थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १६ सावन २६५०, शनिच्चर ]
[ वि.सं १६ श्रावण २०८३, शनिबार ]
[ 01 Aug 2026, Saturday ]

महिलाउप्पर घरेलु हिँसा बह्रटी क्रममे

पहुरा | १६ श्रावण २०८३, शनिबार
महिलाउप्पर घरेलु हिँसा बह्रटी क्रममे

पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १६ सावन । सुदूरपश्चिम प्रदेशमे घरेलु हिंसाके घटना बह्रटी क्रममे रहल डेखल बा ।

महिला पुनस्र्थापना केन्द्र (ओरेक) के विश्लेषणअनुसार सुदूरपश्चिम प्रदेशके टमान जिल्लामे अप्रिलसे जुन २०२६ सम महिला तथा किशोरीउप्पर हुइल हिंसाके घटनाके विश्लेषण करटी सार्वजनिक करल त्रैमासिक तथ्यांकमे महिला हिंसा बह्रल डेखल ओरेकके प्रदेश संयोजक सपना थापा बटैली ।

घरेलु हिंसा व्यक्तिगत वा पारिवारिक विवादके परिणाम केल्ह नैहुके पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, लैङ्गिक असमानता, महिलाके आर्थिक परनिर्भरता, न्यायमे सीमित पहुँच, निर्णय कैना अधिकारउप्परके नियन्त्रण, स्रोत तथा अवसरमे असमान पहुँच ओ दण्डहीनताके संस्कृतिसंग जोरल संरचनागत समस्या हो ।

नेपालके संविधान तथा घरेलु हिंसा (कसुर तथा सजाय) ऐन, २०६६ से घरेलु हिंसाहे दण्डनीय अपराधके रूपमे परिभाषित करलेसेफे व्यवहारमे मिलापत्रहे प्राथमिकता डेना प्रवृत्तिसे पीडित महिलाके न्यायमे पहुँच कमजोर बनैटी रहल बा । बालविवाह, लैङ्गिक विभेद, हानिकारक सामाजिक तथा सांस्कृतिक अभ्यास, सीमित शैक्षिक तथा आर्थिक अवसर, सुरक्षित बसोबासके अभाव ओ पारिवारिक–सामाजिक दबाबसे हिंसाके चक्रहे निरन्तरता डेटी रहल उहाँ जनैली ।

महिला तथा किशोरीउप्परके हिंसाहे मानव अधिकार, सामाजिक न्याय ओ कानुनी शासनसँग जोरल गम्भीर सार्वजनिक सरोकारके रूपमे सम्बोधन कैना अपरिहार्य रहल बटैली ।

अप्रिलसे जुन, २०२६ समके अवधिमे सुदूरपश्चिम प्रदेशके जिल्लासे अभिलेख हुइल कुल ७४ हिंसा मध्ये घरेलु हिंसा ५४ ठो (७३.० प्रतिशत), सामाजिक हिँसा ४ ठो (५.४ प्रतिशत) यौनजन्य हिंसा १० ठो (१३.५ प्रतिशत), बेचबिखन १ ठो (१.४ प्रतिशत), साइबर अपराध २ ठो (२.७ प्रतिशत), अन्य ३ ठो (४.१ प्रतिशत)रहल पाइल बा । जिल्लागत रुपमे हेर्ना हो कलेसे, कैलालीसे ५९ ठो, कञ्चनपुरसे ३ ठो, डोटीसे १० ठो, बाजुरासे १ ठो ओ अन्य ठाँउसे (झापा) १ ठो हिंसाके घटना अभिलेख हुइल बटै । उ तथ्यांकहे वैवाहिक अवस्था अनुसार बिश्लेषण गर्दा, ८७.८ प्रतिशत विवाहित, १०.८ प्रतिशत अबिबाहित ओ १.४ प्रतिशत एकल महिलासे घरेलु हिँसा खेपल डेखल बा ।

