बिसय प्रवेसः थारु गिटके प्रकासिट पोस्टाके इटिहास बिल्टैना हो कलेसे थारू कल्याणकारिणी सभा जिल्ला समिति दाङ २०२४ सालओर ‘सखिया गिट’के प्रकासन कैके लोकसाहित्यहे लावा डगर डेखाइल । ओस्टक पुरुबओर २०२५ सालमे प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह
मानव सभ्यताक इतिहास वक्ररेखा पार कैक बनठ । हरेक युगमा उन्नत संस्कार ओ संस्कृति बनकलाग उ ब्यालक मानव समुदाय विद्रोह कर्ठ, सचेत ओ युगद्रष्टाहुक्र अगुवाइ कैक समाज रुपान्तरण कर्ठ । वर्गीय समाजम वर्र्गीय चेतनाले ओतप्रोत हुइल क्रान्तिकारीहुक्र
थारू जात नेपालके जनजाति अन्तर्गत परठ । यी जाति जबफेन राज्य सत्तासे अपहेलित तथा अपेक्षित जात हो । तथापि ईतिहासके टमान कालखण्डमे हुइल राजनीतिक आन्दोलन ओ यिहिनसे नानल परिवर्तनसंगे यी समसदाय अपन भाषा, संस्कृति, कला, साहित्य, गीत, संगीत
२०१५ मार्च ८, अन्तर्राष्ट्रिय नारी दिवसमे दाङसे सहभागिता हुइ पाटनके कृष्ण मन्दिर परिसरमे बिहन्ने आपुग्नु । नेपालके टमान जिल्लासे टमान जाति, धर्म, संस्कृति किल नैहुके कलाके टमान विधाके हम्रे सहत्तरी जाने व्यक्तिहुक्रे एक ठाउँमे
विषय प्रवेशः चाडपर्व (टरटिहुवार) मनैन्हे चौकस ओ चम्पन बनाइठ । हरेक जाति समुदायके अपन मौलिक तौरतरिकासे मन्ना टमान चाडपर्व रहठ । थारू एक अलग पहिचान डेना मेरिक अपन भाषा संस्कृति एवम् सामाजिक रीतिरिवाज रहल जात हो । थारू जात अन्य जातहुकन
केही दिनअघि लक्ष्मण थारुसँग काठमाडाैंमा संक्षिप्त भेटमा टीकापुर घटनाकाे सम्झना भयाे । जिस्काजिस्कीमा उनले प्वाक्क भने, ‘तपाईंसँग भेटेकाे भाेलिपल्ट म समातिएँ ।’ थारु नेता लक्ष्मणले तीन वर्ष कैद भुक्तानी गरिसकेका छन्, यही टीकापुर