थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ३० माघ २६४९, बिफे ]
[ वि.सं २९ माघ २०८२, बिहीबार ]
[ 12 Feb 2026, Thursday ]

विचार

दाङसे बुढान

दाङसे बुढान

कौनो फेन दुई चीज ठक्कर खैथा कलेसे उहिमसे कौनो दोस्रा चिजके सृष्टि हुइथा । जसिन की काठ काठम जुझा देलसे आगी बन्था पथ्रा जुझलसे फेन आगी निक्रथा और अस्तहके पानी और आगी जुझलसे बाफ निक्रथा । उह ओर्से हरेक चिजके जुझाई हन कथकी संघर्ष । चाहे
परडेसि जिन्गिक् भोगाइ ओ सिखाइ

परडेसि जिन्गिक् भोगाइ ओ सिखाइ

आज से डस साल पहिलक बाट हो । जब मै आपन ब्यक्तिगट परिस्ठिटि ओ समस्याले बाहर डेस जैना सोच बनैनुँ, उ ब्याला मनम बहुट उट्साह रहे कि बिडेस जाइटु, ढेर सारा पैसा कमाक अइम । उ ब्यालक सोचाइ बिडेस म ढेर पैसा कमाइ हुइट कना हस लाग । हुइना ट नेपाल म
भुँईचेप्ठा ओ निब्बर डुब्बर मनैन्क बट्कोहि

भुँईचेप्ठा ओ निब्बर डुब्बर मनैन्क बट्कोहि

बट्कोहि लिखबेर म्वार खिस्सम पाठ खेलुइया निब्बर डुब्बर भुँईचेप्ठा मनैन समझ्क ढयार आँस चुहैनु । ओइनक दुख बट्ठा सह नै सेक्क डिया बुटाक रुइल बाटु । आज फे म्वार बट्कोहिम पाठ खेलुइयन झलझल्यह्यठ डेखहस लागट । ढ्यार जहन मै न्याय डिहाइ खोज्ल
साहित्यके ‘डेसाहुर’मे शेखर

साहित्यके ‘डेसाहुर’मे शेखर

शेखर भाइक ‘गयर्वा बुडु’ पहिल खिस्सा संग्रह पह्रके लागल रहे, भाइक मरमसाला ओरा गैल हुइहिन । आब हुँकार लेखन अट्रे हुइहिन । काजेकि पहिल खिस्सा संग्रह निकारके उ बिर्कुल सम्पर्कबिहिन हो गैल रहिट । मने सोचलसे ठिक उल्टा हुइल । थारु
नाटक करोटक साक्षिपात्र

नाटक करोटक साक्षिपात्र

डुइ बरस आग माघ ठे डुइठो जार खाइल नाटक “करोट” । निमाङ थारु ओ खस नेपाली भाषम मञ्चन हुइल नाटक करोट २०७५ साल पुस ६ गतेसे २१ गतेसम् सर्वनाम थिएटर, काठमाडौँ ओ माघ १६ गतेसे २२ गतेसम् घोराही ओ तुलसीपुरम प्रदर्शन हुइल । काठमाडौँ केन्द्रित
जय गुर्बाबाः अभिवादन अभ्यास

जय गुर्बाबाः अभिवादन अभ्यास

पृष्ठभूमि ६० के दशक पाछे चर्चाके रुपमे अइटी रहल शब्द हो, जय गुर्बाबा । हरेक यूवा वर्गमे खास करके यूवा साहित्यकार तथा लेखक वर्गमे यी शब्द एकदम मुखारित हुइल बा । किहिनहे अभिवादन करे परलमे जय गुर्बाबा कना करजाइठ । ६० के दशक से आघे थारू
भोजहा लगन ओ सामाजिक मान्यता

भोजहा लगन ओ सामाजिक मान्यता

फागुन आइठ टो भोज सम्झबो । भोज कहटी कि लगनके बाट उठे लागठ । कोइ कहे लागठ, असौं लगन नाइ हो । कोइ कहे लागठ, लगन बा मने बरा कम डिन बा । फागुनके लग्गे बस अस्टे अस्टे बाट उठा करठ । पहिलेक चलन फरक रहे । फागुन अइटी कि थारु बस्ती चैनार । न लगन न सगन ।
ब्रिटिस सरकारहे रञ्जित चौधरी कैसिक पराजित करलैं ?

ब्रिटिस सरकारहे रञ्जित चौधरी कैसिक पराजित करलैं ?

अधिकांश पर्सागढीके बारे जन्ले हुइबी । मने नेपालके भूभाग ब्रिटिस सरकारसे कब्जा करना क्रममे नेपाली अंग्रेजहे पराजय करना टमान गढीमध्येके एक हो पर्सागढी । यिहिनहे और विस्तृतरुपमे कलेसे वि.सं. १८७१ मे नेपाल सरकार ओ भारतके तत्कालीन
जंग्रारके जाँगर ओ टिठमिठ सम्झना

जंग्रारके जाँगर ओ टिठमिठ सम्झना

बर्दिया, जोतपुरके जंग्रार मनै सोम जोगेठ्वा, जे भूलबस अपन नाउँक पाछे डेमनरौरा लिख मर्नै, हुँकहिनसे सँगे सुर्खेतमे एक बरस संगसंगे बिटैना समय जुरल । एक बरसमे महसुस हुइल कि मनै उ फुरेसे जंग्रारे बाटैं । जंग्रार हुइलेक ओरसे हुई हुँकार
थारू पत्रकार ओ भासिक पत्रकारिताके अभ्यास

थारू पत्रकार ओ भासिक पत्रकारिताके अभ्यास

ओंरवा लेहेबेर नेपाल भर थारु पत्रकार कठेक बटाँ ? महि लागठ, यकर ‘लेटेस्ट’ यकिन तथ्यांक थारु पत्रकार संघ नेपालके ठेन नै हुइस । थारु पत्रकारन्के यकिन संख्या ओ कौन थारु पत्रकार खास कैके अपन थारु मातृभासम पत्रकारिता करटि बटा ? थारु पत्रकार