थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०५ सावन २६५०, मंगर ]
[ वि.सं ५ श्रावण २०८३, मंगलवार ]
[ 21 Jul 2026, Tuesday ]

विचार

कमैया प्रथा इतिहास, पुनस्र्थापनाके प्रयास ओ वर्तमान अवस्था

कमैया प्रथा इतिहास, पुनस्र्थापनाके प्रयास ओ वर्तमान अवस्था

कमैया मुक्तिके आन्दोलनके प्रयास ओ मुक्तीके घोषणाराणा शासनकालमे कमैया मुक्तीके लाग टमान प्रयास ओ आन्दोलन हुइल पाजाइठ । सर्वप्रथम वि.सं. १०९९ ओर बर्दिया जिल्लामे राधाकुष्ण थारुसे भुमिहिन थारुहुकनके गोप्य भेला करके जमिन जोटुइयाके
हरढौवा\हरडहुवा रौनक हेराईल

हरढौवा\हरडहुवा रौनक हेराईल

हरढौवा\हरडहुवा थारू गाउँमे बर्खामे खेट्वाम धान लगाके सेकल पाछे गाउँ भरिक मनै संगे जीटा मारके खेट सेकाई खैना एकठो विषेश टेहुवार हो । बर्खाभर घाम पानी हिलाकिचा सहके सरटारे हुके खुशीयाली स्वरूप मना जैना यी टेहुवारमे थारूनके जीटा
थारू जल जमिन जंगल प्रकृतिमे हँस्टी खेल्टी कमैटी

थारू जल जमिन जंगल प्रकृतिमे हँस्टी खेल्टी कमैटी

आदिमकासे अपन जीवनयापन करटी आदिवासी । थारू जात नेपालके चौठा ढेर संख्या रहल जात । खास करके बनुवाक बिच्चे फँटूवा लडिया टलुवाक किनारे बैठुईया जात  । रोजके छाक टारेक लग प्रकृतिमे भर परना थारू बिशेष करके खेतीपातीमे करटी आईल बा । सदियौसे
नारीवादी दृष्टिकोणके आधारम बुढनी उपन्यासके विश्लेषण

नारीवादी दृष्टिकोणके आधारम बुढनी उपन्यासके विश्लेषण

लेखसार यि अध्ययनम इन्दु थारूद्वारा लिखल बुढनी उपन्यासके नारीवादी मूल्य, मान्यता र दृष्टिकोणके आधारम विश्लेषण कैगिल बा । यी अध्ययनम पुस्तकालय विधिके प्रयोग कैक गुणात्मक प्रकृतिके वर्णनात्मक ओ संश्लेषणात्मक ढाँचामा कैगिल बा ।
लाल आयोग प्रतिवेदन सार्वजनिकः शुभ साइत कहिया ?

लाल आयोग प्रतिवेदन सार्वजनिकः शुभ साइत कहिया ?

इहे चैत १३ से १५ गतेसम टीकापुरमे टीकापुर साहित्य महोत्सवके टिस्रा संस्करन हुइल । ‘साहित्यमार्फत् सामाजिक सद्भाव’ मुल नारा रहल अप्सरिक महोत्सव इ कारन खास रहे कि एक डिनके पुरा कार्यक्रम थारु साहित्य, संस्कृति विसेस रहे । ७ ठो सेसनमे
जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

‘बाबा टैं का करटे ?’‘कुछ नाई, अस्टे बैठल बाटुँ, टीका भाइसे बट्वाइटु’ मै छावाहे जवाफ डेनु ।‘जोहारीक बारेम कुछ पटा पैलेबाटे ?’‘नाइ टो’ मै कनु ।‘बरा गरु बाटैं कना बाट आइटा । पंकज फोन कर्ले रहे, अस्पतालमेबाटैं हुँ ।’पंकज मोर भान्जा, वकिल
जोहारी वकिलः थारु समाज ओ अधिकारके सवाल

जोहारी वकिलः थारु समाज ओ अधिकारके सवाल

सामाजिक सन्जाल आज्कल सुचनाके बरवार माध्यम बनल बा । इहे क्रममे २०८२ पुस ६ गते वकिल जोहारीलाल चौधरीके असमायिक निधनके खबर सामाजिक सन्जालसे मिलल् । इ खबरले मन मुर्झा गइल । काजे कि उहाँसे हम्रे संग्संग्हिक रहि । महिसे केवल एक बरसले
वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

वकिल सापके ठैली बिठ्कोरेबेर

वकिल साप जोहारीलाल चौधरीसे मोर पहिल भेंट कहिया हुइल, कहाँ हुइल । इ बात महि याद नैहो । औपचारिक परिचय नैहुइलक ओर्से हुइ सायद पहिल भेंटके सम्झ्ना याद नैरहल । जहाँ फेन कानुनी सल्लाहकार जब २०५९ साल चैत २९ से प्रकाशक दिलबहादुर चौधरी, सम्पादक
बेलौरी नगरपालिका र जेनजी : माग, भ्रम, सत्यता र सबैलाई प्रश्न

बेलौरी नगरपालिका र जेनजी : माग, भ्रम, सत्यता र सबैलाई प्रश्न

हालै नेपालमा २०८२ भाद्र २३ र २४ गते भएको जेनजी आन्दोलनका बारेमा सम्पूर्णसबै लाई सर्बबिधितै छ । यसै आन्दोलन बाट बेलौरी नगरपालिका समेत अछुतो रहन सकेन  । मेरो बुझाईमा जेनजी समूहको थुप्रै माग मध्ये प्रमुख दुई वटा माग रहेको पाएको
अनुभूति, अनुभव ओ सन्देश

अनुभूति, अनुभव ओ सन्देश

एक महिना आगे एकजाने १७ वर्षके किशोरीहे आफन्त मनोविमर्शके लाग लेके अइलैं । किशोरी एकडम निराश ओ कमजोर आत्मविश्वासके अवस्थामे रहि । मै एकान्तमे सुरक्षित वातावरण निर्माण कैके बाट करे लग्नु, उहाँक बाटमे अनुभूतिपुर्वक सुन्नु ओ कौनो