थारु राष्ट्रिय दैनिक
भाषा, संस्कृति ओ समाचारमूलक पत्रिका
[ थारु सम्बत ३० माघ २६४९, बिफे ]
[ वि.सं २९ माघ २०८२, बिहीबार ]
[ 12 Feb 2026, Thursday ]

विचार

थारु भासा विकासके यात्रा

थारु भासा विकासके यात्रा

थारु भाषा मे कलम चलावे वलाना के जतन्या कमी छै वकर से बेसी छपावे वलाना (प्रकाशक) के कमी छै । लेख रचना, कथा कविता, गीत गोदहन, समाजिक संस्कार, रितिरिवाज, आलोचना, समालोचना, विचार विमर्श, बाल कथा, साहित्य, हाँस्यव्यग्य (हसनीखिजनी), उखाम, नाटक,
थारु मानक भाषा बहससे सिखाई

थारु मानक भाषा बहससे सिखाई

थारु मानक भाषम् अब्बे बहस जारी बा । बहस पहिलेहीं हुइना रहे, मने बहुट डिन पाछे हुइटा । पाछे हुइलेसे फे यी बहुट मजा बात हो । मै कौनो भाषा बिशेषज्ञ नाइहुँ, टबु फे भासा बहस मिहिन घिंरह्याडारल । पर्हना, लिख्ना, छलफलमे भाग लेना बानिक कारणफे
बाल दिवस ओ कोभिड–१९ के प्रभाव

बाल दिवस ओ कोभिड–१९ के प्रभाव

बाल दिवस एक अइसिन दिन हो जहाँ लर्कनके अधिकार ओ शिक्षाहे बढावा डेहठ । विश्व बाल दिवस सर्वप्रथम सन् १९५४ मे अन्तर्राष्ट्रिय बाल दिवसके रुपमे स्थापना हुइल ओ हरेक बरसके २० नोभेम्बरमे अन्तर्राष्ट्रिय एकता, विश्वभरके बालबालिकाहुकनमे
थारु बोलि भाषा काजे संकटम पर्टि बा ?

थारु बोलि भाषा काजे संकटम पर्टि बा ?

“पाह्रा पण्डित कौनो काम, मर्बो कोड्रा ढान्ढान”, अघट्यक पुर्खनक कहकुट अब्ब सुन्बो ट महा अन्ख्वाहर लागट । साइड ओहमार हुइ, हमार पुर्खन एकडिन फे पाठशालाक मुह नैडेख्ल । पह्र नैजैटिकि गबुझ रठ कना बाटम मै विश्वास नैकर्ठु । पह्रना कलक गुन
कोरोनाकहर ओ नेपाली चेत

कोरोनाकहर ओ नेपाली चेत

चीनके बुहानमे डिसेम्बर, २०१९ मे पहिचान करल नोवल कोरोना भाइरस सुरुमे चीनके बुहानमे जैटी रहल अर्थतन्त्रके ढाड सेक्न अचुक अस्त्रके रुपमे लेहल पश्चिमाहुक्रे । कोरोना भाइरस, नेपालमे कुछ समय रमाइलो जोक्स बनल । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड
पुरुवसे पच्छिँउसम एक्क थारु मानक भाषा सझ्या कसिक बनाइ सेक्जाइ ?

पुरुवसे पच्छिँउसम एक्क थारु मानक भाषा सझ्या कसिक बनाइ सेक्जाइ ?

जब कौनो बोली लिखोट रुपम बेल्स सुरु हुइट, टब जाक मानकताक विषय बाट चिट कर्ना उँर्वा पाइठ । थारु बोली भाषा लिखोट रुपम आइल इतिहास नम्मा नैहो । डान्चे चार पाँच दशक बिलिटक हेर्लसे सब लुरिभुरि पटा लगाइ सेक्जाइठ । थारु बोलि भाषा, संस्कृतिह
थारु भासा बहसके भौगर ३

थारु भासा बहसके भौगर ३

ओंरि डारेबेरः भडौहा गर्मिमे थारु भासाके बहस जेंउ जेंउ ढिक्टि जाइटा । अम्हिक्के रामसागर चौधरी थारु भासामे ‘पुर्बिया थारु भाषा भाग १’ लेख लिख्ले बटाँ । यि लेख फेसबुकमे डारलमे बुद्धसेन चौधरीके नेपालि भासामे टिप्पनि बा,‘ कुरा त सहि
अनत्तर (अनन्त) ब्रत

अनत्तर (अनन्त) ब्रत

ढेर इतिहासकार ओ बिद्वानहुकनमे थारुबारे विबाद विल्गाइल बा । कतिपयसे थारुहुकनहे किराँत मानल बाटै कलेसे कोई द्रविड मूलके मन्ले बौ । कोई टे किराँत, कोई टे द्रविड कहलेसेफे ढेर इतिहासकार ओ विद्वानहुक्रे थारुहुकनहे अनार्य रहल बटैठै
अटवारी ओ ‘भेवा’ पर्व

अटवारी ओ ‘भेवा’ पर्व

मै बैठक कोठामे छिरेबेर मोर बाबा ओ डाई ‘अटवारी’ के बारेमे कुछ छलफल करटि रहिट । मै ओइनके बाटचिट सुन्नु टब मही यी अटवारीके बारेमे लेख लिख्ना विचार हुइल । मै यी विषयमे ठोर–ठोर कन्फयुज रहु टबमारे मोर बाबा कुछ विचार डेलै । अटवारी थारु समुदायके
थारू राजनीतिको बाटो

थारू राजनीतिको बाटो

चन्द्र किशोर संविधान बन्दै गर्दा थारूहरूले अस्तित्वविहीनताको दलदलबाट उम्किनका लागि शान्तिपूर्ण संघर्ष गर्दै थिए । आशा थियो, संघर्षबाट प्राप्त नैतिक बलका अगाडि नियन्त्रणकारी नियत टिक्न सक्नेछैन, तर त्यस्तो भएन । निसासिएको