थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत १८ अगहन २६४३, बिफे ]
[ वि.सं १८ मंसिर २०७७, बिहीबार ]
[ 03 Dec 2020, Thursday ]

दस्तावेज

थारु महिलाः हस्तकलामे सिपार

थारु महिलाः हस्तकलामे सिपार

उन्नती चौधरीधनगढी, ३० भदौं । खेतीपातीके काम सेकल ओ कोरोना संक्रमण महामारी रोकथामके लाग लागू करल लकबन्दी÷निषेधाज्ञासे घरेम बैठे परल बेला थारु महिलाहुक्रे हरचाली अर्थात् फुर्सदके काम करटी हस्तकलाके सामान बनैटी रहल बटै । बठौनी
अनत्तर (अनन्त) ब्रत

अनत्तर (अनन्त) ब्रत

ढेर इतिहासकार ओ बिद्वानहुकनमे थारुबारे विबाद विल्गाइल बा । कतिपयसे थारुहुकनहे किराँत मानल बाटै कलेसे कोई द्रविड मूलके मन्ले बौ । कोई टे किराँत, कोई टे द्रविड कहलेसेफे ढेर इतिहासकार ओ विद्वानहुक्रे थारुहुकनहे अनार्य रहल बटैठै
‘अग्रासनके पोका संगे कोरोना नजाए’

‘अग्रासनके पोका संगे कोरोना नजाए’

पहुरा समाचारदाताधनगढी, ७ भदौ । ‘यी साल अग्रासन डेहे आई नैसकब । भुुलचुक गुना माफ करहो ।’ थारु कल्याणकारिणी सभा (थाकस) कैलालीके उपसभापति माधव थारु आपन डिडी ओ बहिनियाहे फोनमार्फत सन्देश पठैलै । कैलालीके गोदवारी नगरपालिका ८ फकलपुर घर
थारु समुदायमे आज ‘अष्टिम्की’

थारु समुदायमे आज ‘अष्टिम्की’

पहुरा समाचारदाता धनगढी, २७ सावन । हिन्दू धर्मवलम्वीहुक्रे टमान मठ मन्दिरमे पूजापाठ करके भगवान श्रीकृष्णके जन्मदिन मनैटी रहल बेला पश्चिम नेपालके थारु समुदाय भर आजसे अष्टिम्की टिहुवार मनैटी रहल बाटै । सुर्खेतसे पश्चिम कञ्चनपुर
फुर्सदमे ‘हरचाली’, फाइदै फाइदा !

फुर्सदमे ‘हरचाली’, फाइदै फाइदा !

धनगढी, २४ सावन । धान लगैना ओराइलपाछे कैलालीके कैलारी गाउँपालिका ६ बेनौलीके विपति थरुनी (६०) डेलुवा सजैनामे लागल बाटी । जवान नातिनियाक् भोजक् दिन लग्गे अइटी रहल बेला सगुनके रुपमे डेहेक् लाग उहाँ डेलुवा सजैनामे जुटल हुइटी । उहाँ किल
थारु भासा बहसके भौगर – २

थारु भासा बहसके भौगर – २

डा.कृष्णराज सर्वहारी आज्कल गणेश वर्तमान सामाजिक सन्जाल फेसबुकमे थारु भासम् सब्से घनके रचना पोस्ट कर्ठा । कविटाबाहेक अपन मनके आउर फेन बाट उहाँ पोस्ट कर्टि रठाँ । सावन १२ गटे उहाँ थारु भासक् एकरुपटक सवालमे ढ्यार बहस काजे ? सिर्सकमे
बच्चन्के टिहुवार ‘गुरही’

बच्चन्के टिहुवार ‘गुरही’

भूमिकाः संस्कृटि हरेक समुडायके आपन मौलिक पहिचान हो । पहिचान, कौनो फेन जाटके आपन कला, संस्कृटि ओ भासासे जोडल रहठ् । थारू समुडायमे फेन अस्टे ढेर संस्कृटि रहल बा । जौन अब्बे ढेउरहस् लोप हुइना अवस्ठामे बा । बँचल कुछ संस्कृटि बाह्य संस्कृटिके
प्रकृति पूजा  ‘गुरही’

प्रकृति पूजा ‘गुरही’

भूमिका संस्कृति हरेक समुदायके अपन मौलिक पहिचान हो । कौनोफे जातिके जातीय पहिचान कला, संस्कृति ओ भाषासंग जोरल रहठ । थारू समुदायमे फे यैसिन ढेर संस्कृति रहल बाटै । जौन अब्बे प्रायः लोप हुइना अवस्थामे बाटै । समय, काल ओ ऋतु अनुसार
मोर गाउँ ओ गुरही

मोर गाउँ ओ गुरही

मोर गाउँ छोट बा,ओ यी छोट ठाउँ हो जहाँ टमान फरक जाति ओ धर्म मन्ना मनै बैठ्टै । पहिले मोर गाउँहे ‘तुलसीपुर’ कहिके चिन्हजाए, आब भर मोर गाउँहे ‘थेवै’ कहिजाइठ । यी घोडाघोडी नगरपालिका वठा नम्बर १० पहलमानपुर कैलालीमे अवस्थित बा । यी धनगढी
डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग तिजके निर्जल ब्रत

डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग तिजके निर्जल ब्रत

पहुरा समाचारदाता धनगढी,८ सावन । डाडुभैयनके लम्मा आयुके लाग रानाथारु समुदायके दिदीबहिनीयाहुक्रे निर्जल ब्रत रख्टी तिज पर्व मनैले बाटै । सुदूरपश्चिम प्रदेशके कैलाली ओ कञ्चनपुरमे बसोबास रहल रानाथारु समुदायके महिलाहुक्रे विफेक