प्रतिनिधिमुलक घटनामे निर्मला (परिवर्तित नाम) से १९ वर्षके उमेरमे भोज करली । सुरुके कुछ वर्ष दाम्पत्य जीवन सामान्य रहलेसेफे पछिल्का तीन वर्षसे गोसिया कुलतमे फसलपाछे उहाँ उप्पर घरेलु हिंसा निरन्तर बह्रटी गैल । ज्याला मजदुरी करके परिवार चलैटी आइल निर्मला गोसियासे गालीगलौज, कुटपिट, चरित्रउप्पर शंका, आर्थिक बेवास्ता, मानसिक यातना ओ जबरजस्ती यौन हिंसा सहे परल । हिंसा उहाँमे केल्ह सीमित नैरहल, छावा छाई उप्पर समेत कुटपिट ओ घाँटी थिच्न जैसिन हिंसात्मक व्यवहार हुई लागलपाछे परिवार असुरक्षित बनल । अपने ओ छाईहुक्रे उप्परके अत्याचार सहन नैसेक्के कानुनी सहयोगके लाग जिल्ला ओसीएमसी डोटी पुग्ली । ओसीएमसीसे मनोविमर्श सेवा ओ सम्बन्ध विच्छेद प्रक्रियाबारे परामर्श पाइलपाछे उहाँ हिंसामुक्त ओ सुरक्षित जीवनके लाग कानुनी प्रक्रिया आघे बह्रैना तयारीमे बटै ।

ओस्टेक करके पार्वती पुन (परिवर्तित नाम), से १८ वर्षके उमेरमे प्रेम विवाह करल रहिट । अन्तर्जातीय बिबाह करल पुनके सुरुके कुछ वर्ष दाम्पत्य जीवन सामान्य रहलेसफे पछिल्ला तीन वर्षस गोसिया कुलतमे फसलपाछे उहाँ उप्पर निरन्तर घरेलु हिंसा हुई लागल ।

ज्याला मजदुरी करके परिवार चलैटी आइल पार्वती गोसियासे गालीगलौज, कुटपिट, चरित्रउप्पर शंका, आर्थिक बेवास्ता ओ मानसिक यातना सहे परल । पाछे उहाँ उप्पर जबर्जस्ती यौन सम्पर्क कैना बाध्य पर्ना यौन हिंसा समेत हुई लागल ।

हिंसा असह्य हुई लागलपाछे उहाँ जिल्ला ओसीएमसी डोटीमे कानुनी सहयोगके लाग गैली । ओसीएमसीसे मनोविमर्श सेवा, कानुनी परामर्श तथा सम्बन्ध विच्छेद प्रक्रियाबारे जानकारी प्राप्त करलपाछे उहाँ सुरक्षित ओर हिंसामुक्त जीवनके लाग आवश्यक कानुनी प्रक्रिया आघे बह्रैना तयारीमे बटै ।

ओस्टेक करके पबी (परिवर्तित नाम) से १८ वर्षके उमेरमे नेपाली सेनामे कार्यरत जवानसंग भागके भोज करल रहिट । उहाँक गोसियासे सुरुके वर्षमे परिवारके जिम्मेवारी निर्वाह करटी आइल रहिट । मने समयसँगे उहाँक गोसिनीय ओ दुई छाईहे बेवास्ता करे लग्लै, घर आई छोरलै ओ सम्बन्ध विच्छेदके लाग निरन्तर दबाब डेहे लग्लै । नागरिकता ओ विवाह दर्ताजैसिन कागजातसमेत नुकाडेके पबीहे कानुनी प्रक्रियासे वञ्चित कैना प्रयास समेत करलै । चरम आर्थिक अभावके बीच सिलाई–कटाई करके छाईनके पालनपोषण करटी रहल पबी विरुद्ध, प्रतिवाद करे नैसेकिट कना उद्देश्यसे स्थाई बसोबास कंचनपुर जिल्लामे हुइलेसेफे काठमाडौं जिल्ला अदालतमे सम्बन्धविच्छेदके मुद्दा दायर करल रही ।

अदालतके १५ दिन भिटर हाजिर हुइना पत्र पाइलपाछे उहाँ प्रतिउत्तरके लाग कानुनी प्रक्रियाबारे जानकारी लेना ओरेकके सम्पर्कमे पुगल रहिट । हाल ओरेक मार्फत आवश्यक कानुनी प्रक्रिया ओ खर्च जुटाके प्रतिउत्तर लौटैली ।

