थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १७ चैत २६४९, मंगर ]
[ वि.सं १७ चैत्र २०८२, मंगलवार ]
[ 31 Mar 2026, Tuesday ]

विचार

थारु गिटके विस्लेसन जरुरि

थारु गिटके विस्लेसन जरुरि

बिसय प्रवेसः थारु गिटके प्रकासिट पोस्टाके इटिहास बिल्टैना हो कलेसे थारू कल्याणकारिणी सभा जिल्ला समिति दाङ २०२४ सालओर ‘सखिया गिट’के प्रकासन कैके लोकसाहित्यहे लावा डगर डेखाइल । ओस्टक पुरुबओर २०२५ सालमे प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह
अट्वारीमे दिदीसे माला ओ टीका

अट्वारीमे दिदीसे माला ओ टीका

थारु समुदायके पवित्र पर्व अट्वारीके बेला मै मोर बर्की दिदी शान्ति चौधरीसँग यिबेरके अट्वारीमे डौना ओ लौङ्गारा फूलक माला ओ चाउरके पीठक टीका लगा डेना अनुरोध करले रहेँ । अट्वारीके व्रतमे दिदीबहिनियन लाग निकारल अग्रासन (कोशेली–फलफूल,
सामाजिक रुपान्तरणम गोचाली परिवारक योगदान ओ आगामी कार्यभार

सामाजिक रुपान्तरणम गोचाली परिवारक योगदान ओ आगामी कार्यभार

मानव सभ्यताक इतिहास वक्ररेखा पार कैक बनठ । हरेक युगमा उन्नत संस्कार ओ संस्कृति बनकलाग उ ब्यालक मानव समुदाय विद्रोह कर्ठ, सचेत ओ युगद्रष्टाहुक्र अगुवाइ कैक समाज रुपान्तरण कर्ठ । वर्गीय समाजम वर्र्गीय चेतनाले ओतप्रोत हुइल क्रान्तिकारीहुक्र
थारू लेखक संघः आब यकर डगर

थारू लेखक संघः आब यकर डगर

थारू जात नेपालके जनजाति अन्तर्गत परठ । यी जाति जबफेन राज्य सत्तासे अपहेलित तथा अपेक्षित जात हो । तथापि ईतिहासके टमान कालखण्डमे हुइल राजनीतिक आन्दोलन ओ यिहिनसे नानल परिवर्तनसंगे यी समसदाय अपन भाषा, संस्कृति, कला, साहित्य, गीत, संगीत
जन्यावन जुट्यलाम जैना काजे कर्रा ?

जन्यावन जुट्यलाम जैना काजे कर्रा ?

साहित्यके परिभाषा ढेर नै जन्लसेफे साहित्य ह ढेर मैयाँ कर्नामढ्ये मै फे एक हुइटु । टुटल फुटल शब्द जोर भर्खर सिक्टी बाटु । जोरबिटोरक कभुकाल गजल, कबिता लिख जाइट् । हरेक साल हुइना थारु साहित्यक् पाँचवा म्याला असौक साल सुर्खेतम हुइना
मोर अष्टिम्की कला यात्राः अनुभव ओ अनुभूति

मोर अष्टिम्की कला यात्राः अनुभव ओ अनुभूति

२०१५ मार्च ८, अन्तर्राष्ट्रिय नारी दिवसमे दाङसे सहभागिता हुइ पाटनके कृष्ण मन्दिर परिसरमे बिहन्ने आपुग्नु । नेपालके टमान जिल्लासे टमान जाति, धर्म, संस्कृति किल नैहुके कलाके टमान विधाके हम्रे सहत्तरी जाने व्यक्तिहुक्रे एक ठाउँमे
अष्टिम्की पर्व ओ अष्टिम्की चित्रकलाके महत्व

अष्टिम्की पर्व ओ अष्टिम्की चित्रकलाके महत्व

विषय प्रवेशः चाडपर्व (टरटिहुवार) मनैन्हे चौकस ओ चम्पन बनाइठ । हरेक जाति समुदायके अपन मौलिक तौरतरिकासे मन्ना टमान चाडपर्व रहठ । थारू एक अलग पहिचान डेना मेरिक अपन भाषा संस्कृति एवम् सामाजिक रीतिरिवाज रहल जात हो । थारू जात अन्य जातहुकन
थारु भासा, संस्कृटिके डस्टावेजिकरणमे खै बल्गर खम्हा ?

थारु भासा, संस्कृटिके डस्टावेजिकरणमे खै बल्गर खम्हा ?

कौनो जबाना रह, जब आपन भासा बोल्लसे वा भासिक क्रान्टि कर्लसे जेल जाए पर्ना । जब जब मै थारु भासाके थारु साहित्यक जुट्यालाम सहभागि हुइठुँ, टब टब लागट महिन आजसे लगभग कैयौँ बरस आघ कसिन रहट म्वार भासक बैठावन ? इ चिज ट आभिन खोज्ना बाँकि जो बा
टीकापुर थारु विद्रोहः इतिहास कि प्रपञ्च ?

टीकापुर थारु विद्रोहः इतिहास कि प्रपञ्च ?

टीकापुरमे ७ भदौ, २०७२ सालमे हुइल थारु विद्रोहके छ वर्ष पुरा करले बा । यी छ वर्षहे समीक्षा करेबेर मनोदशा बल्गर हुके आइल नइपाजाइठ । थरुहट आन्दोलन उठ्न कोशिश करेलेफे सेकल नइहो । टबमारे, निर्दोष राजबन्दीहुकनके रिहाईसम हेरेबेर थारु
६ वर्षपछि टीकापुरः कहिले निभ्ला त्यो संरचनागत हिंसाको आगो

६ वर्षपछि टीकापुरः कहिले निभ्ला त्यो संरचनागत हिंसाको आगो

केही दिनअघि लक्ष्मण थारुसँग काठमाडाैंमा संक्षिप्त भेटमा टीकापुर घटनाकाे सम्झना भयाे । जिस्काजिस्कीमा उनले प्वाक्क भने, ‘तपाईंसँग भेटेकाे भाेलिपल्ट म समातिएँ ।’ थारु नेता लक्ष्मणले तीन वर्ष कैद भुक्तानी गरिसकेका छन्, यही टीकापुर