थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ११ असार २६५०, बिफे ]
[ वि.सं ११ असार २०८३, बिहीबार ]
[ 25 Jun 2026, Thursday ]
‘ सुदूरपश्चिम प्रज्ञा प्रतिष्ठानके स्थापना दिवस ’

प्रतिष्ठानसे समग्र भाषा कला संस्कृतिके पहिचान कैना जरुरी बाः मुख्यमन्त्री शाह

पहुरा | ११ असार २०८३, बिहीबार
प्रतिष्ठानसे समग्र भाषा कला संस्कृतिके पहिचान कैना जरुरी बाः मुख्यमन्त्री शाह

शिवानी चौधरी
धनगढी, ११ असार ।
सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारके मुख्यमन्त्री कमल बहादुर शाह सुदूरपश्चिम प्रज्ञा प्रतिष्ठानसे समग्र समुदायके भाषा, कला, संस्कृतिके पहिचान कैना जरुरी रहल बटैले बटै ।

सुदूरपश्चिम प्रज्ञा प्रतिष्ठानके स्थापना दिवसके अवसरमे विफेक रोज धनगढीमे आयोजना कैगिल चियापान कार्यक्रममे उहाँ उ बाट बटवइले रहिट । सुदूरपश्चिम प्रदेशमे टमान जातजाती, समुदाय बटै हरेक समुदायके आ–अपन भाषा, कला, संस्कृति बा उहीहे पहिचान कैके संरक्षण कैना प्रतिष्ठानके दायित्व हो, मुख्यमन्त्री शाह कहलै ।

हम्रे जल, जंगल, जमिनमे किल नाही भाषा, कला, संस्कृतिमेफे धनी रहल बटैलै । ओस्टेक दुसर प्रसंगमे बोल्टी प्रदेश सरकारसे ल्यानल बजेटमे कुछ त्रुति हुइल कहटी टमान सञ्चार माध्यम ओ सामाजिक सञ्जालमे टिकाटिप्पणी हुइटी रहल ओरसे उहीहे सच्याके लैजिना फे मुख्यमन्त्री शाह बटैलै ।

पूर्व मुख्यमन्त्री राजेन्द्र सिंह रावल सुदुरपश्चिमेलीहुक्रे अपन भाषा, कला, संस्कृतिमे रमाइ पर्ना बटैलै । उहाँ कहलै डेउडा, हुडकेली, छलिया, झुम्रा, सखिया, लठहुवा, झिझि होरीमे रमैना चाही बहिय संस्कृतीमे रमैलक कारण हमार संस्कृति आपसे आप लोप हुइटा ।

आन्तरिक ममिला तथा कानूनमन्त्री हिरासिंह सार्र्की सुदूरपश्चिम प्रदेशके भूमि टमान इतिहास बोकले बा । हम्रे उहीहे उजागर ओ खोज अनुसन्धान करे नैसेकल हुइ ओकर आब खोज अनुसन्धान करेक पर्ना बटैलै ।

आर्थिक मामिला मन्त्री विक्रम सिंह धामी डेउडा, सखिया, होरीमे आ–अपन विशेषता
रहल ओरसे ओकर खोजी कैना उहाँ आग्रह कैलै ।

सुदूरपश्चिम विश्व विद्यालयके पूर्व रजिष्टार शिक्षाविद डा. हेमराज पन्त सुदूरपश्चिम प्रदेशमे रहल हरेक समुदायके भाषा,कला, संस्कृति लोप हुइटा उहीके संरक्षण कैना जरुरी बा । यहाँके टमान आस्था बोकल मन्दिर,पाटीपौवा संरक्षणके अभाव बा ।
पुनर्वास नगरपालिकाके नगर प्रमुख तोय प्रसाद शर्मा सक्कु समुदायके भाषा, कला, संस्कृतिके सम्मान करटी संरक्षण कैना बटैलै ।

दशरथ चन्द स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानके धर्मराज भट्ट लोक संस्कृति विकासके आधार रहल बटैलै । कुहीहे समाप्त करेक लग भाषा, कला, संस्कृति समाप्त करलेसे पुगठ टबमारे पहिचान जोगाइक लग भाषा, कला, संस्कृति जोगाइना जरुरी रहठ ।

ओस्टेके प्रज्ञाके पूर्व विज्ञ सदस्य बासुदेव पाण्डे, पदमराज जोशी लगयत से शुभकामना मनतव्य व्यक्त करल रहिट ।

सुदूरपश्चिम प्रज्ञा प्रतिष्ठानके कुलपति रामचन्द्र नेपालके अध्यक्षतामे हुइलेक कार्यक्रम स्वागत मन्तव्य उप–कुलपति सरस्वती दाहाल करल रहिट । कलेसे कार्यक्रम सञ्चालन प्रतिष्ठानके सचिव सुरत बहादुर रावत ( डोटेली कान्छा ) करल रहिट ।

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