थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १० सावन २६४५, अत्वार ]
[ वि.सं १० श्रावण २०७८, आईतवार ]
[ 25 Jul 2021, Sunday ]

विचार

मन्डर्या हरि बाज्या

मन्डर्या हरि बाज्या

ऊ डिन्वा असार ५ गते रह । काठमाडौँम राटभर पानि पर्लक ओर्से कर्या बड्रि आम्हि फटिक नि हुइल रह । मौसम बिभाग एक अठ्वारसे ढेर डिन पानि पर स्याकि कैक जना रख्लाहा । डेश कोभिड–१९ क महामारीले बन्दाबन्दीम रह । बाहेर जाइ नि पागिलक ओँर्से ढिल
जन्म दिन, पार्टी, शुभकामना

जन्म दिन, पार्टी, शुभकामना

हुइना ट मै आपन जन्मदिनक बारेम अपन ‘जीवनका वक्ररेखाहरू’ पोस्टाम लिख स्याकल बाटु । आजकाल फेसबुक मसे उइस (बधाइ) अइना हुइलक ओर्से महिहन याकर बारेम फेर से लिख्ना बाध्य बनाइटा । म्वार महन्ली दिदी कठि, धनकट्नी सिजनमे टैं जन्मल्या । मने कै
थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता

थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता

ओंरवा लेहेबेर थारू साहित्यिक आन्दोलन ओ थारू साहित्यिक पत्रकारिता दुइ अलग अलग बिसय हो । मने यकर बिच गहिंर सम्बन्ध बा । इतिहास बिल्टैना हो कलेसे थारू भासक् पहिला पत्रिका गोचाली (२०२८) साहित्यिक आन्दोलनहे आवरण डेके प्रकाशन हुइल रहे
पँचवा राष्ट्रिय थारू साहित्य सम्मेलनके एक अनुभव

पँचवा राष्ट्रिय थारू साहित्य सम्मेलनके एक अनुभव

गोरी डराई मानव सभ्यताके विकासक सँगसँग हरेक जाति समुदायके भाषा, कला साहित्य, परम्परा, रहनसहन,संस्कृति, सभ्यताके विकास हुइ पुगल । भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति कलक त मनैन जोर्ना बलगर करी हो । नेपालफे एकठो भाषिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक
भजहर

भजहर

आजकल वसन्त ऋतुके हरियालीसँग गाउँघरमे भजहर पर्वके रौनक बह्रल बा । हिन्दुनके महान पर्व होली वर्षके अन्तिम पर्व हो । यकर आघे बितल तिहारह ओ अइटीरहलक समयह बिदाइ करना ओ नयाँ सालके आगमन (नयाँ वर्षह निउटा) करेबेला भजहर भग्ना चलन बा । भजहर
लावा बरस कलक का हो ?

लावा बरस कलक का हो ?

परापूर्व कालसे बहार देशम लावा बरसके रुपम (December last January 1st) पुष १५ ह मन्टी आइल डेखा परठ कलसे नेपाली समाजम बैशाख १ गते ओ थारुनके माघ १ गते लावा बरसके शुरु हुइट कना मान्यता बा । लावा बरस विश्वम आपन–आपन परम्परा अनुसार भव्य रुपसे मनैना चलन बा ।
थारु भाषाके मानकीकरण

थारु भाषाके मानकीकरण

पृष्ठभूमि : थारु नेपालके सबसे पुरान आदिबासी हुइ लेकिनफेन हमार थारु भाषाके मानक नै हो । यिहे कारणसे थारु भाषामे मैथिली, अवधी, भोजपुरी, नेपाली, हिन्दी ओ अंग्रेजी भाषाके प्रभाव बढ्ती जाइता । आझ थारु भाषाक मानक नै बनाबि कलेसे थारु भाषा
रंगहस चहकार होलिक रिँट

रंगहस चहकार होलिक रिँट

सेँडुर, रंग अबिर डेउडिउँटन टिक्ना, शुभ कामम बेल्सना रिँट अघट्यसे पुर्खन चलैटि अइल बाट । ओस्हक, गाउँसमाजम गँढुर्या, बरघर्या, चिरिक्या, चौकिडर्वा, केसौका, अगौहा, ककन्डर्वा, मँटावा, भल्मन्सा चुन्लसे फे खुशीक मौकम अबिर घँस्क राहरंगिटकर्ना,
कहाँ हेराइल अँगिया ?

कहाँ हेराइल अँगिया ?

माघक डिन ठेसे हमार थारु समुडायम एकठो कहनौटी बा कि आज ठेसे घामक ग्वारा जाम गिलिस कैक । माघ टिह्वार मनैन् घाम हँ फे हम्र आपन अँग्नम परगा डबैठि । थारु समुडायके बयान कर्ना हो कलसे कहाँसे सुरु करि कना हो जाईट । हरेक मेरमेरिक टिह्वार,
थारु महिलन्हे खै अधिकार ?

थारु महिलन्हे खै अधिकार ?

मै सुव्वर पल्ठु । ओकर मोलमोलाइ करना अधिकार नैहो । मुर्गी पल्ठु । उ छोट जीव बेच्ना अधिकार महिन नैहो । घरेक सबकाम— भात पकैना, भाँरा धोइना, लिपपोत करना, सबके लुग्रा धोइना लगायत सबके सब काम मै करठु मने घरके कौनो फेन निर्णय प्रक्रियामे