यी त्रैमासिक अवधिमे दस्तावेजीकरण हुइल प्रतिनिधिमूलक घटना हुइट जिहीसे सुदूरपश्चिम प्रदेशमे महिला तथा किशोरीउप्परहुइना हिंसाके गम्भीर अवस्थाहे उजागर करल बा । अप्रिलसे जुन २०२६ सम ओरेकमे दस्तावेजीकृत कुल लैङ्गिक हिंसाके घटनामध्ये ७३ प्रतिशत घरेलु हिंसाके घटना हुइना महिलाके लाग सबसे सुरक्षित मन्ना घर हिंसाके प्रमुख स्थल बन्टी गैल स्पष्ट संकेत हो ।

यिहीसे महिला तथा किशोरीहुक्रे अपने घरभिटर शारीरिक, मानसिक, यौन तथा आर्थिक हिंसाके उच्च जोखिममे रहल केल्ह नाही, पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनामे विद्यमान असमान शक्ति सम्बन्ध, महिलाउप्परके नियन्त्रण ओ विभेदपूर्ण सामाजिक मान्यतासे घरेलु हिंसाहे निरन्तरता डेटी रहल गम्भीर यथार्थहे समेत उजागर करठ ।
नेपालमे घरेलु हिंसाविरुद्ध स्पष्ट कानुनी व्यवस्था हुइलेसफे मिलापत्रहे प्राथमिकता डेना अभ्यास, दण्डहीनता तथा न्यायमे सीमित पहुँचके कारण महिलास प्रभावकारी न्याय प्राप्त करे सेकल नैहुइट ।

“घरके झगडा पैरक आगी“ कना सोच, परिवारके प्रतिष्ठाके नाममे हिंसा सहेपर्ना सामाजिक दबाब ओ आर्थिक परनिर्भरतासे हिंसाहे सामान्यीकरण करटी आइल बा । सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रहरीके तथ्याङ्कअनुसार आर्थिक वर्ष २०८०÷०८१ मे १,२१२ घटना दर्ता, १०८१ मिलापत्र, आ. व ०८१÷०८२ मे १,१९४ घटना दर्ता ८६२ मिलापत्र, साथे आ. व. ०८२÷०८३ के फागुन मसान्तसम ७३७ घटना दर्ता मध्ये ५८२ ठो मिलापत्र हुइल डेखाइठ । “घरके झगडा पैरक आगी“ कना सामाजिक सोच, परिवारके इज्जत जोगैना दबाब, आर्थिक परनिर्भरता, बालबालिकाके भविष्यप्रतिके चिन्ता तथा मेलमिलापके संस्कृतिके कारण ढेर घटना औपचारिक रूपमे दर्ता नैहुइना हुइल ओरसे वास्तविक अवस्था अझ गम्भीर हुइए सेक्ना डेखजाइठ । टबमारे घरेलु हिंसाहे निजी वा पारिवारिक विवादके रूपमे नाही, मानव अधिकारके गम्भीर उल्लङ्घन तथा सामाजिक न्यायके प्रश्नमे रूपमे सम्बोधन कैना अपरिहार्य रहल कहल बा ।

घरेलु हिंसाके दीर्घकालीन अन्त्यके लाग पितृसत्तात्मक तथा विभेदकारी सामाजिक संरचना, असमान शक्ति सम्बन्ध ओ महिलाहे हेर्ना विभेदपूर्ण सोचमे रूपान्तरण आवश्यक बा । साथे, कानुनके प्रभावकारी कार्यान्वयन, दण्डहीनताके अन्त्य, पीडित तथा प्रभावितमैत्री न्याय प्रणालीके सुनिश्चितता, संघ, प्रदेश ओ स्थानीय सरकारबीचके प्रभावकारी समन्वय तथा समुदाय तहसे सचेतना, प्रतिरोध ओ सामाजिक रूपान्तरणके अभियानहे सशक्त रूपमे आघे बह्रैना आजके अपरिहार्य आवश्यकता रहल ओरेक सुदूरपश्चिम प्रदेश संयोजक सपना थापा बटैली ।

जनाअवजको टिप्पणीहरू