थारू जल जमिन जंगल प्रकृतिमे हँस्टी खेल्टी कमैटी
आदिमकासे अपन जीवनयापन करटी आदिवासी । थारू जात नेपालके चौठा ढेर संख्या रहल जात । खास करके बनुवाक बिच्चे फँटूवा लडिया टलुवाक किनारे बैठुईया जात । रोजके छाक टारेक लग प्रकृतिमे भर परना थारू बिशेष करके खेतीपातीमे करटी आईल बा । सदियौसे हर जुवा भैंस गोरूनसे सामान्य रूपसे खेती करटी आईल थारू समयके बड्लाउ संगे संगे एक्काईसौ शताब्दीके अन्त्य अन्त्य बराजोरसे आधुनिकीकरण ओर बर्ह सेकल। पहिलेक पूर्खा हुक्रे खेतीपाती शुरू करेक लग महिना पाख दिन ओजरिया अंन्धरियाक ख्याल करैह ।
सबजे रब्बी(मसरी) गोंहू काटके अनाज भित्र्याके बैशाखमे गोबर मल फेंका(दारके) बैशाखी जोटैह। बरा झट्कार घरेक मनै ओराईट बैशाख परट जेठ ढुरिया धान बोऊईया बैशाखी जोटल ढेलाम ढुरिया धान बोईह ओ ठोर ठोर दुन्द्रा कुल्वाक पानी लग्ना मनै कोई बियार बिया गीराए जेठभर कबु कुल्वाही कबु सत्तारेमे रहल समय छट्री छाँईक लग मौरैनिक टूरे बनुवा जैना टो कोई बर्खहा सामा ढह्र्या मचिया टिपाई(गोर धैना पिर्का) बनैना करैह । थारू समुदायके हकमे असार्ह जब डुसरा पानी बर्से टब खेट्वाम पेल्न शुरू करैह कलेसे गैरथारूनके हकमे असार्ह पन्ध्र दही चिउरा खाके बैठौवा लगैना शुरू करैह। मनो समयके रप्तार संगे अब मनैनके खेती करना सोंच तौर तरिका बड्लगील मनै आधुनिकतामे अत्रा आस्रित हुगीनै कि पहिलेक खेती करना टौर टरिका पूरै बड्लगील । अबके समयमे बर्हटी रहल जनसंख्याके घरबासके लग ओ खेती योग्य जग्गा प्लाटिङ्ग करना चलनसे दिन दिने जग्गा खण्डी खुन्डा हुईटी बा । कमैयाँ मुक्ति पाछे ढेर जैसिन कमैयाँ परिवार अटैया बटैया कमे हुईलेसे फे खेती करठै ।
एक ओरसे कहलेसे अबके समयमे हर परिवार किसान बनल बा चाहे उ एक कठ्ठा लगाए चाहे बिगहा दश बिगहा । समय टो रात दिन घाम जार बर्खा सुख्खा अपन नियमसे हरडम चल्टी आईटा ओ चल्टी रही मनो आझकलके मनै समयसे आगे चले खोजटै जौ अपने आप हे बहुट घाटा बा । हुईनफे भूईयाँक मनै बद्रीम थुके खोज्लेसे अपन थुक अपने मुहेम आईठ । पुर्खानके बात मौसमविद हुक्रनके चेतावनीके बाबजुद फे मने हाली खेती लगैना चक्करमे बिना बर्षाक खाली बोरिङ्गके भरमे खेती लगाई भिर्न ओ झटपट धेर मञ्जुरिह्या लैके लगा सेक्न कहकुट बा “हड्बडके काम लड्बड“ हाँरिक हुस्सा करके खेट्वा टो हाली लगा दर्ठै । खेट्वा लागल पाछे मुख्य समस्या शुरू हुईठ। लगाई धान सुखटा डरार फट्ता हर दुई दिनमे पानी चर्हाई पर्ना उप्परसे पानी बर्सट नाई हो कुलुवा लडिया सुखल चारू सिचाईके लग सकहुन बोरिङ्गके भर पर्ना जेकर बोरिङ्गमे विद्युत मिटर जडान करके पानी मोटर ढरल बा टो ईन्धनके खासे समस्या नाई हो मनो जे टो ईन्जनसे सिचाई करू सोंचठ ओकर लग डिजलके नम्मा लाईन देखे मिलठ। यी सब जुगार करके बोरिङ्गसे सिचाई करलेउ ओकर पाछे सबसे समस्या सुख्खाके बिल्गे लागठ । चारू ओर बोरिङ्ग चल्टीके गाउँमे पीना पानीक बम्मा (नल्का) सुखाके दैनिक जिन्गी कष्टकर बन्ना समस्या देखा परटा ।
