प्रदेश सरकारसे अधिकार मिचल दाबी करटी मेयर हमाल सर्वोच्चमे
पहुरा समाचारदाता
धनगढी, १ फागुन । धनगढी उपमहानगरपालिकाके प्रमुख गोपाल हमाल ‘सुदूरपश्चिम प्रदेश स्थानीय सेवा (गठन तथा सञ्चालन) ऐन, २०८१’ संविधानविपरीत हुइल दाबी करटी सर्वोच्च अदालतमे रिट दायर करले बटै । उ रिटहे सर्वोच्च अदालतके संवैधानिक इजलाससे अग्राधिकारमे धारके सुनुवाइ कैना निर्णय करले बा ।
हमालके ओरसे बहस करटी वरिष्ठ अधिवक्ता ज्योति बानियाँ प्रदेश सरकारसे ल्यानल ऐनसे धनगढी उपमहानगरपालिका सहित सुदूरपश्चिमके ८८ स्थानीय तहहे करारके कर्मचारी भर्ना कैना अवरोध सिर्जना करल बटैलै । उहाँक अनुसार स्थानीय तहमे प्राविधिक, स्वास्थ्य तथा श्रेणीविहीन कर्मचारीके अभाव हुईबेर तत्काल करारमे नियुक्ति करेपर्ना अवस्था रहठ । मने नयाँ ऐनसे मन्त्रालयके अनिवार्य सहमति बिना करारमे समेत कर्मचारी धारे नैपैना व्यवस्था करके स्थानीय सरकारके कार्यक्षमतामे बाधा पुगाइल बा ।
बानियाँसे स्थानीय तहके जनप्रतिनिधिहे अपने आवश्यकता अनुसार कर्मचारी व्यवस्थापन करे नैसेक्ना बनाइल कहटी प्रश्न उठैलै– यदि नगरपालिकासे कति माली, स्वीपर वा प्राविधिक आवश्यक बटै कना निर्णय कैनाफे प्रदेशके स्वीकृति अशरा लागे परठ कलेसे स्थानीय सरकारके औचित्य का रही ?
मेयर हमालसे संविधानके अनुसूची ८ के क्रम संख्या ५ मे ‘स्थानीय सेवाके व्यवस्थापन’ स्थानीय तहके एकल अधिकारके सूचीमे स्पष्ट रूपमे उल्लेख करल जिकिर करले बटै । मने प्रदेश ऐनसे कर्मचारी नियुक्ति, सरुवा, बढुवा ओ प्रशासनिक नियन्त्रण प्रदेशके मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्के कार्यालयमे केन्द्रित करल आरोप रिटमे उल्लेख बा ।
रिटमे प्रदेश ऐनका दफा ३, ४, ८९४०, १४, १५, २४ तथा १३९२० मे प्रयोग करल ‘मन्त्रालय’ शब्दसे स्थानीय तहके स्वायत्तताउप्पर हस्तक्षेप करल दाबी करल बा । विशेष करके दफा ३ से स्थानीय तहके प्रशासन सञ्चालनमे प्रदेश मन्त्रालयहे ‘मुख्य निकाय’ मानल व्यवस्था संविधानके धारा २२१ ओ २२६ विपरीत रहल उल्लेख करल बा ।
ओस्टेक, कर्मचारी सरुवासम्बन्धी दफा २४ से प्रदेशहे चक्रीय प्रणालीके आधारमे एक स्थानीय तहसे दुसरमे कर्मचारी सरुवा कैना अधिकार डेहल विषयफे विवादित बनल बा । रिटमे यी व्यवस्थासे कर्मचारीहे स्थानीय सरकारसे प्रदेशके मन्त्री ओ सचिवप्रति ढेर उत्तरदायी बनैना जोखिम औँलयइटी प्रशासनमे राजनीतिकरण बह्रना ओ स्थानीय जवाफदेहिता कमजोर हुइना ओर करल बा ।
यी आघे सर्वोच्च अदालतसे ‘अरविन्द यादव विरुद्ध वीरगञ्ज महानगरपालिका’ मुद्दामे स्थानीय सेवाके व्यवस्थापन स्थानीय तहके अधिकार हुइना सिद्धान्त प्रतिपादन करल उल्लेख करटी उ निर्णयके भावना विपरीत प्रदेश ऐन आइल दाबी हमाल करले बटै ।