कमैया मुक्तिके २६ बरस ः समस्या जहाँके टहीँ
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, २ सावन । कैलालीके गोदावरी नगरपालिका–१ विजयपुर शिविरके २२ मुक्तकमैया परिवार दुई दशकआघे एकठो लावा जीवनके सपना डेखल रहिट । सरकारसे कमैया मुक्तिके घोषणा करलसँगे अपने घर, अपने जमिन ओ सम्मानजनक जीवन पैना उहाँहुक्रनके विश्वास रहे ।
सरकारसे उहाँहुक्रनहे जग्गाके लालपुर्जा फेन डेहल, मने ओकर श्रेस्ता कायम नैहुइल । ओट्ठनसे यहोँर मालपोत कार्यालय जाइट जाइट वर्षौं बिटल, समस्या भर जहाँके टहीँ बा । “पुर्जा बा, मने श्रेस्ता नैहो । ओहेमारे आपन जग्गा डेखाके कौनो काम करे पाइल नैहुइटी ।”, मुक्तकमैया फूलमति डगौरा थारु कहली, “हमार किल नैहोके, अइसीन समस्या ढेर ठाउँमे बावै ।”
फूलमतिके कथा एकठो परिवारके किल नैहो । कमैया मुक्तिके २६ बरस पूरा हुइलेसे फेन सयौँ मुक्तकमैया परिवार आभिन पुनःस्थापनाके टमान समस्या भोग्टी रहल बटै । कतिपयसँग परिचयपत्र बा, मने पुनःस्थापनामे समेटल नैहो । कतिपयसँग लालपुर्जा बा, मने श्रेस्ता नैहो । कतिपय पाइल जग्गा डुबान ओ लडिया कटानके जोखिममे रहल बा ।
इहे समस्या समाधानके गति आर्थिक वर्ष २०७५÷७६ पाछे झन् सुस्त बनल उहँँहुक्रनके गुनासो रहल बा । कारण अक्केठो डेखाजाइठ्, विसं २०७५ पाछे संघीय संरचनाअनुसार पुनःस्थापनाके अन्तिम जिम्मेवारी केकर हो कना अन्योल ।
“संघसे जिम्मेवारी प्रदेश ओ स्थानीय तहहे डेहल बटाइठ् । प्रदेशसे स्पष्ट रूपमे आपन दायित्व नैमानठ् । स्थानीय तहसँग न बजेट हो, न जग्गा वितरण कैना अधिकार”, मुक्तकमैया अधिकारकर्मी पशुपति चौधरी कहलै, “तीन तहबीच जिम्मेवारी स्पष्ट नैहोके पुनःस्थापनाके बाँकी काम लगभग ठप्प हुइल बा ।”
ऐतिहासिक उपलब्धि
विसं २०५७ सावन २ गते नेपाल सरकारसे अनुचित ऋण (सौकी) मिनाहासहित कमैया मुक्तिके घोषणा कैटी बँधुवा श्रम अन्त्यओर ऐतिहासिक कदम चालल रहे । ओकर एक बरसपाछे जारी कमैया श्रम (निषेध) ऐन, २०५८ से बँधुवा श्रमहे कानुनी रूपमे पूर्ण प्रतिबन्ध लगाइल ।
कमैयाउपरके सक्कु ऋण मिनाहा करगैल । पुरान लिखत ओ सम्झौता स्वतःअमान्य हुइल । सरकारसे पुनःस्थापनाके लाग घर, जमिन, नगद सहायता ओ सीप विकास कार्यक्रम सञ्चालन करल ।
सरकारी तथ्याङ्कअनुसार दाङ, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कञ्चनपुरके ३२ हजार ५०९ परिवारहे परिचयपत्र वितरण करल रहे । उ मध्ये पुनःस्थापनायोग्य ठहरल २७ हजार ५७० परिवारमध्ये २७ हजार २१ परिवार घर वा जग्गा प्राप्त करले बटै । २०७५÷७६ सम १९ हजार ५३१ जाने टमान सीप तालिम फेन लेले बटै ।
“इहीसे हजारौँ परिवारके जीवन बडलल् । काल्ह बँधुवा श्रमिक रहल आज व्यवसायी, जनप्रतिनिधि ओ सामाजिक नेतृत्वमे पुगल बटै”, अधिवक्ता बालाराम भट्टराई कहलै, “मने बाँकी रहल समस्या समाधान नैकरेबर इहे उपलब्धिउपर प्रश्न उठ्टी रहल बा ।”
उपलब्धिके चित्र ओ अढूरा यथार्थ
सरकारी अभिलेखसे अधिकांश पुनःस्थापनाके काम सम्पन्न हुइल डेखाइठ् । सरकारी तथ्याङ्कअनुसार दाङ, बाँके ओ कञ्चनपुरमे पुनःस्थापनाके काम लगभग ओराइल बा । बर्दियामे कुछ परिवार स्थानीय तहहे हस्तान्तरण करल बावै कलेसे कैलालीमे फेन अधिकांश काम सम्पन्न हुइल दाबी करल बा ।
