थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ३० माघ २६४९, बिफे ]
[ वि.सं २९ माघ २०८२, बिहीबार ]
[ 12 Feb 2026, Thursday ]

विचार

उच्च अदालतके फैसलाः औरे टीकापुर विद्रोहके संकेत

उच्च अदालतके फैसलाः औरे टीकापुर विद्रोहके संकेत

‘सिताराम भाइ माघ तिह्वार मनैलक महाध्यार बरस होगिल बा, यी साल दाजुभाइ मिल्के संग यिह कारागार म हुइलसेफे माघ तिह्वार मनाइ परल है ।’ पोहोर सालके माघ आघे रेशम दाजुहे डिल्ली बजार कारागारमे भेटे गिलबेला उहाँसँग हुइल सम्बाद हो यी । संगीत
किसान नेता राधाकृष्ण थारू

किसान नेता राधाकृष्ण थारू

राजनीतिहे कमाके खैना भाँरा बनैना टे टमान बाटैं, मने राजनीतिमे निष्ठापूर्वक आजीवन लागके प्राण उत्सर्ग करना राजनेताहुकनके कमी बा । बर्दियाके राधाकृष्ण थारु ओहेमध्ये एक रहिट जो भूमिहीन किसान सुकुमवासीके अगुवा रहिट । २०१५ सालमे
दाङ–देउखरके सफर

दाङ–देउखरके सफर

कबोजबो कहुँ जाइकटन् रबो टे मनम् खुट्का लागल रहठ । कब दिनपात पुगी टे हाली जैम कैहके सोंच्टी रबो । अस्टे–अस्टे सोंचले होकि का कुछ दिनसे यी जीउक् मजासे निन् नै परिस् । फागुन महिन्क समय ना कहे, ना टे ओत्रा जार, ना टे ओत्रा घाम । यात्रा
पहिचान हेरागिल

पहिचान हेरागिल

सबके अलग पहिचान रहठ । हमार थारु जातिनकेफे अपन अलग्गे पहिचान बा । अलग टरटिहुवार बा । बिल्कुले फरक नाचगान बा । अलग रितिरिवाज, चालचलन, पहिरन बा । फरक भाषा, फरक रहनसहन बा । हमार छुट्टे पहिचान बा । मने आब ओहे पहिचान हेराइ लागल बा । हमार पहिचान
थारु भासक् संरच्छन कसिक ?

थारु भासक् संरच्छन कसिक ?

ओंरवा लेहेबेरः डस्या, डेवारिक उपलच्छ्यमे बहुट जाने सुभकामना साटासाट करल हुइबि । फेसबुक, एसएमएस मार्फट फेन बहुट जाने सुभकामना लेहल, डेहल हुइबि । एक फेरा मनन् करि टे । का अपनेक पठाइल डस्या, डेवारिक सुभकामना अपने थारु भासम् रहे टे ? रहे
कठरिया थारुहुकनके लौवा वर्ष

कठरिया थारुहुकनके लौवा वर्ष

हिन्दी भाषाके त्योैहार शब्दसे अपभ्रंश हुइटी नेपाली भाषामे तिहार हुई पुगल कना कहाई बा । नेपालमे तिहार मनैना आ–¬अपने तरिका बा । कोई यिहीहे विशेष महत्व डेके, कोई मध्यम ओ कोई कम महत्व डेके मनैठै । फेरसे ढेर नेपाली यिहीहे मन्ना करठै ।
स्कुल लग्गे नैरलक साँसट

स्कुल लग्गे नैरलक साँसट

संसारके हरेक परानि जिन्गि पइले रठा । ओस्टके मनैक जलम पाके मै फेन इ ढरटिम अइना सुरबाड पइलुँ । केक्रो जिन्गि बह्रियासे बिटठ केक्रो मेरमेरिक समस्यासे पार करटि बिटठ । जब मै जन्मलुँ टे मोर सँगे डाइ, बाबा, बुडु, बुडि ओ एकठो भैया रहे ।
लर्कनक बह्राईसङ्ग मौलिक भाषा विकासम फे चेट लगाई

लर्कनक बह्राईसङ्ग मौलिक भाषा विकासम फे चेट लगाई

सक्कु जहनक डाईबाबाक मन आपन लर्कापर्कान सब चिजक गुन सिखाक चट्टुर बनाइना बाटम सुर्टा रठिन । गुन सिखि ट काल्ह जाक जिन्गि जिना लिरौसी हुइसेकि कठ । ओहओर्से, मुरिभर्क सौकि (ऋण) रलसे फे सेक नैसेक डाइबाबा आपन आपन लर्कापर्कान गुन सिखैना बहानम
थारू भाषा बहसमे सर्वहारीके केल विरोध काहे ?

थारू भाषा बहसमे सर्वहारीके केल विरोध काहे ?

सुनसरीके रामसागर चौधरीजीसे कृष्णराज सर्वहारीहे सम्बोधन करके भर्खर फेसबुकमे नम्मा स्ट्याटस लिखले बाटै । थारू भाषामे त थ द ध के बहिष्कारबादसंग मै सहमत नइहु कना प्रसंगमे उहाँक कहाई केन्द्रित बा । रामसागरजी, यहाँके सुझाव मननयोग्य
भाषाह प्रविधिसे जोर्ना जरुरी होगैल

भाषाह प्रविधिसे जोर्ना जरुरी होगैल

अप्न कौनो बाट मनैनसे हुकनक बुझ्ना भाषाम बट्वइबि कलसे अप्नक बाट हुकनक दिमाकम लग्हिन्, ओह बाट ओइन्क भाषाम बट्वइबि कलसे उ बाट ओइन्क मोटुम छुहिन् । यि कहाई दख्खिन अफ्रिकाह स्वतन्त्र ओ रंगभेदसे मुक्ति करुइया नेलसन मन्डेलाक हुइटिन ।