थारु राष्ट्रिय दैनिक
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[ थारु सम्बत २७ भादौ २६५०, शनिच्चर ]
[ वि.सं २७ भाद्र २०८३, शनिबार ]
[ 12 Sep 2026, Saturday ]

अँटवारीमे प्रदेशसे एक ओ कैलारीसे दुई दिन विदा डेहल

पहुरा | २७ भाद्र २०८३, शनिबार
अँटवारीमे प्रदेशसे एक ओ कैलारीसे दुई दिन विदा डेहल
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २७ भदौ । थारु समुदायके मौलिक टिहुवार अँटवारीमे सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे अँटवार एक दिन सार्वजनिक विदा डेले बा । कलेसे कैलाली जिल्लाके कैलारी गाउँपालिकासे दुई दिन विदा डेले बा ।
सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे राजपत्रमे प्रकाशित कैके थारु समुदायके मौलिक टिहुवारके लाग अँटवार एक दिन विदा डेहल जनागिल हो । वसहेक कैलारी गाउँपालिकासे प्रदेश सरकारके विदामे ठप एक दिन ठप करके सोम्मारफे विदा डेहल गाउँपालिका अध्यक्ष राजसमझ चौधरी जनैलै ।
थारु समुदायसे अँटवार व सोम्मार दुई दिन अँटवारी टिहुवार मनैठै । प्रकृति पुजक थारू समुदायमे खास कैके यी पर्व सूर्यके पूजा कैके रूपमे मनाजाइठ । सूर्यहे ओज्रार, अग्नी ओ शक्ति (उर्जा)के प्रतीकके रूपमे मानजाइठ ।
अटवारीमे अक्केकरे रोटी –एक ओर किल पकाइल रोटी) पकैना चलन बा । अइसिक अक्केकरे रोटी उहाँ भीमहे पुजन करजाइठ कना किम्बदन्ती बा कलेसे भीम, थारू राजा दंगीशरणहे लराइमे सघाइल ओ सबसे बलगर पुरुष भीम रहल ओरसे उहाँ जस्टे बलगर हुइना संकल्पके साथ पुरुषहुक्रे उहाँक पूजा कैके अटवारी व्रत बैठ्ना विचार फेन जनमानसमे बा ।
अटवारी कैसिक मनाजाइठ ?
अटवारी, व्रत बैठ्के मनैना पर्व रहल ओरसे यम्ने फेन डटकट्टन (दर) खैना चलन बा । डटकट्टन व्रत बैठुइयन मुर्गा कोल्नासे पहिले खाइ परठ । यदि खैनासे पहिले मुर्गा बोलि कलेसे डटकट्टन खाइ नैपाजाइठ । खैलेसे ऊ व्रत बैठे नैपाइठ । उहिनहे डुठा मन्ना चलन बा ।
अँटवार अथवा अटवारीके दिन व्रत बैठुइयनके खान भान्सामे नैपाकठ । उहाँहुक्रे बिहाने लहाके बहरी (घरके प्रवेशद्वारके पहिल कोठा) या अँगनामे गैयक गोबरसे लिपपोत करठैं । लिपपोत कैके कोरे आगी (भान्सामे पहिले प्रयोग नैहुइल आगी, चोखा आगी) मे रोटी पकाजाइठ । पुरान आगी आज अपवित्र मानजाइठ । ओहेकारण गनयारी काठ या फोर्सा काठ घोटके निकारल चोखा आगी प्रयोग करना करजाइठ । गुल्यार रोटी सूर्यके प्रतिकात्मक परिकारके रूपमे लेजाइठ । यी पर्वमे रोटी अनिवार्य रहठ । अन्य खैनाचिज भर सहायक रहठ । अटवारीमे अन्डी ओ गोहुँके कैके दुई मेरिक रोटी रहठ कलेसे पक्की, अम्रुट्, केरा, भेली मिठाई मिलाके मोर्साके भूजा ओ मिठाइपानी फेन रहठ । पहिल दिन नोन, बेसार, मिर्चा, मच्छी, सिकार भर आजके दिन बर्जित रहठ ।
रोटी पकाके तयार हुइ कलेसे स्नान कैके बिहान लिपपोत कैके ठाउँमे पिर्का या कौनो काठके वस्तुमे संगे बैठके अपन प्रक्रिया आो बह्रैठैं । खैनासे पहिले अगयारी (अग्यारी) डेना चलन बा । निश्चित ठाउँमे गैयक गोबरसे पुनः पोटके ओम्ने आगी ढरजाइठ । ओहे आगीमे सर्री धूप (सल्लाके धूप), नौनी ओ खाइक लाग तयार करना वस्तु
(अन्डीके रोटी, गोहुँक रोटी, पक्की, खिरा, अम्बा (बेलौटी), केरा, तरुल, भेली मिठाई मिलाइल मोर्साके भूजा ओ मिठाइपानी) एकएकचुटि सक्कु चीज एकमे मिलाके ओमे हवन करजाइठ
(चह्राजाइठ) । अगयारी डेना तीन चो दाहिन ओ तीन चो बाउओरसे पानी पर्छना (पानीके घेरो डरना) चलन बा । कोइ–कोइ पाँच या सात फेरा फेन पर्छना करठैं । ओकरपाछे अपन चेली–बेटीहुकनके लाग पहुराके रूपमे अग्रासन छुट्यइना चलन बा ।
अन्य व्रत जस्टे अटवारीमे दिनभर निराहार बैठे नैपरठ । दिनके पूजा कैके खैना चलन बा । यी क्रम सूर्यास्त नैहुइटसम चलठ । सूर्यास्तपाछे खैना काम पूर्ण रूपसे बन्द रहठ ।
औरे दिन सोम्मार, फर्हार करजाइठ । फर्हार नैहुइटसम पानी समेत नैपिके निराहार बैठे परठ । फर्हार अटवारीके अन्तिम पूजा हो । यी दिन व्रतालुहुक्रे बिहानेसे खानपिनके तयारीमे जुटल रठैं ।
आजके खानामे खास कैके भात, खँरिया, फुलौरी, पोंइ मिलाइल ठुसा, सुखौरा मच्छी, चिचिण्डो, घिरौला, भेन्डी लगायतके विजोर संख्यामे तरकारी बनाइल रहठ । मच्छीक सुखौरा विशेष मानजाइठ मने सिकर भर नैरहठ । फर्हारपाछे किल सिकार नन्ना या खैना करजाइठ । फर्हारपाछे निकारल अग्रासन आपन चेलीवेटिनहे डेना चलन रहल बा ।

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