सरकारी तथ्याङ्कअनुसार उहीसे आघे दाङ, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कञ्चनपुरके ३२ हजार ५०९ मुक्तकमैया परिवारहे परिचयपत्र वितरण करल रहे । उ मध्ये पुनःस्थापनायोग्य मानल क ओ ख वर्गके २७ हजार ५७० परिवारमध्ये २७ हजार २१ परिवार घर तथा जमिनके सुविधा पासेकल बटै । बर्दियामे ३० ओ कैलालीमे २७० सहित ३०० परिवारके काम किल स्थानीय तहमे हस्तान्तरण करल अभिलेख रहल बा ।
मुक्तकमैया समाजके तथ्याङ्कसे फरक तस्वीर डेखाइठ् । समाजके अनुसार पुनःस्थापनायोग्य ठहरल परिवारमध्ये फेन सक्कुजाने जग्गा पाइल नैहुइट । जमिन पैना योग्य ठह¥याइल २७ हजार ५७० कमैया परिवारमध्ये केवल २५ हजार १९५ अर्थात् ९१ प्रतिशत किल जमिन पैले बटै ।
यम्ने फेन ६६१ परिवार अनुपयुक्त जग्गा पैले बटै । चार हजार ४६३ परिवार परिचयपत्र पाइल नैहुइट । परिचयपत्र पाके फेन पुनःस्थापना प्याकेज नैपउइया चार सय ६३ परिवार बटै । १७३ परिवारके प्रमाणपत्र बदर करल बा । “यकर अर्थ सक्कु प्रमाण साथमे होके फेन नौ प्रतिशत मुक्तकमैया जमिन प्राप्त कैनासे बञ्चित हुइ पुगल बटै । अझ, परिचयपत्र पैना योग्य सक्ुक निस्सा साथमे रहल कमैया परिवारके संख्या फेन उल्लेख्य बा”, समाजके कैलाली अध्यक्ष चन्द्रप्रसाद चौधरी कहलै, “अक्के मापदण्ड पूरा करल परिवारमध्ये कोइ सक्कु सुविधा पैना ओ कोइ कुछ फेन नैपैना अवस्था न्यायसङ्गत हुइ नैसेकी ।”
२०७५ पाछे काहे रुकल गति
मुक्तकमैया पुनःस्थापनाके अधिकांश कार्यक्रम आर्थिक बरस २०७५÷७६ सम सञ्चालन हुइल । ओकरपाछे कार्यक्रम करिब निष्क्रिय बन्टी गैल बावै । राष्ट्रिय दलित नेटवर्कके कार्यकारी निर्देशक हुकुम सार्कीके अनुसार पर्याप्त बजेट रहटी रहटी फेन पुनःस्थापनाके काम स्थानीय तहमे सर्ना निर्णय करगैल, मने ओकर लाग न योजना बनागैल, न आवश्यक तयारी । “२०७५÷७६ सालके बजेटमे राज्यसे झण्डै पौनै तीन खर्ब बरोबरके रकम पुनःस्थापनाके लाग छुट्ट्यागैल, उहीहे कार्यान्वयन कैनाके सट्टा बिनापूर्वतयारी मुक्तकमैयालगायतके सक्कु काम मूलतः ओरागैल आब बाँकी रहल बचल काम स्थानीय तहसे कैना कहिके एकाएक घोषणा करगैल । उहे समयसे समस्या समाधानके गति ठप्प हुइल बा”, उहाँ कहलै ।
मुक्तकमैया, कम्लरी, हलिया ओ हरवाचरवावाके वस्तुस्थिति अध्ययन समितिके प्रतिवेदन, २०७८ से फेन उहे निष्कर्ष निकरले बा । उक्त प्रतिवेदनमे कहल बा, “पुनःस्थापनाके काम ओराइल अप्रत्याशित घोषणापाछे उ बरसके बाँकी बजेट फेन कार्यान्वयन हुइ नैसेकके अधिकांश स्थानमे फ्रिज हुइल । अइसीक पुनःस्थापनाकार्यके लाग पर्याप्त बजेट रहल बेला कमैया, हलिया, कम्लरी पुनःस्थापनाकार्य सम्पन्न कैना एक अमूल्य अवसर गुमल ।”
सङ्घ सरकारसे जिम्मेवारी प्रदेश ओ स्थानीय तहमे गैल बटैटी आइल बा । तथापि, पुनःस्थापना, सीप विकास ओ जीविकोपार्जनके क्षेत्रमे सङ्घीय सरकारके प्रतिनिधिके रूपमे स्थानीयस्तरमे सहजीकरणके काम हुइटी रहल कैलालीके प्रमुख जिल्ला अधिकारी हिरालाल रेग्मीके कहाइ रहल बा । “हम्रे मुक्तकमैया क्षेत्रमे क्रियाशील सङ्घ संस्थाके व्यक्ति ओ अधिकारकर्मीके गुनासाअनुसार केन्द्र सरकारहे डेहे पर्ना सुझाव डेटी रहल बटी । क्षेत्रगत जिम्मेवारीअनुसार दायित्व निर्वाह करे परठ्”, उहाँ कहलै ।
सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे भर स्रोत ओ नीतिगत अन्योलताकाबीच अपने कार्यविधिसे काम करटी रहल जनाइल बा । भूमि व्यवस्था, कृषि तथा सहकारी मन्त्रालयके सचिव शंकर साहके अनुसार प्रदेश सरकारसे विकास साझेदारसँगके सहकार्यमे कञ्चनपुरमे ५० घर निर्माण करसेकल बा ओ जीविकोपार्जन तथा तालिमके कार्यक्रम फेन सञ्चालन करटी रहल बा ।
उहाँ कहलै, “स्रोतसाधनलगायत कुछ नीतिगत अन्यौलता बावै, मने हम्रे अन्य विकास साझेदारसँग सहकार्य कैके पुनःस्थापनाके काम करटी रहल बटी । आर्थिक बरस २०८२÷८३मे किल विकास विकास साझेदारसँगके सहकार्यमे कञ्चनपुरके शुक्लाफाँटा ओ बेलौरीमे ५० घर निर्माण करले बटी । इ बरस फेन उहीहे निरन्तरता डेटी थप घर बनैना योजना रहल बा । तालिम तथा जीविकोपार्जनके काममे फेन हम्रे सहयोग करटी रहल बटी ।”
केन्द्र ओ प्रदेश सरकारसे ढेर जैसिन दायित्व स्थानीय तहमे हस्तान्तरण करले बा, मने स्थानीय तहके अपने बाध्यता बावै । “हमारसँग न पर्याप्त बजेट हो, न जग्गा वितरण कैना कानुनी अधिकार”, जानकी गाउँपालिकाके अध्यक्ष गणेश चौधरी कहलै, “केन्द्र सरकारसे मुक्तकमैयाहे अन्य भूमिहीनसरह ठानके काम करेबर समस्या डेखल हो । विशेष कार्यक्रममार्फत समस्या समाधान कैना आवश्यक बा ।”
हाल मुख्य कैके तीन बरवार चुनौती बावै । परिचयपत्र होके फेन पुनःस्थापना प्याकेज नैपाइल, लालपुर्जा होके फेन श्रेस्ता कायम करल ओ डुबान, लडिया कटान वा अनुपयुक्त स्थानमे जग्गा पाइल परिवारके समस्या सम्बोधन ।
यकर लाग तीन तहके सरकारबीच स्पष्ट जिम्मेवारी बाँडफाँट ओ विशेष संयन्त्र आवश्यक रहल अधिकारकर्मीके कहाइ रहल बा । “मुक्तिके घोषणा कैना राज्यसे पुनःस्थापनाके अन्तिम जिम्मेवारी फेन स्पष्ट करे परल”, अधिकारकर्मी चौधरी कहलै, “यकर लाग छुट्टे आयोग वा अधिकार सम्पन्न संयन्त्र आवश्यक बा ।”
अधिवक्ता भट्टराई फेन अधिकांश काम सम्पन्न होसेकल ओरसे बाँकी रहल परिवारके समस्या समाधान कैना ढिलाइ नैकरे पर्ना बटैठै । “अधिकांश काम सम्पन्न होसेकल बावै । ओकर लाग सरकारहे सक्कु जाने धन्यवाद डेटी रहल बटै, मने कम हुइलेसे फेन जे अधिकार नैपैले हुइट, उहाँहुक्रे टे राज्यसँग असन्तुष्ट हुइना हुइलै ओहेमारे उहीहे सम्बोधन कैना ढिलाइ नैकरे परल ।”
मुक्तकमैया डगौरा कहलै आभिन अक्के अपेक्षामे रहल बटै । “हम्रहीनहे एकदम माग ओ गुनासा रख्टी रहना मन नैहो”, उहाँ कहलै, “हमार पुर्जा ओ श्रेस्ता मिला डेलेसे पुगठ् । राज्यसे मुक्त घोषणा करल जस्टे औरेक समस्या फेन समाधान करे परल । ओकरपाछे हम्रे फेन औरे नागरिकसरह अपने जीवन आघे बह्राइ सेकब ।”
कमैया आन्दोलनसे नेपालसे बँधुवा श्रम कानुनी रूपमे अन्त्य करल, मने पुनःस्थापनाके अन्तिम चरणमे आके जिम्मेवारी बाँडफाँटसे नयाँ चुनौती जन्माइल डेखजाइठ् । ओहेमारे अब्बेक बहस मुक्तिके नैहो, अढुरा पुनःस्थापनाके अन्त्य कैसिक कैन कनामे केन्द्रित रहल बा । आब समस्या बाँकी नैहो कना सरकारी दाबी ओ समस्या आभिन बा कना मुक्तकमैयाके तथ्याङ्कबिचके वास्तविकता खोज्टी समस्या समाधान जोड डेना आवश्यक रहल अधिकारकर्मीके मत रहल बा ।
