कमैया मुक्तिके आन्दोलनके प्रयास ओ मुक्तीके घोषणाराणा शासनकालमे कमैया मुक्तीके लाग टमान प्रयास ओ आन्दोलन हुइल पाजाइठ । सर्वप्रथम वि.सं. १०९९ ओर बर्दिया जिल्लामे राधाकुष्ण थारुसे भुमिहिन थारुहुकनके गोप्य भेला करके जमिन जोटुइयाके
आदिमकासे अपन जीवनयापन करटी आदिवासी । थारू जात नेपालके चौठा ढेर संख्या रहल जात । खास करके बनुवाक बिच्चे फँटूवा लडिया टलुवाक किनारे बैठुईया जात । रोजके छाक टारेक लग प्रकृतिमे भर परना थारू बिशेष करके खेतीपातीमे करटी आईल बा । सदियौसे
इहे चैत १३ से १५ गतेसम टीकापुरमे टीकापुर साहित्य महोत्सवके टिस्रा संस्करन हुइल । ‘साहित्यमार्फत् सामाजिक सद्भाव’ मुल नारा रहल अप्सरिक महोत्सव इ कारन खास रहे कि एक डिनके पुरा कार्यक्रम थारु साहित्य, संस्कृति विसेस रहे । ७ ठो सेसनमे
सामाजिक सन्जाल आज्कल सुचनाके बरवार माध्यम बनल बा । इहे क्रममे २०८२ पुस ६ गते वकिल जोहारीलाल चौधरीके असमायिक निधनके खबर सामाजिक सन्जालसे मिलल् । इ खबरले मन मुर्झा गइल । काजे कि उहाँसे हम्रे संग्संग्हिक रहि । महिसे केवल एक बरसले
हालै नेपालमा २०८२ भाद्र २३ र २४ गते भएको जेनजी आन्दोलनका बारेमा सम्पूर्णसबै लाई सर्बबिधितै छ । यसै आन्दोलन बाट बेलौरी नगरपालिका समेत अछुतो रहन सकेन । मेरो बुझाईमा जेनजी समूहको थुप्रै माग मध्ये प्रमुख दुई वटा माग रहेको पाएको
एक महिना आगे एकजाने १७ वर्षके किशोरीहे आफन्त मनोविमर्शके लाग लेके अइलैं । किशोरी एकडम निराश ओ कमजोर आत्मविश्वासके अवस्थामे रहि । मै एकान्तमे सुरक्षित वातावरण निर्माण कैके बाट करे लग्नु, उहाँक बाटमे अनुभूतिपुर्वक सुन्नु ओ कौनो