फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण अन्तिम चरणमे
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १९ सावन । कैलालीके धनगढीमे आधुनिक फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण अन्तिम चरणमे पुगल बा । दैनिक २२ टन फोहोर व्यवस्थापन करे सेकजैना एकीकृत फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्रके काम अन्तिम चरणमे पुगल हो । धनगढी उपमहानगरपालिका–७ स्थित पटेला सामुदायिक वनक्षेत्रके २२ हेक्टर जमिनमे उ केन्द्र निर्माण हुइटी रहल बा । फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माणके भौतिक प्रगति ९२ प्रतिशत पुगल इन्जिनियर अशोक पाण्डेय जानकारी डेलै ।
उहाँके अनुसार अब डेढ प्रतिशत जटरा तटबन्धन निर्माण, पाँच प्रतिशत ट्रस लगैना ओ फोहोर बोक्ना गाडी खरिद बाँकी रहल बा । बाँकी रहल आठ प्रतिशत काम तीन महिनाभिटरे पूरा हुइना उहाँ बटैलै । इन्जिनियर पाण्डेय कहलै, “बाँकी काम पूरा हुइलपाछे प्रमाणीकरण कैके डसैँसे अगही वा डसैँसे पाछे फोहोरमैला व्यवस्थापनके काम सुरु हुइ सेकी ।”
क्षेत्रीय सहरी विकास आयोजना अन्तर्गत एसियाली विकास बैङ्क (एडिबी) के सहयोगमे बन्टी रहल फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माणके लाग दुई हजार ६०३ रुख्वा काटल रहे ।
चीनके सिचुवान प्रोभिन्स जियोलोजिकल इन्जिनियरिङ कम्प्लेक्ससे करिब ९६ करोड रुपियाँ लागतमे फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण करटी रहल बा । २०२४ अप्रिलमे ठेक्का होके फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण सुरु करल रहे । २०२६ अप्रिलसम निर्माण समायवधि टोकल रलेसे फेन थप कामके भेरिएसन प्रमाणीकरण हुइलपाछे छ महिना म्याद थप करल बा । अक्टोबरसम निर्माण समायवधि रहल इन्जिनियर पाण्डे उल्लेख करलै ।
फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्रमे पुनः प्रयोग हुइना, कुहना ओ प्रयोगहीन (नैकुहना न बिक्री हुइना) कैके तीन तरिकासे फोहोर छुट्याके व्यवस्थापन कैना जनाइल बा । दिसाजन्य फोहोरहे छुट्टे रहल सक्सेन मेसिनमे व्यवस्थापन कैना बटाइल बा । उहीहे ३० दिनसम वहाँ राखके सुखाके ठोस बनलहे मलके रूपमे प्रयोग करे सेकजैना जनाइल बा । दिसाजन्य फोहोर प्रत्येक दिन २८ घनमिटर व्यवस्थापन करे सेकजैना जानकारी डेहल बा ।
ओस्टके उपयोगहीन फोहोरहे सेलमे व्यवस्थापन कैटी प्रत्येक दिन निश्चित तह बनैना ओ माटीसे भँठ्र्ना काम हुइना जनाइल बा । काम नैलग्ना फोहोर व्यवस्थापनके लाग छठो सेल निर्माण करल बा ।
कुहना, नैकुहना फोहोरमैला व्यवस्थापनसे निकरल तरल पदार्थहे प्रशोधन कैना ओ जलीय जीवहे असर नकैना बनाके खुटिया लडियामे फेँक्ना जनाइल बा । बायोकेमिकल अक्सिजन डिमान्ड (बिओडी), केमिकल अक्सिजन डिमान्ड (सिओडी) ओ पिएच जाँच कैके जलीय जीवहे असर नैकैना प्रमाणित कैके किल लडियामे तरल फेँकजैना निर्माण कम्पनीके जिकिर रहल बा । तरल प्रशोधनके लाग २८ घनमिटरके पोखरी निर्माण करल बा ।
फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्रके कारण दुर्गन्ध नैहुइना ओ आसपासके बस्तीहे कौनो फेन असर नैकैना जनाइल बा । पाण्डेयके अनुसार उ फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्रसे ३० बरससम धाने सेक्ना क्षमता रहल बा । ३० बरससम फोहोरमैला व्यवस्थापन करेबर वहाँ उँच डाँडा बन्ना जनाइल बा । ओकरपाछे उक्त स्थानमे वृक्षरोपण कैके पुनः जङ्गल वा चिल्ड्रेन पार्क बनाइ सेकजैना इन्जिनियर पाण्डेय बटैलै ।
निर्माण कम्पनीसे फोहोरमैला व्यवस्थापन केन्द्र निर्माण कैके तीन बरससम अपनहे सञ्चालन कैके किल धनगढी उपमहानगरपालिकाहे हस्तान्तरण कैना जनाइल बा ।
