गर्भास्था ओ प्रसवके समयमे महिलासे भोग्टी रहल हिंसाबारे छलफल
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २१ कुवाँर । नेपालमे गर्भावस्था, प्रसव ओ प्रसवोत्तर समयमे महिलाहुक्रे भोगे परल दुव्र्यवहार हिंसा ओ अधिकार उल्लंघन सम्बन्धी छलफल कार्यक्रम हुइल बा ।
महिला कानून र विकास मञ्चके आयोजना तथा एम्पलिफाई चेन्जके सहकार्यमे नेपालमे गर्भावस्था, प्रसव ओ प्रसवोत्तर समयमे महिलाहुक्रे भोगे परल दुव्र्यवहार हिंसा ओ अधिकार उल्लंघन सम्बन्धी छलफल हुइल हो ।
कार्यक्रममे अधिवक्ता दिपेश श्रेष्ठ नेपालमे गर्भावस्था, प्रसव ओ प्रसवोत्तर समयमे महिलाहुक्रे भोगे परल दुव्र्यवहार हिंसा ओ अधिकार उल्लंघन सम्बन्धी प्रस्तुतीकरण करल रहिट । उहाँ गर्भावस्था, प्रसव ओ प्रसवोत्तरके अवस्थामे रहल महिलाके लाग आठ ठो अधिकार सुनिश्चित करल बटैलै । कार्यक्रममे अधिवक्ता तथा महिला कानून र विकास मञ्चके कार्यक्रम संयोजक सविन श्रेष्ठ सुरक्षित मातृत्व तथा प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार ऐन २०७५ हे संशोधन कैना बनल विद्येयक २०८३ से प्रस्तावित मुख्य संशोधनबारे प्रस्तुतीकरण करल रहिट ।
कार्यक्रममे सहभागीहुक्रे गर्भावस्थामे महिलाहुक्रे अभिनफ टमान मेरिक हिंसा भोगे परल बटैले बटै ।
विमला खडायत छावा जन्मलेसे खुशी हुइना, छाई जन्मलेसे वेवास्था कैना करल अवस्था रहल बटैली । प्रसुती गृहके भौतिक पूर्वाधारमे सुधार नैहुके समस्या हुइल उहाँ बटैली ।
दलित महिला अधिकार मञ्चके सुजना पराजुली नम्मा सुत्केरी विदा डेना कहल मने निजि सस्थाके हकमे रोजगारीके सवालसे जोरल बटैली । कौशिला चौधरी नम्मा विदा सरकारी कर्मचारीके लाग मजा रना मने निजि संस्थाके हक रोजगारी जाई सेक्ना बटैली । चेतमान साउद स्वास्थ्य संस्थामे बच्चा जन्माई गैल बेला स्वास्थ्यकर्मीसे दुव्र्यवहार हिंसा भोगे पर्ना अवस्था रहल बटैलै । कार्यक्रममे गैसस महासंघ प्रदेश संयोजक देवी खनाल, इन्सेकके कृष्ण विक, अम्विका भण्डारी, भगवती हमाल, ठाकुर प्रसाद करियाप्रधानलगायत आपन बाट राखल रहिट । कार्यक्रम संचालन दलित महिला अधिकार मञ्चके अध्यक्ष सावित्रा घिमिरे करल रही ।
