विश्व आदिवासी दिवस मनागिल
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २४ सावन । विश्वके आदिवासी जनजातिके अधिकार, पहिचान, संस्कृति ओ जीवनपद्धतिके संरक्षण तथा ओइनके समस्याबारे विश्वव्यापी चेतना अभिवृद्धि कैना उद्देश्यसे अँटवारके रोज विश्व आदिवासी दिवस विविध कार्यक्रमके साथ मनागिल बा ।
नेपाल आदिवासी जनजाति महासंघ जिल्ला समन्वय कैलालीके आयोजनामे हुइल कार्यक्रमके प्रमुख अतिथि धनगढी उप–महानगरपालिकाके नगर उपप्रमुख कन्दाकला कुमारी राना रहल रहिट । कार्यक्रममे सम्बोधन करटी उहाँ राज्यके हरेक निकायमे पुगेक लग राजनीतिक पहुँच हुइक पर्ना बटैली । आदिवासी जनजाति समुदायके अधिकारके लडाइ सक्कु आदिवासीके रहल बटैलंै । अधिकारके लग ढेर आन्दोलन कैली उहीसे हमार माग मुद्दा सुनुवाई हुइल नै हो । फेरसे अधिकार सुनिश्चितताके लग सक्कु जे एक जुट हुके लागेक पर्ना बटैली ।
आदिवासी जनजाति प्रकृति पुजक हो, उहाँ कहली आदिवासी जनजाति जल, जंगल, जमिनसे सरोकार राखठ मने उहीसे फेन बञ्चित कराजाइटा । ओस्टेक उहाँ आदिवासी जनजातिके सूचीमे सूचीकृतमे बाँकी रहल जनजातिहे सूचीकरण जरुरी बा ।
कार्यक्रमके विशिष्ट अतिथि कैलारी गाउँपालिकाके उपाध्यक्ष भगवतीकुमारी चौधरी आदिवासी जनजाति समुदाय अपन रीतिसंस्कृति छोरके औरेक संस्कृति अंगाले लागल बटैली । औरेक संस्कृतिमे रमैना ठिके हो मने अपन संस्कृतिहे छोरेक नै परल । नेपालके संविधानमे आदिवासी जनजातिके अधिकार कागजमे सीमित राखल मने व्यवहारमे कार्यान्वयन नै करल उहाँ बटैली । हम्रे अपन अधिकारके लग जागरुक नै हुइठी बल्की चुनावके भोटरमे सीमित हुजैठी । अधिकारके लग लरेबेर कर्तव्यहे भुलाइ नैहुइना बिशिष्ट अतिथि उपाध्यक्ष चौधरी बटैली ।
कार्यक्रममे थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रिय सदस्य फोनिराम चौधरी अधिकारके आघे बह्रे पर्नामे पाछे हट्टी गैल बटैलै ।
राजी सल्मा समाजके साजन राजी अपने हुक्रे आदिवासी जनजाति भिटरके लोपोन्मुख समुदायमे परठी मने राज्य हमार अधिकार सुनिश्चितताके लग ध्यान नै देहल बटैली ।
नेपाल मगर संघके सल्लाहकार ओमप्रकाश पुन अधिकारके लग ढेर आन्दोलन करल मने स्वायतता प्राप्त करे नै सेकल बटैलै । अब्बे संविधान संशोधन कैना बेला रहल ओरसे सक्कु जे जुतके जाइपर्ना बटैलै ।
नेपाल तामाङ घेदुङ समाजके अध्यक्ष गोपाल तामाङ विगतके दिनमे इ दिवस ढेर जानेक सहभागितामे मनागिलेसे फे सहभागिता न्यून हुइटी गिल बटैली ।
नेपाल बार एशोसियसनके अध्यक्ष नाथुराम महतौं इ दिवस देश व्यापी रुपमे मनैटी रहल ओरसे एकर सन्देश राज्य सम पुगे कना हो । उहाँ सन् १९९४ डिसेम्बर २३ मे संयुक्त राष्ट्रसंघके महासभासे हरेक वर्ष अगस्ट ९ हे विश्व आदिवासी दिवसके रूपमे मनैना निर्णय करल बटैलै । थारु कल्याणकारी सभाके केन्द्रीय पार्सद माधव थारु आदिवासी जनजातीके अवस्था कमजोर हुइटी गिल बटैलैं ।
