थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ३० माघ २६४९, बिफे ]
[ वि.सं २९ माघ २०८२, बिहीबार ]
[ 12 Feb 2026, Thursday ]

विचार

टीकापुरः अदृश्य कथा

टीकापुरः अदृश्य कथा

रमदैयाके घर पुगेबेर अन्ढार होसेकल रहे । हुकहान घरक आजरपाजरके घरम बत्ती बरसेकल रहे । रमदैयक् घर भर अध्यार रहिन् । आपन घरक पन्जेर घरक बरल बत्तीक आजरारमे, रमदैया आपन अंग्नम बेरी पकाइटही फु फु आगी फुक्टी । टीकापुर घटना पहिले रमदैयक घर
थारू समुदायमे बालपर्व ‘गुरही’

थारू समुदायमे बालपर्व ‘गुरही’

संस्कृति हरेक समुदायके आपन मौलिक पहिचान हो । कौनो फेन जातिके जातीय पहिचान कला, संस्स्कृति ओ भाषासे जोडल रहठ् । थारु समुदायमे फेन अस्टे ढिउर संस्कृति रहल बावै । जौन अब्बे प्रायः लोप हुइना अवस्थामे बावै । कुछ रुपमे हुइलेसे फेन उ संस्कृति
थारू मानक भाषा बहस कौन चरणमे पुगल ?

थारू मानक भाषा बहस कौन चरणमे पुगल ?

थारू लेखक संघ नेपालके आयोजनामे पाँचौँ संस्करणसम थारू मानक भाषा बहस प्रमुख स्थान ओगटले बा । यिहे सम्मलेनसे थारू मानक भाषाके जन्म डेहल कलेसे किहुहे आपत्ति नैहुइ । यकर प्रमुख श्रेय वरिष्ठ साहित्यकार तथा भाषा विद् डा. कृष्णराज सर्वहारी,
थारु बृहत शब्दकोष : एक ऐतिहासिक दस्तावेज

थारु बृहत शब्दकोष : एक ऐतिहासिक दस्तावेज

थारु कल्याणकारीणी सभा क्षेत्रीय कार्यालय दाङ देउखरके पहले बहुट लम्मा समयकबाड हालसाले थारु एडभान्सड डिक्सनरी अर्थात थारु वृहत शब्दकोष निकरलबा । जम्मा ५५७ पेज रलक यी शब्दकोषमे थारु शब्दके नेपाली ओ अंग्रेजीमे अर्थ लिखलबा । अस्टके
म्वर जनगणना म्वर सहभागिता २०७८

म्वर जनगणना म्वर सहभागिता २०७८

यी साल मनैन गन्नम (जनगणना) लगभग ५० हजार मनैन लगैल बा । ओम्नहसे, गणक सुपरभाइजर ८ हजार ओ गणक ३९ हजारसे फे ढ्यार मनैन घरघर जाक डाटा विटोर्ना जुम्माडेलबा । और जनगणनासे यी सालके गणनम पुछ्ना प्रश्न डान्चे फरक डेखाइट । मुख्य प्रश्न, सामुदायिक
मन्डर्या हरि बाज्या

मन्डर्या हरि बाज्या

ऊ डिन्वा असार ५ गते रह । काठमाडौँम राटभर पानि पर्लक ओर्से कर्या बड्रि आम्हि फटिक नि हुइल रह । मौसम बिभाग एक अठ्वारसे ढेर डिन पानि पर स्याकि कैक जना रख्लाहा । डेश कोभिड–१९ क महामारीले बन्दाबन्दीम रह । बाहेर जाइ नि पागिलक ओँर्से ढिल
जन्म दिन, पार्टी, शुभकामना

जन्म दिन, पार्टी, शुभकामना

हुइना ट मै आपन जन्मदिनक बारेम अपन ‘जीवनका वक्ररेखाहरू’ पोस्टाम लिख स्याकल बाटु । आजकाल फेसबुक मसे उइस (बधाइ) अइना हुइलक ओर्से महिहन याकर बारेम फेर से लिख्ना बाध्य बनाइटा । म्वार महन्ली दिदी कठि, धनकट्नी सिजनमे टैं जन्मल्या । मने कै
थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता

थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता

ओंरवा लेहेबेर थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता दुइ अलग अलग बिसय हो । मने यकर बिच गहिंर सम्बन्ध बा । इतिहास बिल्टैना हो कलेसे थारू भासक् पहिला पत्रिका गोचाली (२०२८) साहित्यिक आन्दोलनहे आवरण डेके प्रकाशन हुइल रहे
पँचवा राष्ट्रिय थारू साहित्य सम्मेलनके एक अनुभव

पँचवा राष्ट्रिय थारू साहित्य सम्मेलनके एक अनुभव

गोरी डराई मानव सभ्यताके विकासक सँगसँग हरेक जाति समुदायके भाषा, कला साहित्य, परम्परा, रहनसहन,संस्कृति, सभ्यताके विकास हुइ पुगल । भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति कलक त मनैन जोर्ना बलगर करी हो । नेपालफे एकठो भाषिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक
भजहर

भजहर

आजकल वसन्त ऋतुके हरियालीसँग गाउँघरमे भजहर पर्वके रौनक बह्रल बा । हिन्दुनके महान पर्व होली वर्षके अन्तिम पर्व हो । यकर आघे बितल तिहारह ओ अइटीरहलक समयह बिदाइ करना ओ नयाँ सालके आगमन (नयाँ वर्षह निउटा) करेबेला भजहर भग्ना चलन बा । भजहर