थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १५ जेठ २६५०, शुक्कर ]
[ वि.सं १५ जेष्ठ २०८३, शुक्रबार ]
[ 29 May 2026, Friday ]

विचार

थारु संस्कृति ओ संकट

थारु संस्कृति ओ संकट

रिटभाँटबिना गाउँ, ट्वाल, समाजक कौनो माने (अर्थ) नैरहठ । रिटभाँट कलक रहान, पेहरान, लवाइखवाइ, बोलिबट्कोहि, नाँचखोर, गिटमृडंग, पूजाआँटिसे सड्ड नखाइल रहठ । रिटभाँट ओ समाज नुँह ओ मासहस चप्कल रना हो, एक ड्वासरक सहारासे । ओहमार रिटभाँटह जिन्गि
माघ टिहुवार

माघ टिहुवार

परिचय माघ उ उत्सव हो जौन नेपाली समुदाय मनैठै । माघ (जनवरी) मे परठ, सामान्यतया जनवरी जनवरी १४ माघ । यिहीसे माघके सुरूवाट हुइठ ओ जारपाछे नम्मा दिन (गर्मी)हेफे स्वागत करठ । जे होस्, उ टिहुवारपाछे उ दिन अन्तिम जारके रात मन्से एक हुई
थारु समुदायके मौलिक टिहुवार माघ

थारु समुदायके मौलिक टिहुवार माघ

माघ महिना ओ थारु समुदायके टिहुवार माघ । हुइना टे टमान समुदाय माघहे अपन चलन अन्सार मनैना प्रचलन बा । कोइ माघेसंक्रान्ति, कोइ खिचडी, कोइ बर्का माघ कहिके मनैना चलन बा । माघेसंक्रान्तिके दिन पूर्वके थारु समुदाय तिलके लड्डु, चाकु, तरुल
माघ, माघी ओ थारु समुदाय

माघ, माघी ओ थारु समुदाय

माघ लहैली सुरिक सिकार ख्रैली रे हाँ,सखिए हो, माघक पिलि गुरी गुरी जार …। यी गीत थारु गाउँबस्ती चारु ओर गुन्जटी रहल बा । यी थारुहुकनके मघौटा गीत हो । थारु समुदायमे विशेष करके माघ सम्वन्धी मघौटा, ढमार, डफ गीत गैना करजाइठ । काल्हके दिनमे
थारु बट्कुहिक् खोजिमे

थारु बट्कुहिक् खोजिमे

२०६५ चैतके चटेंगर घाम । काठमाडौंसे नेंगल बस बाँकेक् कोहलपुर चोकमे उटार डेहल टे मै घामले पाके लग्नु । मोर जाइ पर्ना ठाउँ बाँसगढी, बर्दिया । कोहलपुर चोकमे बरा बेर अस्रा लागके बल्ले लोकल जिपमे ठाउँ मिलल् । बाँसगढी बजारेम् रहल
‘टीकापुर जनविद्रोह’ का राजबन्दीहरूको रिहाईको सवाल

‘टीकापुर जनविद्रोह’ का राजबन्दीहरूको रिहाईको सवाल

वि.स. २०७२ साल भदौ ७ गते कैलालीको टीकापुरमा भएको जनविद्रोहबारे सबै जानकार नै छन् । देश संघीयकरणको प्रक्रियामा रहेको, संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रको संविधान जारी हुन लागेको वेलामा त्यस क्षेत्रमा के कस्तो प्रदेश संरचना गर्नु उपयुक्त
नेलशन मण्डेला ओ रेशम चौधरी

नेलशन मण्डेला ओ रेशम चौधरी

महिला पत्रकार स्टिना डाब्रोस्की सन् १९९४ मे राष्ट्रपति भवनमे जाके नेलशन मण्डेलाहे अइसिन प्रश्न पुछ्ले रहिटः ‘काल्हके दिन जेलमे रही टबे अप्नेहे छुटम कना का बाटसे आशावादी बनैले रहे ?’मण्डेला जवाफमे अइसिन कले रहिटः ‘महिन आशावादी
प्रथागत कानूनसे संरक्षित डारु ओ यिहिसे थारू समाजमे पारल प्रभाव

प्रथागत कानूनसे संरक्षित डारु ओ यिहिसे थारू समाजमे पारल प्रभाव

पृष्ठभूमि डारुहे हिन्दु संस्कृतिमे सोमरस कहल पाजाइठ । हिन्दुहुकनके महान ग्रन्थ रामायण ओ महाभारतमे वैदिक कालमे मनोरञ्जनके लाग देवीदेवता समेत सोमरस सेवन करल बाट उल्लेख करल पाजाइठ । नेपालमे प्राचीन कालसे किराँत, लिच्छवी ओ मल्ल
थारू भाषासेवी तथा शिक्षाप्रेमी सगुनलाल

थारू भाषासेवी तथा शिक्षाप्रेमी सगुनलाल

गोचाली पत्रिकाके एक अभियन्ता सगुनलाल चौधरी २०५८ साल पुस १२ गतेक् दिनसे वेपत्ता बाटैं । मने, उहाँक कौनो खोजखबर नैहो । दाङ जिल्ला सौडियार–९, बेलहरी गाँउमे बाबा आशाराम थारू ओ डाइ गुइती थारूके मैगर कोखमे छुट्की छावक् रुपमे सगुनलाल चौधरीके

‘टिकापुर जनविद्रोह’ को गलत भाष्यकरण र ‘रेशम चौधरीहरू’ को रिहाईको प्रश्न

डम्बर खतिवडा एक अनौपचारिक सुचनाअनुसार करिब एक महिना अघि प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओलीका सल्लाहकार विष्णु रिमाल र सूर्य थापा कैलाली क्षेत्र नं. १ का माननीय सांसद रेशम चौधरीलाई भेट्न जेल गएका थिए । भेटमा उनीहरूले प्रम ओलीको प्रस्ताव