दुई मुक्तक
पहुरा |
१६ श्रावण २०७८, शनिबार

१.
बुट्टा फुन्ना लेहङगा छलकल, फरिया मन परल
ठुमुक ठुमुक नेङगना गोरी,करिया मन परल
मन परल आँखी गरल, तोहार चालडाल मे
छैली आके कहो तु,तुहिन कोन ठरिया मन परल ।।
२.
पुठठम गोनिया छड्के, तुना चोली मनपरल
सुतिया मंगिया तरकी सपरल, टोली मनपरल
छलको छलको हसती नेङगलो, मन भहराइल
छड्के नजर मीठ तोहार, बोली मनपरल ।।
कैलारी, बैजपुर (हालः धनगढी, कैलाली)
