहल बा । फोहोर संकलन ओ वर्गीकरण करक लाग पाँच बरसके लाग नन्दादेवी सेवा केन्द्र ठेक्का लेले बा । कम्पनीसे धनगढीके १९ वडामध्ये बजार क्षेत्र ओ बजारआसपासके नौ वडासे दैनिक फोहोर संकलन कैटी आइल बा ।
नन्दादेवी सेवाके सहसञ्चालक अनिल शाही वर्गीकरण करल फोहोर विराटनगर, वीरगन्ज, चितवनलगायत ठाउँके व्यापारी किनके लैजैना करल जानकारी डेलै । ‘पुनः प्रयोग करे मिल्ना पानीके बोतल, गत्ता, प्लास्टिकके झिल्ली तथा पेय पदार्थके प्लास्टिकके बोतललगायत फोहोरहे ओकर आयतन घटाइक लाग मेसिनमे दबाके बोरामे ढरठी,’ उहाँ क्हलै, ‘अइसीक वर्गीकरण करल फोहोर बिक्री कैना फेन समस्या नैहो ।’
फोहोर वर्गीकरण करे लागलपाछे उपमहानगरके आम्दानीके स्रोत किल बनल नैहो, वर्गीकरण केन्द्रमे स्थानीय रोजगारी समेत पैले बटै ।
सञ्चालक शाहके अनुसार फोहोर संकलन ओ वर्गीकरणमे अब्बे १४७ जाने काम करटी रहल बटै । विगतमे नगरसे संकलित फोहोर व्यवस्थापन बरवार चुनौती रहे । फोहोर वर्गीकरण कैके बिक्री करे लागलपाछे व्यवस्थापन कैना ढेर हदसम सहज हुइल उपमहानगरके वातावरण, खानेपानी तथा सरसफाइ शाखाके प्रमुख अशोक अवस्थी बटैलै । ‘फोहोर कहाँ व्यवस्थापन कैना कना समस्या अब्बे फेन बा, मने पहिलेक जैसिन सक्कु फोहोर व्यवस्थापन करे नैपरठ्,’ उहाँ कहलै ।
नगरके फोहोर संकलन तथा वर्गीकरणके लाग सावन ०८१ मा नन्दादेवीसँग वार्षिक ७१ लाख रुपैयाँमे सम्झौता हुइल अवस्थी बटैलै । सम्झौताअनुसार उक्त कम्पनीसे हरेक बरस बह्रल रकममे १० प्रतिशत थप कैके उपमहानगरहे बुझाइ परठ् । सुरुके बरस ७१ लाखमे सम्झौता हुइलमे इ बरस बह्रके नन्दादेवी उपमहानगरहे बुझाइ पर्ना रकम ८९ लाख पुगल शाखा प्रमुख अवस्थी जानकारी डेलै ।
ओहकान अनुसार उपमहानगर क्षेत्रसे दैनिक २१ देखि २५ टनसम फोहोर संकलन हुइटी आइल बा । वर्गीकरण करे लागलपाछे उपमहानगरहे फोहोर संकलनके भार घटल बा ।
‘सिसा, कतिपय प्लास्टिकलगायत फोहोर व्यवस्थापन कैना अब्बे फेन समस्या बा,’ अवस्थी कहलै । उपमहानगरके १९ मध्ये नौ वडासे दैनिक फोहोर संकलन हुइना करठ् कलेसे बाँकी कतिपय वडामे साप्ताहिक ओ ग्रामीण क्षेत्रके कुछ स्थानीयस्तरमे हुइना सरसफाइ कार्यक्रममे क्रममे फोहोर संकलन करजाइठ् । घरघरसे भान्साजन्य कुहना फोहोर ओ प्लास्टिकजन्य नैकुहना फोहोर अलग–अलग लन्ना करल कम्पनी जनैले बा ।
यकर साथे उपमहानगरसे स्थानीय टोलविकास समिति, महिला समूह, विद्यालय, सामाजिक संघसंस्थामार्फत टोलटोलमे सरसफाइ अभियान फेन सञ्चालन कैटी आइल बा । उपमहानगरसे धनगढीमे पोलिथिन प्रयोगमे फेन प्रतिबन्ध लगाइल बा । ओस्टके, बजार क्षेत्रमे जभाभावी फोहोर फेँकल पाइलमे जरिवाना कैना करल बा ।
उपमहानगरपालिकाके प्रमुख गोपाल हमाल अब्बे पुनः प्रयोगमे लाने नैसेकल कतिपय प्लास्टिक गलैना ओ टुक्रा पारके पुनः प्रयोगमे लानक लाग एसियाली विकास बैंक ओ उपमहानगरके साझेदारीमे काम हुइटी रहल जानकारी डेलै । वर्गीकरण केन्द्रसँगे संरचना निर्माण कैके प्लास्टिक गलैना ओ टुक्रा पर्ना मेसिन जडान कैके प्रयोगमे लन्ना तयारी रहल बा । मल्टिलेयर प्लास्टिक चाउचाउ, बिस्कुट आदिके खोल फोहोर व्यवस्थापनमे अब्बे फेन समस्या रहल नगर प्रमुख हमाल बटैलै ।
धनगढी– ७, पटेलामे निर्माण हुइटी रहल एकीकृत फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र सञ्चालनमे अइलेसे फोहोर व्यवस्थापनमे सहज हुइना उपमहानगर जनैले बा । संघीय सरकारके क्षेत्रीय सहरी विकास आयोजनाअन्तर्गत एसियाली विकास बैंकके सहयोगमे भ्याटबाहेक ९६ करोडके लागतमे फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण करल हो । अब्बे उक्त केन्द्र सञ्चालनके मोडालिटीसे छलफल हुइटी रहल उपमहानगर जनैले बा ।
