अपने संस्कृति ओ परम्पराके सम्मान’मे जोड
पहुरा समाचारदाता
ललितपुर, १६ असार । लैङ्गिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक समुदायसे “समावेशिता, विविधता र सद्भावका बीउ रोपौँ” कना मूल नारासहित इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा मनैले बटै ।
मायाको पहिचान नेपाल, लिड नेपाल, समावेशी मञ्च नेपालसहितके संघसंस्थाके संयुक्त आयोजनामे ललितपुरके पाटन दरबार स्क्वायर प्राङ्गणमे इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा आयोजना करल हो ।
कार्यक्रमके लाग ललितपुर महानगरपालिकासे स्थान उपलब्ध कराइल रहे कलेसे एक्सन एड नेपाल ओ डाकिनी हस्पिटालिटीसे सहयोग करल रहिट । कार्यक्रममे सहभागीहुक्रे पुरुष–महिला तथा महिला–पुरुषके भेषमे सजके परम्परागत शैलीमे धान रोपाइँमे सहभागी हुइल रहिट ।
आयोजकके अनुसार नेपालके लैङ्गिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक समुदायसे पश्चिमी संस्कृतिके नक्कल नैकरके नेपालके मौलिक संस्कृति, परम्परा, रीतिरिवाज ओ चाडपर्वसँग अपन लैङ्गिक पहिचान जोरटी इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा मनैटी आइल बटै । इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा नियमित रूपमे आयोजना करे लागल यी टिसरा वर्ष हो ।
कार्यक्रमहे सम्बोधन करटी पहिल संविधान सभा सदस्य एवं मायाको पहिचान नेपालके कार्यकारी निर्देशक सुनिल बाबु पन्त इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा केवल धान लगैना कार्यक्रम नैहुके नेपालके इतिहास, संस्कृति तथा विविधताके सम्मान कैना अवसर रहल बटैलै ।
उहाँ वैज्ञानिक अध्ययनअनुसार धान खेतीके सुरुवात करिब ९ हजार वर्षआघे हुइल ओ नेपालमेफे करिब ३–४ हजार वर्षसे धान खेती हुइटी आइल उल्लेख करटी रोपाइँहे केवल कृषि कार्य नैहुके सभ्यता निर्माण, समुदाय निर्माण, सहकार्य, श्रम ओ जीवनके उत्सवके रूपमे व्याख्या करलै ।
उहाँक अनुसार हमार पुर्खाहुक्रे असारके हिलामे केवल धान केल्ह नाही, सम्बन्ध, संस्कार ओ समाजहे एकताबद्ध रख्न मूल्यफे लगैलै । रोपाइँ जात्राके विशेषता पुरुषसे महिलाके भेषमे रोपार बन्न ओ महिलाहुक्रे पुरुषके भेषमे बाउसे तथा हली बन्न परम्परा रहल उल्लेख करटी उहाँ यिहीसे समाजमे भूमिका, अनुभव ओ विविधताहे सम्मान कैना सांस्कृतिक अभ्यासके प्रतिनिधित्व कैना बटैलै ।
पन्तसे हमार पुर्खाहुक्रे आधुनिक लैङ्गिक अध्ययन नैपढलेसेफे मानव समाज केवल दुई ठो कठोर लैङ्गिक सीमामे केल्ह सीमित नैरहना, मनैनके भूमिका, व्यवहार ओ अभिव्यक्ति विविध हुइना तथ्य बुझल तर्क करलै । समाजहे समावेशी बनैना कबु कबु भूमिका साटेपर्ना, दुसरके अनुभव बुझेपर्ना ओ अपनसे फरक व्यक्तिहे सम्मान करेपर्ना सन्देश रोपाइँ जात्राजैसिन परम्परासे डेहल उहाँक कहाई रहे ।
नेपालके सांस्कृतिक इतिहासमे गाईजात्रा, मारुनी, नटुवा, सिंगारु, रतेउली, धामी–झाँक्री, लाखे, ख्याः, क्वाँचाः लगायतके परम्परामे लैङ्गिक अभिव्यक्तिके विविधता डेख्ना उल्लेख करटी उहाँ मेटी, फूलुमुलु, नपुंसक, पण्डक, तृतीय प्रकृति, सिंगारु, बराँठ, हिजडा, जनाना जैसिन ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक शब्दावलीसे नेपालके अपने लैङ्गिक तथा यौनिक विविधताके समृद्ध परम्परा प्रतिबिम्बित कैना बटैलै ।