सखि सञ्जालके सचिव तारा चौधरी महिलाहुकनहे उपप्रमुख जिम्मा देहटी आइल ओरसे आब महिलाहुक्रे प्रमुखमे आइकपर्ना बटैली ।
राना समुदायके ओरसे शिवनारायण राना आदिवासी जनजाति अपन अधिकारके लग माग्के नाइ छिनके लेहेक पर्ना बटैलै । धनगढी उप–महानगरपालिकामे आदिवासी जनजातिके बसोबस ढेर रहल मने निर्णायक तहमे पुगे नाइ सेकल बटैलै ।
भल्मनसा हुकने ओरसे धनगढी नगर भल्मनसा संयोजक रोहित कुमार चौधरी, किराँत समुदायके ओरसे बिपरानी राई लगायत मन्तव्य राखल रहिट ।
नेपाल आदिवासी जनजाति महासंघ जिल्ला समन्वय कैलालीके जिल्ला अध्यक्ष शक्तिप्रसाद सिरिस मगरके अध्यक्षतामे हुइल कार्यक्रम स्वागत मन्तव्य उपाध्यक्ष सरिता चौधरी करल रही ओ संचालन दलबहादुर घर्ती मगर करल रहिट ।
सन् १९८२ मे जेनेभामे संयुक्त राष्ट्रसंघे आदिवासी जनसंख्या सम्बन्धी कार्यसमूहके पहिल बैठक अगस्ट ९ मे हुइल ओरसे उहे दिनहे दिवसके रूपमे छनोट करल हो ।
संयुक्त राष्ट्रसंघके अनुसार विश्वके ९० देशमे करिब ४७ करोड ६० लाख आदिवासी जनजाति बसोबास करठै । ओइने विश्वके कुल जनसंख्याके छ प्रतिशतसे कम हुइल फे विश्वके सबसे गरिबमध्ये कम्तीमे १५ प्रतिशत आदिवासी समुदायके विश्वमे बोल्ना अनुमानित सात हजार भाषामध्ये भारी बहुमत भाषा बोल्ठै ओ करिब पाँच हजार फरक संस्कृति प्रतिनिधित्व करठै ।
आदिवासी जनजाति समुदायसे विशिष्ट संस्कृति, परम्परा ओ मानिस ओ प्रकृतिबीचके सम्बन्धसम्बन्धी अपन ज्ञान ओ अभ्यासहे पुस्तौँसे संरक्षण करटी आइल बटै । उहाँहुकनके सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक ओ राजनीतिक विशेषता आफू बसोबास कैना बहुसंख्यक समुदायसे पृथक बटै ।
पहिचान, परम्परागत जीवनपद्धति ओ पुख्र्यौली भूमि, क्षेत्र ओ प्राकृतिक स्रोतसाधनउप्परके अधिकारके मान्यताके लग आदिवासी समुदायसे लम्बा समयसे संघर्ष करटी आइल बटै ।
इतिहासके टमान कालखण्डमे उहाँहुकनके अधिकार उल्लंघन करटी आइल ओ आज फे उहाँहुकन विश्वके सबसे पाछे पारल ओ जोखिममे रहल समुदायमन्से रहलके संयुक्त राष्ट्रसंघ जनैले बा ।
आदिवासी जनजातिके अधिकार संरक्षण ओ उहाँहुकनके विशिष्ट संस्कृति ओ जीवनपद्धतिके निरन्तरताके लग विशेष उपाय आवश्यक रहल अन्तर्राष्ट्रिय समुदायसे स्वीकार करटी आइल बा ।
दिवसके अवसरमे आदिवासी जनजातिके अधिकार, संस्कृति, भाषा, परम्परागत ज्ञान ओ प्राकृतिक स्रोतसँगे सम्बन्धके संरक्षणके साथे उहाँहुकनके निर्णय प्रक्रियामे अर्थपूर्ण सहभागितामे जोड देहेठ ।
इ दिवससे विश्वभरके आदिवासी जनजातिके योगदान ओ उहाँहुकन भोग्टी रहलके चुनौतीप्रति ध्यानाकर्षण करैटी उहाँहुकनके अधिकार ओ सम्मान सुनिश्चित कैना सरकार, नागरिक समाज ओ अन्तर्राष्ट्रिय समुदायहे प्रतिबद्ध हुन आह्वान करना अवसर देहल बा ।
