थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ०८ माघ २६४४, बिफे ]
[ वि.सं ८ माघ २०७७, बिहीबार ]
[ 21 Jan 2021, Thursday ]

साहित्य

माघ

माघ

माघ टु लौव वरष हुइटोमाघ टु मुक्तिक दिवस हुइटोमाघ टु सद्भावके प्रतिक हुइटोमाघ टु मेलमिलापके प्रतिक हुइटो । हरेक साल सबजन माघ मनैठहरेक साल टुुहार नाउँम महोत्सव कर्ठहरेक साल टुहार नाउम नाच नौटङ्की कर्ठहरेक साल लर्कासे बुह्राइलसम
पस्ना

पस्ना

सोन केक्रोे कल्पनामे नै फरठ्,केक्रो सपनामे फेन नै फरठ्,न ट फरठ्, केक्रोे भावनामेउ टे फरठ्,पस्नक बहटु लडियक् बिचमझुवामे । भुँख्ले पेट पस्ना चुहाकेजमिन उर्बर बने सेकठ्समठर हुइ सेकठ्,ओ, फराक फेन हुइ सेकठ्मुले, इ ढर्टिमेअँखुवा निकरके
फुलकुमारीहुक्र

फुलकुमारीहुक्र

सत्य हो इ बाटहमार पुर्खाओनइ थारू हो कैख चिन्हैना चिजएक्ठो भेग्वा फे रहउ ब्याला पुर्खाओन रहर नाहिबाढ्यटा रलहिनमजुबुरि रलहिनविवसटा रलहिनआमम्हि कहबेर गरिबीपन रलहिनभेग्वा लगाइ पर्नापुट्ठा डेखाइ पर्नाकर्रा चुट्टर डेखाइ पर्नालाज
रम्ट रम्टम

रम्ट रम्टम

सुनसान् गल्लिमडम डम डमरु बाजठरम्टक ¥याला बहठअंगना, बहरि, कोन्टिमबारि ब्युँरा ओ खेन्हवमज्वान, बुह्राइल, ढिह्रयाइल सबजनखन्हेइठ साँक्किर गल्लिमरम्ट रम्टम ।१।डमरु बाजठ टालमकलकर्हवा गाइठ सुरमरमकल्लि, लाल मुह चुम्रइटिखियाइल डाँट
हमे छक परछिन

हमे छक परछिन

क्रन्तिके खातिर उठल करमठ हाथसवकुरसीके खातिर सदैये झुकल देखछिन ।जनपछिय कहलावे वला नेतासवपैसाके लालचमे बिकल देखछिन, तहमे छक परछिन ।माटिके अधिकार आने साकवु कहेवलासवन्यायके खातिर सडकमे उतरल देखछिन ।क्रान्ति देखिके डरावेवला आदमीसियाकेसहिदके
पैरक पठ्री

पैरक पठ्री

आज सुनपुर गाँउम गाँउक सक्कु किसनोन डङ्ग्वान घरक बेगारी धान काट खेट्वा ओहर लग्लिन् । हरेक वरष अगहनम डङ्ग्वान धान कट्ना बेगारी लेठ । डङ्ग्वा सुनपुर गाउँक देशबन्ध्या गुरुवा हो । ओह गुरुवा हुइलक कारण गाउँक किसनोन एक दिनिक निशुल्क बेगारी
थारु साहित्यके उपन्यास ओ उपन्यासकार

थारु साहित्यके उपन्यास ओ उपन्यासकार

उपन्यासके ओंरि थारु साहित्यमे आख्यानके ओंरि रामप्रसाद राय थारुके ‘थरुहट के बउवा और बहुरिया’ पोस्टा कैल (सर्वहारी, २३ः २०७०) । मने रामप्रसाद रायके थरुहट के बउवा और बहुरिया (२०१९) हे महेश चौधरी गीति नाटक कहले बटाँ । डा.गणेश खरालके अन्सार
सनेश

सनेश

बिहन्नी भुटियाहे हुँकान टोलके काकी ससुइया फौगनी अंगनामे आके कहलीन, ‘मोर पटोहिया सोम्मार लैहर जाइटा । टै फेन पठाइ जा । उहे कहे आइल रहुँ ।’ अत्रा कहिके पितिया ससुइया (काकी ससुइया) चलगिली । भोजके बाद पहिलचो दुलहीहे पठाइ जउइया मनै सनेशके
कुछ कर निस्याकठु

कुछ कर निस्याकठु

यी जिन्गीम कुछ करु कठु कर निस्याकठुखाली खाली पन्नाम इतिहासके गाथा भर निस्याकठु । सक्कु ओहरसे सौस्याटल बाटु समस्याले घेरल बाटुटमान संघरेनके बाट ओहफे आघ बह्र निस्याकठु । देश दुवार कुड्कति बाटु गोचालिनसे जुट्टीफे बाटुहाठ पकर्ख टन्बी
मैयक प्रस्ताव

मैयक प्रस्ताव

२०५६ साल । कलेजक पहिला दिन । पहिला दिन जो म्वार लजर एकठो लहरैटि रलक सुग्घर फुलम परल् । म्वार ग्वारा उहँर्य बहर्टि गैल् । मै कहोंर जाइटु कना महि स्वयं पटा निरह । माहोल चारुओंर मगमगाइटह । मै भावना ओ कल्पनम उरटहँु । मानौ मै