उहाँ पूर्वीय दार्शनिक तथा आध्यात्मिक परम्परामे मानव अस्तित्वहे केवल स्त्री वा पुरुषके सीमित परिचयसेफे व्यापक रूपमे बुझ्न दृष्टिकोण रहल उल्लेख करलै । उपत्यकाके अजिमा परम्परा, ख्याः, क्वाँचाः तथा लाखेसम्बन्धी सांस्कृतिक अभ्यासहे समेत उहाँ विविधताके ऐतिहासिक स्मृतिके रूपमे व्याख्या करलै ।
पन्तसे आधुनिक प्राइड आन्दोलनसे पश्चिमी देशमे समान अधिकारके लाग महत्त्वपूर्ण योगदान डेहल स्वीकार करटी सन् १९६९ के स्टोनवाल विद्रोहपाछे सुरु हुइल आन्दोलन ओ ओकरपाछे जौन महिनाहे प्राइड महिनाके रूपमे मान्यता डेहल इतिहासप्रति सम्मान व्यक्त करलै ।
मने नेपालके लैङ्गिक तथा यौनिक विविधताके इतिहास स्टोनवाल वा प्राइड महिनासे सुरु नैहुइल उहाँक कहाई रहे । उहाँ नेपालमे रोपाइँ जात्रा, गाईजात्रा, नटुसा संस्कृति, रतेउली, अजिमा परम्परा, लाखे, ख्याः, क्वाँचाः, धामी–झाँक्री, मारुनीलगायतके मौलिक सांस्कृतिक अभ्यास नम्मा समयसे विविधताके प्रतीकके रूपमे विद्यमान रहल बटैलै ।
उहाँ अन्तर्राष्ट्रिय ऐक्यबद्धताके विरोधी नैहुइल स्पष्ट परटी नेपालके लैङ्गिक तथा यौनिक आन्दोलनसे विश्वव्यापी मानवअधिकार आन्दोलनसे ढेर सिखल ओ सहकार्यफे करल बटैलै । मने सहकार्यके अर्थ आत्मसमर्पण नैहुइल उल्लेख करटी सहयोग पैना कहल सहयोगदाताके संस्कृति, पहिचान वा सामाजिक अभ्यासहे अनिवार्य रूपमे अपनाई पर्ना नाही कना धारणा व्यक्त करलै ।
उहाँ पछिल्का समय अपने इतिहास, शब्दावली ओ सांस्कृतिक सम्पदाहे बिस्रैना तथा विदेशी शब्द ओ प्रतीकहे केल्ह प्रगतिशीलताके मापदण्ड ठन्ना प्रवृत्तिप्रति चिन्ता व्यक्त करलै । विश्वसँग जोरेपर्ना हुइलेसेफे अपन सांस्कृतिक जार छोरे नैहुइना उहाँ जोड डेलै ।
विकास साझेदार तथा दाता संस्था समेतहे सम्बोधन करटी पन्तसे नेपालके लैङ्गिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक समुदायहे सहयोग करे चाहल हो कलेसे स्थानीय इतिहास, स्थानीय संस्कृति, स्थानीय शब्दावली ओ स्थानीय उत्सवके संरक्षण तथा प्रवद्र्धनमे साथ डेना आग्रह करलै । उहाँ रोपाइँ जात्रा, गाईजात्रा, नटुसा, सिंगारु, मारुनी, रतेउली, अजिमा परम्परा, ख्याः, लाखे तथा टमान आदिवासी समुदायमे रहल विविधताके रैथाने ज्ञानहे संरक्षण कैना सहयोग करेपर्ना धारणा रख्लै ।
उहाँ नेपालके लैङ्गिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक समुदायहे और केक्रो प्रतिलिपि बन्न आवश्यक नैरहल उल्लेख करटी नेपालके अपने इतिहास, संस्कृति ओ विविधता पर्याप्त रहल बटैलै । उहाँ इन्द्रेणी रोपाइँ जात्राहे आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव ओ विविधताप्रतिके सम्मान लगैना अवसरके रूपमे व्याख्या करटी भावी पुस्ताके लाग समान अधिकार ओ सांस्कृतिक गौरवसंगे फुल्न–फल्न नेपाल निर्माण कैना सक्कुहुनहे आह्वान करलै । उहाँ सक्कु नेपालीमे इन्द्रेणी रोपाइँ जात्रा तथा असार १५ के शुभकामनाफे व्यक्त करलै ।