यी सब समस्या पार करके बलटल धान उब्जनी हुईल जब कट्ना समय हुईठ बर्षा शुरू हुईठ । यी सब विचार करबी टोहमरे किसान सचमे खेती करनै भुलागील बाटी जिही सुन्बी हाली खेट्वा लगाई हाली अराम करब । आधुनिकताके सोचमे हमार पुर्खानके सिखाईल जोट्न कोर्ना गोर्ना भुलागीली। हमरे सोच्ठी आधुनिक वैज्ञानिक खेती करटी मनो यी बिल्कुल गलत साबित हुईटा महिनसे आगे कोई लगाके नसेके एकचो खेट्वा लगादेली दोबारा हिल्लाम पेले नाई परे सोँचके घाँस मुवैना दवाई झोकाझोंक दर्ठी यीहीसे घाँस टो मरठ धान पनाई नाई जाई परठ मनो घाँस मुवैना दवाईसे धान उब्जनी करैना मित्र जीव फे बिना कारण मरजीठै ओकर कारण फे ढिरे ढिरे जमिनके उर्बराशक्ति कम हुईटी जैना समस्या बा ।
टमाम मेरिक रसायिनिक बिषादी दर्ना चलनसे खेट्वा सुख्खा हुईना समस्या टो हुईटी बा मनो ऊहीसे ढेर समस्या अपनेमे परटी बा आझके दिनमे मजासे जाँच करलेसे हर परिवारसे कोई ना कोई क्यान्सर जैसिन प्राणघाटक रोगसे पिडित बा । यकर मुख्य कारण देखाईठ हमार खानपीन हमार खेतीपाती बिना बर्षा परले जेठसे असार्ह पन्ध्रसम धान लगैबो टो सावनमे धानेम घाँस जम्बे करी ओ बर्षा ओरैनासे पहिले धान पक्बे करी ।
ओरौनीम,
हमरे किसान समयसे आगे नेगे खोजटी । जान बुझके जबरजस्ती प्रकृति विनास टो करटी बाटी ओकर संग अपन अमूल्य जिन्गीसे फे खेल्वार करटी । कृषि प्रविधिक अभिमन्यू चौधरी सुझाब अन्सार अधिकांस धान १२० दिन से १५० दिनमे पक्ना जातके बा ओहे बात कृषि विज्ञ जेटीए मौसमविद हुक्रनसे सल्लाह लैके बिया गिरैना बैठैना करलेसे एकडम उचित रहत ।
ठोरचे बर्षाच आस लागके खेटी करलेसे सुख्खापन, धानेम घाँस जम्ना, टमान मेरिक रोग लग्ना, जर पत्ता ओ फलमे किरा लग्ना, धान बिना समयक पाक जिना समस्यासे बचे सेकजाईठ।हमारठे रहल हरेक बीर्ही लगैना, पक्ना ओ कट्ना उचित समय बा ।
कातिक अगहनमे लगैना आलु सावनमे लगाके बराबर फल लेहे नाई सेकजाई ओस्टेके असार्ह सावनमे लगैना धान जेठमे लगाके समय अन्सारके फल पक्कै फे नाई लैई मिली । टबमारे पुर्खानिय तरिकासे खेती करो कहाई टो गलत रही आझकल हरेक मेरिक जोट्ना कोर्ना लिमिट दवाई दर्ना मशीन बा कृषिविज्ञ, मौसमविद हुक्रनके सुझाब लैके समय संगे खेती करलेसे सबके भला हुई ।




